माननीयों से कैसे करें उम्मीद

सिर्फ चुनाव हो जाना हमारे लोकतंत्र की बड़ी कामयाबी नहीं है। हमें देखना चाहिए कि हमारी संस्थाएं कितनी लोकतांत्रिक हैं। हम और आप कितने लोकतांत्रिक हुए हैं। एडीआर के अनुसार 542 सांसदों में से 185 के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। 542 में से 112 सांसदों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं।

sanjay sharma editor5कहते हैं अच्छा लीडर समाज के साथ-साथ देश को भी एक दिशा देता है। अच्छी लीडरशिप वही होती है जिसकी सोच दूरगामी होती है और जनता और देश के हित के लिए अच्छा सोचे। हमारे देश में ऐसे सैकड़ों नेता रहे हैं जिन्होंने सिर्फ और सिर्फ देश की चिंता की। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया। जेपी हों या लोहिया। सरदार बल्लभ भाई पटेल हों या भीमराव अंबेडकर। इतिहास के पन्ने इनके विचारों और उनके द्वारा किए गए कार्यों से भरे पड़े हैं। इन लोगों की प्राथमिकता में हमेशा देश ही रहा। उनके व्यक्तित्व में इतना करिश्मा था कि उनकी एक झलक पाने के लिए जनता की भीड़ जुटती थी। उनकी सभाओं में जबरदस्ती की भीड़ नहीं जुटानी पड़ती थी। पहले के नेताओं को सुनने के लिए जनता पैदल 20-20 किलोमीटर की दूरी तय कर लेती थी। वो लोग जेल गए तो देश के लिए, लेकिन आज हालात बदल गए हैं। न उस तरह के नेता हैं और न ही नेताओं के विचारों का अनुसरण करने वाली जनता। आज के नेता देश या जनता की वजह से नहीं बल्कि घोटालों की वजह से जेल जाते हैं। उनकी सभाओं में जबरदस्ती की भीड़ जुटायी जाती है। लोगों को पैसे देकर बुलाया जाता है। हम अक्सर अपने लोकतंत्र को महान बताते रहते हैं। ये ठीक भी है लेकिन महानता के बखान के चक्कर में हम काफी सतही हो जाते हैं। मसलन क्या भारतीय लोकतंत्र की इतनी सी कामयाबी है कि यहां चुनाव होते हैं और लोग वोट देते हैं। सिर्फ चुनाव हो जाना हमारे लोकतंत्र की बड़ी कामयाबी नहीं है। हमें देखना चाहिए कि हमारी संस्थाएं कितनी लोकतांत्रिक हैं। हम और आप कितने लोकतांत्रिक हुए हैं। एडीआर के अनुसार 542 सांसदों में से 185 के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। 542 में से 112 सांसदों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। एडीआर की ही रिपोर्ट है कि केरल में 60 प्रतिशत विधायकों ने इनकम टैक्स फाइल नहीं किया है। बंगाल में ऐसे विधायकों की संख्या 20 प्रतिशत है। क्या ये सब इतने गरीब होंगे। दुनिया के सबसे बड़े और महान लोकतंत्र में हर चुनाव में निर्वाचित महिला उम्मीदवारों की संख्या नगण्य के बराबर होती हैं। और यह भागादारी नहीं बढ़ रही है तो इसके पीछे भी राजनीतिक दलों के महान नेता हैं। बीते दिनों देश के सात राज्यों में राज्यसभा की 57 सीटों के लिए चुनाव हुआ। जिन राज्यों में निर्धारित सीट से ज्यादा उम्मीदवार थे वहां वोट की खरीद-फरोख्त हुई। यहां सवाल उठता है कि देश को दिशा देने वाले हमारे माननीय ऐसे हैं तो हम उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं।

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