महिलाओं में कैंसर की रोकथाम के लिए संजीवनी साबित हो रही संपूर्णा

  • डफरिन अस्पताल में खुली संपूर्णा क्लीनिक मरीजों पर लगातार रखती है निगरानी
  • हर छठें मिनट में कैंसर की वजह से दम तोड़ती है एक महिला

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। भारत में बच्चेदानी के मुख के कैंसर की वजह से हर छठवें मिनट में एक महिला की मृत्यु हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 तक भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या पांच गुना होने की आशंका व्यक्त की गई है। ऐसे में प्रदेश सरकार की तरफ से महिलाओं में कैंसर की रोकथाम के लिए खुली सम्पूर्णा क्लीनिक संजीवनी बनकर सामने आई है। इस क्लीनिक की वजह से महिलाओं में होने वाले तरह-तरह के कैंसर की रोकथाम में सहायता मिली है, जिसे चिकित्सक शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं। यदि लक्ष्य के अनुसार बेहतर परिणाम मिले, तो प्रदेश भर में सम्पूर्णा क्लीनिक खोलने की दिशा में भी सरकार तेजी से प्रयास शुरू करेगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं में कैंसर की समस्या तेजी से फैल रही है। इस बीमारी पर नियंत्रण स्थापित करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। महिलाओं में बच्चेदानी के मुख के कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर की समस्या सबसे अधिक है। कैंसर से होने वाली मौत के कारणों में बच्चेदानी के मुंह के कैंसर ने ब्रेस्ट कैंसर को पीछे छोड़ दिया है। जबकि पुरुषों में अब भी फेंफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा सबसे ऊपर है। द ग्लोबल बर्डन ऑफ कैंसर की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सन 1990 में 34,962 महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की वजह से मौत हुई थी। 2013 में 40,985 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर और 47,587 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के कारण मौत के मुंह में चली गई थी। सर्वाइकल कैंसर के नए मामलों में 0.2 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में 166 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इतना ही नहीं वर्ष 2025 के अंत तक भारत में कैंसर रोगियों की संख्या 5 गुनी हो जाएगी, जिसमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं ज्यादा होगी। ऐसे में महिलाओं को कैंसर की भयावहता से बचाना आवश्यक है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक आलोक कुमार के मुताबिक प्रदेश का पहला सम्पूर्णा क्लीनिकल डफरिन अस्पताल में खुला है। वहां आने वाले मरीजों, चिकित्सकीय प्रयासों और सुविधाओं का समय-समय पर निरीक्षण किया गया है। अब तक मिली जानकारी और तथ्यों के अनुसार सम्पूर्णा क्लीनिक का रिस्पांस बेहतर है। इस अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली महिलाओं को कैंसर के प्रकार, उसके लक्षण और भयावहता के बारे में जागरूक किया जाता है। महिलाओं में बच्चेदानी के मुख के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और कैंसर के अन्य प्रकारों के बारे में जानने की उत्सुकता देखी गई है। कैंसर की स्कैनिंग कराने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा शुभ संकेत है। आंकड़ों के अनुसार एक साल में 2000 से अधिक महिलाओं में कैंसर से संबंधित लक्षणों की जांच की गई। इस दौरान मात्र दो महिलाओं को केजीएमयू के लिए रेफर किया गया। डफरिन अस्पताल में लगभग एक साल पहले इस क्लीनिक का संचालन शुरू किया गया था। इस क्लीनिक के माध्यम से सरकार की मंशा थी कि प्रदेश की महिलाओं को बच्चेदानी के कैंसर से पीडि़त महिलाओं की संख्या को नियंत्रित किया जा सके। इस दिशा में सरकार को बेहतर परिणाम मिले हैं। इसलिए पूरे प्रदेश मे इस क्लीनिक को खोलने पर विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को तैयार कर शासन के पास बहुत जल्द भेजा जायेगा। यदि प्रस्ताव पर मुहर लग गई, तो बहुत जल्द प्रदेश भर में सम्पूर्णा क्लीनिक खुल जायेगी।

अस्पताल में जांच की सुविधा भी उपलब्ध

डफरिन अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सविता ने बताया कि महिलाओं में कैंसर के प्रति जागरूकता में बढ़ोत्तरी हुई है। अब महिलाएं कैंसर के लक्षणों को लेकर काफी सतर्क रहती हैं। अस्पताल में आने वाली महिलाएं स्कैनिंग कराने में बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाती हैं। एक साल में करीब 2000 महिलाओं की स्कैनिंग की गई। इसके अलावा सम्पूर्णा क्लीनिक में जेएसवाई योजना, टीकाकरण करने में गुणवत्ता को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन को सामान्य तापमान की आवश्यकता होती है, जोकि अधिकतर अस्पतालों में देखने को नहीं मिलता है। इसका अस्पताल में विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसके अलावा अस्पताल में ब्रेस्ट फीडिंग पर विशेष कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। वार्डों में ब्रेस्ट फीडिंग को महत्व दिया गया है, जिसमें चिकित्सक प्रसूताओं को ब्रेस्ट फीडिंग की सही जानकारी देते हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में 12 बेड का एसएनसीयू वार्ड है, इसमें उन बच्चों को रखा जाता है जोकि नॉर्मल नहीं होते हैं। इतना ही नहीं अस्पताल में इलाज के लिए आयी सभी महिलाओं का ब्लड शुगर जांच अनिवार्य कर दी गयी है। इसके अलावा महिलाओं के पानी की जांच भी की सरलता से की जाती है। इससे महिलाओं में होने वाले बच्चेदानी के मुंह के कैंसर और यौन संक्रमण की जानकारी आसानी से मिल जाती है। गर्भवती महिलाओं की ब्लड शुगर जांच अनिवार्य रूप से की जाती है।

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