मरीजों के लिए नरक बना चरक अस्पताल

  • फर्जी जांच रिपोर्ट देकर लोगों से की जा रही मोटी कमाई
  • स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी सब कुछ जानकर बन रहे अंजान

 वीरेन्द्र पांडेय
captureलखनऊ। राजधानी में डेंगू के आतंक और बीमारी से होने वाली मौतों का सीधा-सीधा लाभ निजी अस्पताल व पैथालॉजी सेंटर उठा रहे हंै। ये संस्थान लोगों को गलत जांच रिपोर्ट देकर मोटी कमाई करने में जुटे हैं। लेकिन जिले का स्वास्थ्य महकमा सब कुछ जानकर भी अंजान बना हुआ है। स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी केवल छोटे अस्पतालों और संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। जिले में मरीजों को लूटने वाले नामचीन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने से बचते हैं। इन संस्थानों में गलत काम होने का सूचना मिलने पर भी कार्रवाई नहीं की जाती है।
दुबग्गा स्थित चरक अस्पताल भी डेंगू के मरीजों के खौफ का फायदा उठाने में नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सितम्बर माह में मुंशीपुलिया निवासी धर्मेन्द्र (24) को डेंगू होने पर परिजनों ने चरक अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां पर मौजूद चिकित्सक ने जांच के बाद बताया कि मरीज की प्लेटलेट्स तेजी से गिरती जा रही है। प्लेटलेट्स चढ़ाना पड़ेगा। इसके बाद परिजनों ने मिलकर चार यूनिट ब्लड दिया। उसके एक घंटे बाद वार्ड में मौजूद नर्स ने मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाना शुरू कर दिया। धमेन्द्र के दोस्त रिजवान खान का आरोप है कि प्लेटलेट्स चढ़ाने के बाद मरीज के ब्लड की जांच हुयी। लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं मिल सकी। इसके लिए भी कई बार अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों से शिकायत करनी पड़ी। तब जाकर मरीज की रिपोर्ट आयी, जिसमें प्लेटलेट्स 40 हजार दिखा रहा था। चिकित्सक ने भी कहा कि प्लेटलेट्स बढ़ रहा है। लेकिन उसी दिन रात में 12 बजे चिकित्सक ने मरीज की हालत बिगडऩे का हवाला देकर दोबारा चार यूनिट ब्लड की मांग कर डाली। रिजवान के मुताबिक रात में जो ब्लड रिपोर्ट डाक्टर ने दी, उसमे प्लेटलेट्स 14 हजार ही रह गयी थी। इसके बाद मरीज भी परेशान हो गया लेकिन उसकी हालत सामान्य लग रही थी। इसके बावजूद आनन-फानन में परिजनों ने कुछ लोगों को ब्लड देने के लिए बुलाया। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक बार-बार कह रहा था कि आप लोग चिन्ता न करें, केवल ब्लड का इंतजाम कर दीजिए। इसलिए परिजनों को शक हुआ और उन लोगों ने रात को दो बजे मरीज का ब्लड सैम्पल लिया और दूसरी पैथालॉजी में जांच करवाई। वहां से जो रिपोर्ट मिली, उसमें प्लेटलेट्स 50 हजार थी। तब धर्मेन्द्र के परिजनों ने उसको चरक अस्पताल से डिस्चार्ज करा लिया। रिजवान ने बताया कि तीन दिन भर्ती रहने का अस्पताल प्रशासन ने 30 हजार रूपये से अधिक का बिल बनाया ।

मझोले अस्पतालों पर कार्रवाई, बड़ों को छूट

राजधानी में डेंगू के मरीजों को मौत का खौफ दिखाकर निजी अस्पताल मोटी कमाई कर रहे हैं। इन निजी संस्थानों की कारस्तानी की जानकारी होने के बावजूद स्वास्थ्य महकमा कार्रवाई करने से लगातार बच रहा है। एक हप्ते पहले हाइकोर्ट की फटकार के बाद स्वास्थ्य विभाग कुछ समय के लिए जागा और कुछ छोटे अस्पतालों पर कागजी कार्रवाई की गई। लेकिन समय बीतने के बाद स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी फिर सो गये। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने रोजाना सैकड़ों डेंगू के मरीजों की जांच करने और उनको भर्ती करने के नाम पर करोड़ों रुपये महीने की कमाई करने वाले अस्पतालों में विजिट करने के बारे में सोचा भी नहीं। जबकि सूबे में डेंगू का खौफ दिखाकर सबसे अधिक प्राइवेट अस्पताल ही लोगों को लूट रहे हैं। जानकारों की माने तो पिछले सप्ताह स्वास्थ्य महकमे की कार्रवाई के जद में आये नर्सिंग होम तथा पैथालॉजी सेंटर आज भी धड़ल्ले से संचालित हो रहे हंै।

एक यूनिट प्लेटलेट्स की कीमत 700

धर्मेन्द्र के परिजनों का आरोप है कि चरक अस्पताल में प्लेटलेट्स का गोरखधंधा चल रहा है। उन्होंने बताया कि एक यूनिट प्लेटलेट्स 700 रूपये में दे रहे हैं। साथ ही 1000 से ऊपर की दवा जांच और चिकित्सक के विजिट के पैसे अलग से लगते हैं । उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर दिन भर में 7 से 8 हजार रुपये का बिल बना कर डेंगू के मरीजों को दिया जाता है। 300 वेड के अस्पताल में रात के समय केवल एक ही चिकित्सक सभी मरीजों को देखता है।

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