‘महानिर्वाण’ नाटक देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भारतेन्दु नाट्य अकादमी में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से ‘रंगपाखी’ के तत्वावधान में रंगमंडल के विशेष सहयोग से चित्रा मोहन द्वारा ‘‘महानिर्वाण’’ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक में जीवन के बाद मुक्ती को और मनुष्य की जिज्ञासा विषय पर आधारित होने के साथ ब्लैक कॉमेडी भी शामिल थी। नाटक का मंचन इतना जीवंत था कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
नाटक में दिखाया गया कि मृत्यु के बाद राजाराम स्वंय उपस्थित होकर सब देखता सुनता है। वह अग्नि की चिता पर चढकर भस्म होना चाहता है किंतु पुराना श्मशान बंद हो गया है और वह नये श्मशान की इलेक्ट्रिक भट्टी में नहीं जलना चाहता। इसके साथ ही पत्नी के प्रति एक आशंका में उलझा है कि उसके सपनों में कौन आता है जो काला चश्मा और सूट पहनता है। तमाम घटनाओं के बाद पता चलता है कि स्वंय ही पत्नी के विचारों वाला व्यक्ति है। अब, जब उसके सारे बंधन टूटते हैं, तब उसे प्राप्त होता है महानिर्वाण। सत्य में मोक्ष या महानिर्वाण वही है जब व्यक्ति समस्त विकारों, मोह, बंधनों से मुक्त हो जाये। संगीत एवं गीत अत्यंत चुटीले व प्रासंगिक रहे। नाटक अपने आध्यात्मिक कलेवर और हास्य व्यंग की चाशनी में घुलकर ब्लैक कामेडी का सराहनीय एवं आकर्षक उदाहरण प्रस्तुत किया गया। अभिनय में अलका विवेक, अमित कुमार, मनोज शर्मा, सुनील दीक्षित, आशुतोष ने प्रमुख भूमिकांए निभाते हुए सशक्त अभिनय किया वही कोरस तथा अन्य सहयोगी चरित्रों में करिश्मा, अंकिता, अखिल, अंकित, अभिषेक, शुभम, अयाज़, सोमेंद्र, हेमन्त आदि ने प्रस्तुति को और संबल बनाया, प्रकाश परिकल्पना दलबीर सिंह व संगीत परिमार्जन तथा सहयोग अखिलेश दीक्षित का रहा। नाटक सतीश आलेकर ने लिखा था। गीत, परिकल्पना एवं निर्देशन चित्रा मोहन ने किया।

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