मरीजों को रेफर करने में नहींं लगाते समय

लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान होने के बावजूद ट्रामा भेजे जाते हैं मरीज
इलाज के लिए भटकते रहते हैं मरीज

 4Captureपीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी का डॉ.राममनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय सपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है। प्रदेश सरकार लोहिया अस्पताल को बेहतर बनाने के लिए सदैव प्रयासरत रहती है। वहीं यहां के चिकित्सक व अन्य कर्मी प्रदेश सरकार की मेहनत पर पलीता लगाते रहते हैं। इमरजेंसी हो या फिर ओपीडी मरीजों को ट्रामा व अन्य जगहों पर रेफर करने में जरा सी भी देर नहींं लगाते हैं। मरीज के लिए चिकित्सकों के पास हमेशा एक बहाना रहता है कि हमारे पास इस रोग के विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में मरीज केजीएमयू के ट्रामा सेन्टर भेजा जाता है और जब वहां भी जगह नहीं मिलती है , तो निजी संस्थानों का रूख करने पर मजबूर हो जाता है। ये आलम तब है जब लोहिया अस्पताल के साथ ही लोहिया आयुर्विज्ञान में न्यूरो तथा कार्डियक की इमरजेन्सी भी चल रही है। । लोहिया संस्थान में लगभग सभी विभागों के विशेषज्ञ हैं।
पहला मामला
बीते शनिवार को अजीत कुमार (57) का एकसीडेंट इन्दिरा नगर के खुर्रम नगर चौराहे पर हो गया था, जिसके बाद वहां की पुलिस उनकों लेकर सुबह- सुबह लोहिया अस्पताल की इमरजेन्सी पहुंची। जहां पर चिकित्सकों ने उनकों भर्ती तो कर लिया, लेकिन जांच के बाद सिर में खून का थक्का जमा होने की बात बताई साथ ही ये भी कहा कि इसका इलाज हमारे यहां नहीं है। इनकों ट्रामा ले जाओ। उसके बाद परेशान परिजनों ने लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मरीज को दिखाया। वहां पर भी चिकित्सक ने ट्रामा ले जाने की बात कही। उसके बाद परिजन मरीज को लेकर ट्रामा पंहुचते हैं वहां पर बेड न खाली होने की बात कहकर मरीज को भर्ती नहीं किया जाता है। पूरी रात मरीज यूं ही खुले आसमान के नीचे स्ट्रेच पर पड़ा रहता है। परिजन मरीज के इलाज के लिए चिकित्सकों के मानमन्वल में लगे रहते है, थकहार तीमारदार मरीज को लेकर बलरामपुर अस्पताल पंहुचते है। वहां पर मरीज का इलाज शुरू होता है। ऐसे में लोगों के मन में प्रश्न उठना लाजमी है कि जिस मरीज का इलाज बलरामपुर चिकित्सालय में हो सकता है, उसका इलाज लोहिया संस्थान या लोहिया अस्पताल में नहीं हो सकता है।
दूसरा मामला-
जानकीपुरम विस्तार के रहने वाले मनोज सिंह (22) के हाथ में चोट लग गयी थी। जिसका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा था। निजी अस्पताल में युवक की उंगली चिकित्सकों ने काटने के लिए कहा था। जिसके बाद मनोज ने लोहिया अस्पताल के कमरा नम्बर 6 में दिखाया था। चिकित्सक ने देखने के बाद कहा कि इसका इलाज यहां नहीं हो पायेगा। जहां इलाज करा रहे थे वहीं कराइये या फिर केजीएमयू जाइये। मनोज की माली हालत इतनी अच्छी नहीं थी कि वो किसी निजी अस्पताल में आगे का इलाज करा सके। जिसके चलते आज भी वो इलाज के बगैर ही रह रहा है।

हमारे यहां पर हेडइंजरी तथा प्लास्टिक सर्जन नहीं है। मरीजों के हित में उनको रेफर करना पड़ता है।
डा. ओमकार यादव चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राममानोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय

लोहिया अस्पताल की स्थिति

अस्पताल में बेडों की संख्या-475 चिकित्सक- 1०1 इमरजेन्सी में -44 बेड

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