मरीजों को नहीं मिल पाती आयुष विंग की जानकारी

बगैर फार्मासिस्ट के चल रहा आयुष विंग
आयुष विंग के बारे में परिसर में नहीं लगे हैं बोर्ड

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। डा.राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में आयुष विंग का निर्माण तथा उद्घाटन हुए एक वर्ष से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन एक महीने पहले ही इस विंग की शुरुआत हो पायी। इतने लम्बे समय बाद भी अस्पताल प्रशासन को इस विंग में फार्मासिस्ट की आवश्यकता ही नहीं महसूस होती है। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि मरीज कम आते हैं तो फार्मासिस्ट की आवश्यकता नहीं है लेकिन मरीजों को आयुष विंग की जानकारी देने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। परिसर में कहीं भी कोई बोर्ड नहीं लगा है कि आखिर आयुष विंग कहां है। इसका नतीजा है कि आयुष विंग के बारे में अधिकांश मरीज जान ही नहीं पाते कि आखिर वह है कहां।
प्रदेश सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवा को बेहतर करने का प्रयास कर रही है लेकिन कई अस्पतालों में अधिकारियों की लापरवाही की वजह से मरीजों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ता है। डा.राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में आयुष विंग में भी यही हाल है। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि जब यहां पर मरीज ही कम आते हैं तो फार्मासिस्ट क्यों रखा जाये और चिकित्सकों से काम चल ही रहा है। जबकि आयुष विंग में एक आयुर्वेदाचार्य तथा एक यूनानी डाक्टर तैनात है। ये दोनों चिकित्सक मरीजों को देखने के साथ ही दवायें बांटने का काम भी करते हैं।

भटकते रहते हैं मरीज
आयुष विंग का संचालन अस्पताल के इमरजेन्सी के सामने बने ट्रामा सेन्टर के ऊपरी छत पर हो रहा है जो कि अस्पताल के पिछले भाग में पड़ता है, जिसके कारण मरीजों को इसका पता ही नहीं चल पाता है। मरीज इधर-उधर भटकते रहते हैं और थक हार कर बिना इलाज के ही चले जाते है। विंग की जानकारी के लिए एक साइनबोर्ड लगा भी है वो भी छत के ऊपर। हालात ये है कि रोजाना यूनानी तथा आयुर्वेद से इलाज की इच्छा रखने वाले बमुश्किल दस मरीज ही यहां तक पहुंच पाते हैं।

आयुष विंग के लिए अभी तक किसी फार्मासिस्ट की तैनाती शासन की तरफ से नहीं की गयी है। यदि आवश्यक्ता होगी तो अस्पताल प्रशासन की तरफ से फार्मासिस्ट तैनात कर दिया जायेगा। मरीजों की संख्या को देखते हुए अभी नही लगता की यहां पर फार्मासिस्ट की जरूरत है।
चिकित्सा अधीक्षक-डा. ओंकार यादव

अब तक नहीं हटाये गये बोर्ड
आयुष विंग के निर्माण से पहले यहां के चिकित्सक अस्पताल के कमरा नम्बर 136 में बैठा करते थे। यहीं पर मरीजों का इलाज किया जाता था, जिसकी जानकारी के लिए पूरे परिसर में जगह -जगह बोर्ड लगे हुऐ थे। जिनको आज तक नहीं हटाया गया है। इसके चलते भी लोग भ्रमित होते हैं।

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