मनमाने तरीके से पद पर बैठाया गया सीएमएस को

केजीएमयू के सीएमएस की नियुक्ति का मामला गर्माया

केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एससी तिवारी की नियुक्ति का मामला पहुंचा राजभवन
केजीएमयू कार्यपरिषद के सदस्यों ने राज्यपाल से की शिकायत

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। देश के प्रतिष्ठिïत चिकित्सा संस्थानों में शुमार किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में चिकित्सा विवि के सीएमएस की नियुक्ति को लेकर बवाल मचा हुआ है। केजीएमयू के कार्य परिषद के सदस्यों का कहना है कि सीएमएस की नियुक्ति मनमाने तरीके से की गई है। इस मामले को लेकर कार्य परिषद के सदस्यों की ओर से कई बार केजीएमयू के वीसी रविकांत को भी शिकायती पत्र दिया जा चुका है लेकिन वीसी के ओर से किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद कार्य परिषद के सदस्यों ने राजभवन का दरवाजा खटखटाया है। कार्य परिषद के सदस्यों की ओर से इस मसले को लेकर राज्यपाल से शिकायत की गई है।
बताते चलें कि 22 अप्रैल 2014 को केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एससी तिवारी की नियुक्ति कुलपति रविकांत की ओर से केजीएमयू अधिनियम की धारा 7 (2) के अंतर्गत हुई थी, जबकि अधिनियम की धारा 7 का शीर्षक है कि कुलपति और कर्मचारी वर्ग की प्रथम नियुक्तियां जिससे स्पष्ट है कि इस धारा 7 के सभी खंड उस समय के लिए तय थे जिस समय चिकित्सा विश्वविद्यालय अधिनियम 6 सितंबर 2002 को लागू किया गया था। अब जब चिकित्सा विश्वविद्यालय की प्रथम परिनियमावली 2011 राज्य सरकार की ओर से जारी की जा चुकी है तो धारा 7 के अनुसार भर्ती का कोई औचित्य ही नहीं रहता । वहीं केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत का कहना है कि सीएमएस एससी तिवारी की नियुक्ति धारा 7 के अंतर्गत हुई है।
मनमाने तरीके से की गई नियुक्ति
नाम न छापने के शर्त पर केजीएमयू के कार्य परिषद के एक सदस्य ने बताया कि जब सरकार की ओर से नियुक्ति की नई परिनियमावली 2011 में जारी कर दी गई तो अब धारा 7 के द्वारा नियुक्ति करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। केजीएमयू के वीसी रविकांत की ओर से मनमाने तरीके से अपने चहेते को सीएमएस का पद दे दिया गया, जबकि नई परिनियमावली के अनुसार वीसी को ये अधिकार ही नही है कि वह सीएमएस की नियुक्ति कर सके। सीएमएस की नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार को है। इसके बावजूद केजीएमयू के वीसी की ओर से मनमाने तरीके से डॉ. एससी तिवारी को केजीएमयू का वीसी बना दिया गया।
कार्य परिषद के सदस्यों का कहना है कि केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत धारा 7 के द्वारा सीएमएस की नियुक्ति को बता रहे हैैं लेकिन इस धारा में भी वीसी को केवल एक बार ही सीएमएस की नियुक्ति का अधिकार है। जब केजीएमयू चिकित्सा अधिनियम 6 सितंबर 2002 को लागू हुआ था तब इसके अंतर्गत प्रधानाचार्य केएम सिंह को केजीएमयू का कुलपति एवं वीसी की ओर से डॉ. रमाकांत को केजीएमयू का सीएमएस बनाया जा चुका था । ऐसे में धारा 7 में वीसी को एक बार सीएमएस की नियुक्ति का अधिकार था जो डॉ. रमाकांत को सीएमएस बनाने के बाद पूरा हो गया था।

Pin It