मरते हुये लोगों की नहीं है किसी को चिंता…

यह कितनी दु:ख भरी बात है कि इस देश में बीस फ़ीसदी लोग ऐसे हैं जिनके कुत्ते भी ए सी में सोते हैं। इन पर सर्दी और गर्मी का कोई असर नहीं होता। यह लोग सर्दी में हर समय गर्मी का अहसास कर सकते हैं और गर्मी में हर समय इनके पास ठंडी हवा के साधन होते हैं।

sanjay sharma editor5रोज दु:ख भरी खबर सामने आती है। रोज गर्मी से मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। हर साल ऐसा ही होता आ रहा है। जाड़ों में खबर आती है कि ठण्ड से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई। गर्मी के आंकड़े और भी ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। क्या आजादी के इतने सालों बाद भी इस देश के लोग इसी हालत में रहेंगे कि वो ठंड से या गर्मी से मरते रहें। आखिर तंत्र चलने वाले लोग यह क्यों नहीं सोचते कि इस देश में किसी की भी मौत मौसम के कारण न हो। मगर किसी को फुरसत नहीं है कि वो इन लोगों के बारे में सोचे क्योंकि मरने वाले अधिकांश गरीब हैं और गरीब किसी का वोट बैंक नहीं होते।यह कितनी दु:ख भरी बात है कि इस देश में बीस फीसदी लोग ऐसे हैं जिनके कुत्ते भी ए.सी. में सोते हैं। मगर इस देश के अस्सी प्रतिशत लोगों की जिंदगी नरक जैसी है। जब हाड़-मांस को कपकपाती ठंड आत्मा को भी हिला देती है उस समय सडक़ों पर लेटे हजारों लोग बस सुबह होने की दुआ करते रहते हैं कि किसी तरह उनको इस ठंड भरी रात से मुक्ति मिल जाये और सुबह की गर्मी उसको जिंदगी का एहसास करा सके। क्या यह शर्मनाक हालत नहीं है हम सबके लिए।

ऐसे ही हालात गर्मी के दिनों में भी देखने को मिल रहे हैं। लोग शुरुआती गर्मी के दिनों में भी बेहाल हैं। ऐसे में अगर लोग गर्मी के कारण मर जायें तो इससे बुरे हालात क्या हो सकते हैं? किसी को चिंता नहीं इन मरते लोगों की। क्या हम सब अभिशप्त हैं अपने लोगों की मौत के लिए। सिर्फ यह कह देना कि ‘उफ कितनी गर्मी है’ पर्याप्त है। क्या कोई रास्ता नहीं खोजा जा सकता।

सरकार फालतू चीजों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा देती है। कम से कम जिन राज्यों में लोग इस तरह गर्मी से मर रहे हैं वहां गर्मी से बचाव के कुछ इंतजाम तो कर सकती है। मगर यह तब हो सकता है जब हमारे राजनेता थोड़े संवेदनशील हों। उन्हें लगे कि आम आदमी का मरना उनकी सत्ता पर कलंक है। सरकार को चाहिए कि इस भीषण गर्मी में कुछ जगह टेंट आदि लगा कर लोगो को छाँव दिला सके। उनको ठंडा पानी और शिकंजी जैसी चीज मिल सके। अगर गर्मी में तड़प रहे लोगों को थोड़ी राहत सरकार दे दे तो शायद कुछ लोगों की जान बच सके। मगर सरकार को शायद इन सब बातों का ध्यान ही नहीं। अगर सरकार इन सब बातों को नहीं कर पाती तो आम आदमी को इसकी पहल करनी चाहिए। अपने अपने स्तर से जो राहत हो सके उसको दिलाने की पहल करनी चाहिए। कम से काम हमारा और आपका छोटा सा प्रयास किसी की जिंदगी बचा सकता है।-

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