महीनों टरकाने के बाद मिली क्लास की इजाजत

  • कुलपति का घेराव करने जा रहे छात्रों से मिली प्रॉक्टोरियल टीम
  • आदेश को ताक पर रख विभागाध्यक्ष कर रहे हैं मनमानी
  • एमसीए की छात्रा को निकाला गया था क्लास से

 

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में एमसीए की छात्रा ज्योति कुमारी को क्लास करने की अनुमति को लेकर विश्वविद्यालय के उदासीन रवैये का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक अपने प्रवेश को लेकर कुलपति और विभाग के हेड की वजह से छात्रा को क्लास करने में भी भारी दिक्कतें पेश आईं। अंतत: किसी तरह से कुलपति की अनुमति के बाद क्लास में बैठने की इजाजत मिल सकी है।
मामला प्रवेश से जुड़ा हुआ है। एमसीए की छात्रा को पहले प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने की नाम पर परेशान किया गया और क्लास में बैठने नहीं दिया गया। लेकिन बाद में जब प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो गई तब छात्रा का प्रवेश यह कहकर कैंसिल कर दिया कि आपका प्रवेश वैध नहीं है। जिसे लेकर कई महीनों तक छात्रा कुलपति और एचओडी का चक्कर काटती रही। दोनों एक दूसरे के पाले में गेंद डाल देते रहे। परेशान होकर छात्रा व उसके कुछ साथियों ने सोमवार को करीब तीन बजे कुलपति का घेराव करने की योजना बनाई, लेकिन प्रॉक्टोरियल टीम ने उन्हें अपने कार्यालय आने के लिए कहा। मामले की जानकारी होने के बाद कुलपति ने छात्रा से मुलाकात की, तब कही जाकर छात्रा को क्लास करने की अनुमति मिली। विश्वविद्यालय में इस तरह के कई मामले हैं। जिसमें छात्र परेशान होकर विभागों के चक्कर काट रहे हैं और परेशान हो रहे हैं।
यह है पूरा मामला
अरुणाचल विश्वविद्यालय की एक छात्रा ज्योति तिवारी ने लखनऊ विश्वविद्यालय के एमसीए विभाग में 2015 में प्रवेश लिया था। प्रवेश के दो महीने बाद उस छात्रा को क्लास से निकाल दिया गया। ज्योति की उपस्थिति भी नहीं दर्ज की गयी । वहीं छात्रा ने 2015 में प्रवेश लिया था और प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा भी दे चुकी है इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक रिजल्ट घोषित नहीं किया है, ऐसे में यहां छात्रा ने कुलपति से बात की और कुलपति ने रजिस्ट्रार के पास उसका ज्ञापन भेज दिया था। इसके बाद वह ज्योति तिवारी ने रजिस्ट्रार से मिलने के बाद रजिस्ट्रार ने विभाग के हेड से मिलने के लिए भेज दिया इसी में छात्र को भटकते हुए दो महीने गुजर गया लेकिन प्रशासन उसकी सुनने को तैयार नहीं

ऐसे में छात्रा का आरोप है कि बुधवार को एचओडी से मुलाकत करने के लिए उनके ऑफिस पहुंचे तो एचओडी आरआर सिंह ने छात्रा की एक न सुनी और छात्रा को अपने ऑफिस से जाने के लिए बोल दिया। ज्योति ने कहा कि इससे पहले भी प्रो ब्रिजेन्द्र सिंह ने उस छात्रा को एचओडी के कहने पर अपनी कक्ष में पढऩे के लिए नहीं बैठने देते थे। जबकि छात्रा प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा दे चुकी थी। यदि विवि प्रशासन को अगर उसकी मार्कशीट या उसके प्रमाण पत्रों में अगर कोई कमी दिखी भी थी तो उसे पहले ही सेमेस्टर की परीक्षा देने से रोकना चाहिये था ,लेकिन विवि प्रशासन ने ऐसा नहीं किया इसके बाद उसे क्लास नहीं लेने दिया गया जिससे छात्रा की पढ़ाई पर कभी फर्क पड़ रहा था ।

विभागाध्यक्ष का रवैया खराब
लम्बे समय से छात्रा के मामले कुलपति से आश्वासन मिलने के बाद भी विभागाध्यक्ष अपनी मनमानी करते रहे। सवाल करने पर उनका कहना था कि मैं क्या करूं कुलपति जी ने ही सारा मामला फसाए रखा है। वह ही नहीं चाहते की छात्रा को परमिशन मिले।
कक्षा में छात्राओं की उपस्थिति है जरूरी

जहां एक तरफ लविवि हो या उससे सम्बद्ध विद्यालय हो हर जगह छात्र-छात्राओं की उपस्थिति पूर्ण होनी चाहिए। उसे देखकर ही परीक्षा में बैठने का आदेश दिया जाता है ऐसे में अगर छात्रा की उपस्थिति कम पायी जाती है तो उसे परीक्षा से रोका जा सकता है लेकिन यहां पर प्रोफेसर ही क्लास नहीं करने दे रहे थे। अब छात्रा ने सवाल उठाते हुए यह कहा की प्रोफेसर की गलती के कारण हमारी अटेंडेंस कम हुई जो आपे वाली परीक्षा में समस्या उत्पन्न करेगी। उस समय इसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेगा। अब उस समय मुझे ही दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

छात्रों ने किया घेराव तो मिली इजाजत
सोमवार को छात्रों ने कुलपति का घेराव किया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची प्रॉक्टर टीम ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रख कुलपति से छात्रा को मिलवाया। जिसके बाद छात्रा को कक्षा में बैठने की अनुमति मिल सकी।

Pin It