मानव अंगों की तस्करी कर कमाई करने में जुटा आईएसआईएस

फतवे में कहा गया है कि जान को खतरा हो फिर बंधक के अंग निकालना जायज

नई दिल्ली। अपनी क्रूरता के लिए मशहूर खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के दस्तावेज का अंग्रेजी में अनुवाद हुआ है, जिसमें लिखा है कि आईएस बंधक बनाए गए लोगों के अंगों की तस्करी कर सकता है। आईएस की ओर से मानव अंगों को बेचने और दूसरों के शरीर में लगाने की मंजूरी दिए जाने के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही है।
आईएस की तरफ से 31 जनवरी, 2015 को जारी फरमान में कहा गया है कि किसी मुसलमान की जान बचाने के लिए बंधकों के शरीर से अंगों को निकालना जायज है, भले ही इससे बंधक की जान को कोई खतरा हो। हालांकि रॉयटर ने स्वतंत्र रूप से दस्तावेज की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की। इसी साल मई में अमेरिकी सेनाओं की ओर से पूर्वी सीरिया में की गई छापेमारी के दौरान यह दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आईएस की रिसर्च और फतवा कमिटी की तरफ से जारी किए गए फरमान में कहा गया ‘काफिर की जिंदगी और उसके अंगों का सम्मान नहीं किया जाना चाहिए। सजा माफी के साथ इनके शरीर से अंगों को निकाला जा सकता है।’ अमेरिकी एजेंसियों की ओर से किए गए फतवे के अनुवाद के मुताबिक 68वें फतवे में कहा गया है कि बंधक के अंगों को निकालने से यदि उसकी जान को खतरा हो तो भी ऐसा किया जाना चाहिए।
यह दस्तावेज इस बात की पुष्टि नहीं करता कि आईएस मानव अंगों की तस्करी में शामिल है या फिर बंधकों के अंग निकालकर अपने आतंकियों को बचा रहा है। लेकिन अमेरिकी एजेंसियों का अनुमान है कि जंग में घायल लड़ाकों को बचाने और कमाई करने के लिए आईएस मानव अंगों की तस्करी करने के काम में जुटा हुआ है। इससे पहले इराकी सरकार ने आरोप लगाया था कि आईएस कमाई करने के लिए बंधकों के शरीर से अंगों को निकाल रहा है। इस दस्तावेज में ‘काफिर’ की परिभाषा भी नहीं बताई गई है। माना जा रहा है कि आईएस ने ईसाइयों, शिया मुस्लिमों, अन्य धर्मावलंबियों और उसके कट्टर विचारों से सहमति न रखने वाले सुन्नी मुस्लिमों को काफिर करार दिया है।

Pin It