मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़

  • अधिकांश दुकानों पर नहीं है एयर कंडीशन की सुविधा
  • दवाओं के एक्सपायर होने का खतरा बढ़ा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। राजधानी में स्थित अधिकांश दवा की दुकानों में मानकों को धता बताकर दवाओं का रख-रखाव किया जा रहा है, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। राजधानी सहित पूरे उत्तर भारत में भयंकर गर्मी पड़ रही है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। अधिकांश दवा की दुकानों में कूलिंग की व्यवस्था नहीं है, जिससे दवाओं के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। दवा स्टोर इंचार्जों को मरीजों के स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें केवल अपनी कमाई से मतलब है। जिसके लिये वे दवाईयों के रखरखाव के मानक भी पूरे नहीं करते हैं।
हर दवाई पर दिया होता है स्टोरेज का मानक
मरीजोंं के लिए आने वाली लगभग सारी दवाइयों में स्टोरेज का मानक निर्धारित होता है। मैन्यूफैक्चरिंग व एक्सपाईरी तिथि के साथ स्टोरेज का मानक भी दवइयों में दिया रहता है। ज्यादातर दवाइयों में 25 डिग्री सेल्सियस के नीचे तापमान पर दवाओं को रखने का मानक निर्धारित किया जाता है। कुछ दवाइयों में 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने का मानक निर्धारित किया जाता है। वहीं वैक्सीन को 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे तापमान पर रखने का मानक निर्धारित है लेकिन ज्यादातर दवाइयों का मानक 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे होता है लेकिन राजधानी के अधिकांश मेडिकल स्टोर में दवायें सामान्य तापमान में रखी जा रही है। कूलिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। खुले में सामान्य तापमान में दवाओं को रखा जा रहा है जिससे दवाओं के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
बस कमाई का ध्यान है, मानकों से नहीं है मतलब
राजधानी में स्थित अधिकांश मेडिकल स्टोरों के मालिक दवा बेचकर रोजाना हजारों रूपये का मुनाफा कमा रहे हैं लेकिन इन दवा स्टोर इंचार्जों का मानकों से मतलब नहीं है। कूलिंग की व्यवस्था न होने से भयंकर गर्मी में दवाओं के खराब होने का खतरा है। कई दवा दुकानों में तो केवल पंखे से काम चलाया जा रहा। दवा विक्रेताओं को मरीजों के स्वास्थ्य की कोई चिंता नही है। दवाओं के रख-रखाव में लापरवाही से मरीजों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

आखिर दोषियों को क्यों बचा रहे हैं कप्तान

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
आगरा। एसएसपी साहब, आखिर इस खामोशी की वजह क्या है? आखिर दोषी सिपाहियों को अभयदान क्यों दिया जा रहा है। बेहतरीन अनुशासन वाले इस विभाग में जब सिपाही बीच चौराहे पर दारोगा से मारपीट करेंगे तो शहर की जनता में पुलिस के प्रति क्या मैसेज जायेगा? एसपी ट्रैफिक द्वारा भेजे गए पत्र के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
बता दें कि ट्रैफिक पुलिस के दो सिपाहियों ने नशे में कलक्ट्रेट चौराहे पर टीएसआई संतोष कुमार सिंह के हद दर्जेे की बदसलूकी की थी। उनके साथ मारपीट करने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकी तक दे डाली थी। यह मामला जब मीडिया की सुर्खियों में आया तो एसपी ट्रैफिक अभिषेक सिंह ने दोनों सिपाहियों पर कार्रवाई करते हुए एसएसपी को पत्र भेजा कि दोनों सिपाहियों को ट्रैफिक पुलिस से हटा दिया जाये लेकिन पत्र भेजे हुए 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं। अभी तक कोई भी एक्शन नहीं लिया। सिपाहियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई न हो पाने से उनके हौसले बुलंद हैं।

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