मनरेगा में उत्तर प्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड

मनरेगा श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए आजीविका के संसाधनों में होगी वृद्धि
मनरेगा योजनान्तर्गत महिलाओं की सहभागिता पर विशेष बल: मुख्य सचिव
हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों को मनरेगा योजना में किया गया शामिल

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में मनरेगा योजनान्तर्गत श्रमिकों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने बताया कि प्रदेश के समस्त जनपदों की 59,164 ग्राम पंचायतों में मनरेगा श्रमिकों को उनकी मांग के आधार पर प्रदेश में विगत माहों में प्रति दिवस 10-15 लाख तक मानव दिवसों का सृजन किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में मनरेगा योजनान्तर्गत अब तक कुल रू. 3752.01 करोड़ धनराशि व्यय करते हुये 28 मार्च, 2016 तक 1620.22 लाख लक्ष्य के सापेक्ष 1656.04 लाख मानव दिवसों का सृजन किया गया है, जो 102 प्रतिशत है एवं राष्ट्रीय औसत 90 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि योजना के आरम्भ से अब तक प्रथम बार लक्ष्य की 100 प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मनरेगा योजनान्तर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति की सहभागिता 36 प्रतिशत है, जो कि विगत 05 वर्षों में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजनान्तर्गत महिलाओं की सहभागिता पर विशेष बल दिया गया है, जिसके परिणाम स्वरूप योजना के प्रारम्भ से अब तक महिलाओं की सर्वाधिक सहभागिता 30 प्रतिशत इस वित्तीय वर्ष में सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 50.95 लाख परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जो कि पिछले 04 वर्षों में सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 1.09 लाख के सापेक्ष इस वर्ष 1.53 लाख परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
श्री रंजन ने कहा कि प्रदेश के 50 सूखा प्रभावित जनपदों में विशेष रूप से कार्यवाही की जा रही है, जिसके अन्तर्गत मनरेगा योजनान्तर्गत प्रति परिवार मानव दिवसों की अनुमन्यता की अधिकतम सीमा 100 दिवस से बढ़ाकर 150 मानव दिवस कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड के जनपदों में लक्ष्य 159.59 लाख के सापेक्ष 184.23 लाख मानव दिवस सृजित किये गये हैं, जो कि लक्ष्य का 115 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जनपदों में मानव दिवस सृजन, महिला सहभागिता, अनुसूचित जाति/जनजाति की सहभागिता, कार्य पूर्णता, कृषि एवं उससे सम्बन्धित गतिविधियों पर व्यय का औसत राज्य औसत एवं राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजनान्तर्गत इस वर्ष मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के अन्तर्गत लगभग 34,242 तालाबों को जीणोद्धार हेतु चिन्हित किया गया जिसमें से 29,483 तालाबों पर कार्य पूर्ण एवं अन्य पर कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के अन्तर्गत बनाये गये तालाबों से न सिर्फ बड़ी संख्या में मानव दिवसों का सृजन किया जा रहा है अपितु जल संचयन को बढ़ावा मिलने से जल स्तर में भी सुधार होगा। उन्होंने बताया कि योजनान्तर्गत व्यक्गित लाभार्थीपरक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए एवं उनके अजीविका के संसाधनों में वृद्धि के लिए इस वर्ष विशेष रूप से प्रयास किये गये हैं, जिसके अन्तर्गत 3.5 लाख से अधिक इन्दिरा/लोहिया आवास के लाभार्थियों को मनरेगा योजनान्तर्गत आच्छादित करते हुये उनके आवास के निर्माण में रू. 14,490/- का अतिरिक्त सहयोग प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार अन्य लाभार्थीपरक कार्य यथा-भूमि विकास, पशुआश्रय, औद्योगीकरण, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण इत्यादि से सम्बन्धित कार्य बड़ी संख्या में कराये गये हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मनरेगा योजनान्तर्गत प्रदेश में 1.01 करोड़ पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने कहा कि योजनान्तर्गत ऐसे श्रमिक जिनके द्वारा 50 दिन का रोजगार किया गया है उन्हें श्रम विभाग द्वारा संचालित येाजना का लाभ दिया गया है, इसके अतिरिक्त हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों को मनरेगा योजना से आच्छादित किया गया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न स्तरों के प्रयास से प्रति दिवस मानव दिवस सृजन के लक्ष्य प्राप्ति हेतु सुनियोजित रणनीति बनाकर, निरन्तर अनुश्रवण के फ लस्वरूप वित्तीय वर्ष समाप्ति से पूर्व ही प्रदेश 102 प्रतिशत दिवस सृजन करने में सफ ल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव, पुनर्गठित नवसृजित ग्राम पंचायतों से उत्पन्न तकनीकी व्यवधान, के साथ-साथ सर्वें एवं एम.आई.एस. फ ीडिंग, एक से अधिक बार मनरेगा कार्मिंकों की हड़ताल एवं भारत सरकार से धनराशि की ससमय अनुपलब्धता के कारण योजना की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, परन्तु लक्ष्य की पूर्ति की रणनीति पर कायम रहते हुए एवं राज्य सरकार द्वारा 02 बार में कुल 600.00 करोड़ रूपये की धनराशि मनरेगा श्रमिकों को समय से उपलब्ध करायी गई जिससे विलम्बित भुगतान की स्थिति में सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि अधिकांशत: जनपदों ने जैसे, फि रोजाबाद, मऊ, आगरा, ललितपुर, बलिया, जौनपुर, बाराबंकी, खीरी, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बहराइच, सीतापुर एवं बुन्देलखण्ड के समस्त जनपदों ने टीम वर्क का बेहतरीन परिचय देते हुए समस्त बाधाओं को नजरअंदाज करते हुए न केवल लक्ष्यों की पूर्ति की बल्कि एक दिन में रिकार्ड 50-60 हजार मानव दिवस भी सृजित किये। उन्होंने कहा कि ग्राम्य विकास विभाग द्वारा मनरेगा योजनान्तर्गत मानव दिवस सृजन में विशेषकर 50 सूखाग्रस्त जनपद एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जनपदों द्वारा शत-प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करने के कारण उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्यों में सम्मिलित हो गया है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के समक्ष 1717.52 लाख मानव दिवस सृजित करने का श्रम बजट प्रस्तुत किया गया है।

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