महिलाओं के खिलाफ हिंसा मामलों से सख्ती से निपटें

कई आरोपियों ने जेल से वापस आने के बाद बदले की कार्यवाही में लड़कियों से बलात्कार से लेकर उनकी हत्या तक की है। महिलाओं और बच्चियों के प्रति हिंसा की घटनाओं की तादाद लगातार बढ़ रही है। इससे आम जन में अपराधियों का डर तो बढ़ता ही है, कानूनी प्रक्रिया की खामियां भी उजागर होती हैं। लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा, बलात्कार, यौन उत्पीडऩ की घटनाएं, घर, मोहल्ले, पार्क, स्कूल-कॉलेज, ऑफिस जैसे स्थानों पर भी घटित हो रही हैं। एक साल-दो साल की बच्चियों से लेकर 60-70 साल की महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं प्रकाश में आ रही हैं।

डॉ. संजीव राय
यह एक सामान्य घटना नहीं है। दिल्ली में दिनदहाड़े एक लडक़ी की कैंची घोंप कर हत्या कर दी गयी। हत्या करने वाले ने बताया कि वह उस लडक़ी से शादी करना चाहता था, लेकिन लडक़ी उससे पीछा छुड़ाना चाहती थी। दिल्ली में ही पिछले साल, छेड़छाड़ और बलात्कार के आरोपी ने जेल से छूटने के बाद शिकायत करने वाली लडक़ी की उसी मोहल्ले में चाकू मार कर जान ले ली थी। ऐसे ही कई मामलों में एक तरफा प्यार के कारण लडक़ी के चेहरे पर एसिड फेंकने की घटनायें हो चुकी हैं।
कई आरोपियों ने जेल से वापस आने के बाद बदले की कार्यवाही में लड़कियों से बलात्कार से लेकर उनकी हत्या तक की है। महिलाओं और बच्चियों के प्रति हिंसा की घटनाओं की तादाद लगातार बढ़ रही है। इससे आम जन में अपराधियों का डर तो बढ़ता ही है, कानूनी प्रक्रिया की खामियां भी उजागर होती हैं। लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा, बलात्कार, यौन उत्पीडऩ की घटनाएं, घर, मोहल्ले, पार्क, स्कूल-कॉलेज, ऑफिस जैसे स्थानों पर भी घटित हो रही हैं। एक साल-दो साल की बच्चियों से लेकर 60-70 साल की महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं प्रकाश में आ रही हैं।
अपरिचित के अलावा कई बार परिवार के सदस्य और रिश्तेदार, यौन उत्पीडऩ में शामिल रहते हैं, इसलिए मां-बाप, अभिवावकों को तो सजग रहना ही चाहिए, बच्चों को भी इस मुद्दे पर सचेत करना चाहिये। सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग के आलावा पुलिस को बच्चों के साथ इंटरेक्शन करना चाहिये और उन्हें शिकायत करने के क्या-क्या चैनल्स हैं इसके बारे में बताना चाहिए।
बच्चों के यौन शोषण की ख़बरें लगातार आ रही हैं, प्ले-स्कूल से लेकर बस, वैन और आस-पड़ोस में घटनाएं हो चुकी हैं। बच्चों के खिलाफ अपराधों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2012 की तुलना में 2013 में बच्चों के खिलाफ अपराधों में 52 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। पुरुष प्रधान समाज में लड़कियों को कमजोर मानकर उनके समाजीकरण का भी ये परिणाम होता है कि वो अक्सर लडऩे के बजाय चुप रह जाती हैं। बच्चों और स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों को ये समझाना होगा कि अगर कोई उनके साथ अश्लील बातें करता हैं, बिना पूछे फोटो खींचता है, अनावश्यक ढंग से छूने की कोशिश करता है,
भद्ïदे मजाक करता है, घूर -घूर कर देखता है, रास्ते में छींटाकशी करता है, अश्लील सामग्री दिखाने का प्रयास करता है तो उन्हें उस व्यक्ति से सतर्क रहने और इसकी शिकायत करने की जरूरत है। पुलिस, प्राचार्य या फिर बाल अधिकार सरंक्षण आयोग में इसकी शिकायत की जा सकती है।
यौन अपराधों की बढ़ती घटनाओं को नजर में रखते हुए यौन अपराध से बाल सरंक्षण अधिनियम, 2012 बनाया गया है। भारतीय दंड संहिता के अन्तर्गत भी विशेष धाराओं में दण्ड का प्रावधान है परंतु जिस प्रकार से, जोर जबरदस्ती प्यार-शादी
की जिद्द और मना करने पर दिन दहाड़े हत्या का दुस्साहस हो रहा है, उसको देखते हुए ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए। इन मामलों में, खाड़ी के देशों में अगर कुछ प्रभावी कानून और दण्ड के प्रावधान हैं तो हमें उनसे कुछ सीख लेनी चाहिए।

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