महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

sanjay sharma editor5भारतीय महिलाओं की सूझ-बूझ और उनकी प्रतिभा किताबी ज्ञान की मोहताज नहीं है। इतिहास गवाह है कि कई अनपढ़ महिलाओं ने अपनी योग्यता और सूझबूझ से समाज के लिए ऐसे-ऐसे काम किए है, जिनकी आज भी चर्चा होती है।

आज पूरी दुनिया महिलाओं की प्रतिभा की कायल है। प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं का वर्चस्व बढ़ा हैै। सेना से लेकर अंतरिक्ष तक महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सरकार भी महिलाओं को आरक्षण देकर उनकी भागीदारी बढ़ाने का काम कर रही है। सरकारी नौकरी में जहां महिलाओं को 20 प्रतिशत कोटा निर्धारण कर दिया गया है तो वहीं सीआरपीएफ की नौकरी में भी 33 प्रतिशत का आरक्षण निर्धारित कर दिया गया है। ग्राम प्रधान चुनाव में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आरक्षण दिया जा रहा है। अब सरकार पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कर रही है। सरकार ने कहा कि वह संसद के आगामी बजट सत्र में पंचायतों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के बारे में संशोधन लाएगी। निश्चित ही यह फैसला सराहनीय है।
एक राष्टï्रीय कार्यशाला में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री बिरेंदर सिंह ने कहा कि यद्यपि कुछ राज्य पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर रहे हैं, लेकिन संविधान में संशोधन के बाद इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने आशा व्यक्त की, कि सभी राजनैतिक दल इस संशोधन का समर्थन करेंगे। मंत्री ने यह भी बताया कि इससे कानून में बदलाव भी होगा, जिसके तहत मौजूदा एकल कार्यकाल के बदले 5 सालों के दो कार्यकालों के संबंध में महिलाओं के लिए वार्ड आरक्षित किए जाएंगे ताकि वे विकास गतिविधियों की निरंतरता बनाए रख सकें। यह सच है कि जितनी तेजी से महिला साक्षरता बढ़ी है, उस हिसाब से महिला अभी आत्मनिर्भर नहीं हो रही हैं, या यह कहें कि उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा है। भारतीय महिलाओं की सूझ-बूझ और उनकी प्रतिभा किताबी ज्ञान की मोहताज नहीं है। इतिहास गवाह है कि कई अनपढ़ महिलाओं ने अपनी योग्यता और सूझबूझ से समाज के लिए ऐसे-ऐसे काम किए है, जिनकी आज भी चर्चा होती है। सरकार, सरकारी नौकरी से लेकर निकाय चुनाव में आधी आबादी को आरक्षण देकर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोडऩे की कोशिश कर रही है लेकिन आज भी लोकसभा व विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल रहा है। आखिर इस पर राजनीतिक पार्टियों की सहमति क्यों नहीं बन पा रही है? संसद में आधी आबादी की संख्या बढऩी चाहिए। उन्हें भी देश के नेतृत्व का मौका मिलना चाहिए। प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है लेकिन राजनीति में महिलाओं की भागीदारी कम है। जबकि भारतीय महिलाएं इतनी काबिल हैं कि वह पुरुषों के मुकाबले अच्छी राजनीति कर सकती हैं और देश के विकास में सहायक साबित हो सकती हैं।

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