मणिपुर में उग्रवाद और सरकार

सवाल यह है कि यहां उग्रवादियों के हमले कम होने का नाम क्यों नहीं ले रहे हैं? तमाम कवायदों के बावजूद सरकार उग्रवादियों पर शिकंजा कसने में असफल क्यों हो रही है? आखिर उग्रवादियों के साथ वार्ता का रास्ता अपनाकर सरकार इसके समाधान पर विचार क्यों नहीं कर रही है? पूर्वोत्तर के राज्यों में सबसे ज्यादा उग्रवादी गिरोह मणिपुर में हैं। उग्रवादियों पर नियंत्रण करने के लिए केंद्र ने यहां सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम लागू कर रखा है।

sajnaysharmaमणिपुर में एक बार फिर उग्रवादियों ने घात लगाकर पुलिस जवानों पर हमला किया। इस हमले में दो जवान शहीद हो गए जबकि चार अन्य घायल हो गए हैं। उग्रवादियों ने यह हमला उस समय किया जब पुलिस टीम नवगठित जिले तेंगनोउपाल की ओर जा रही थी। यह जिला चंदेल के नगा-बाहुल्य जिले से अलग करके बनाया गया है। अहम सवाल यह है कि यहां उग्रवादियों के हमले कम होने का नाम क्यों नहीं ले रहे हैं? तमाम कवायदों के बावजूद सरकार उग्रवादियों पर शिकंजा कसने में असफल क्यों हो रही है? आखिर उग्रवादियों के साथ वार्ता का रास्ता अपनाकर सरकार इसके समाधान पर विचार क्यों नहीं कर रही है? पूर्वोत्तर के राज्यों में सबसे ज्यादा उग्रवादी गिरोह मणिपुर में हैं। उग्रवादियों पर नियंत्रण करने के लिए केंद्र ने यहां सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम लागू कर रखा है। इसके विरोध में यहां प्रदर्शन हुए हैं और हो रहे हैं। दरअसल, राज्य का एक तबका चाहता है कि यह अधिनियम समाप्त किया जाए। यह मानवाधिकार का उल्लंघन है। लेकिन सरकार ने इसको स्वीकार नहीं किया। यहां नगालैंड की तरह कोई शांति प्रक्रिया भी नहीं अपनाई जा रही है। सरकार की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह किसके साथ वार्ता शुरू करे। यहां कम से कम तीन दर्जन से अधिक उग्रवादी गुट सक्रिय हैं। लिहाजा वार्ता की गुंजाइश बनती दिख नहीं रही है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक दस हजार से अधिक लोग यहां उग्रवाद की भेंट चढ़ चुके हैं। सवाल है कि क्या इसका कोई समाधान नहीं है? हकीकत यह है कि यहां विकास कार्य और रोजगार के साधन तेजी से विकसित नहीं किए गए हैं। इसके कारण युवक इन उग्रवादी संगठनों में तेजी से शामिल हो रहे हैं। उग्रवाद इस इलाके में आजीविका का साधन बन गया है। वहीं सरकार विकास नहीं होने का ठीकरा उग्रवादियों पर फोड़ रही है। उग्रवादी संगठन इसका फायदा उठा रहे हैं। इसके अलावा मणिपुर में उग्रवाद के पनपने का सबसे मुख्य कारण इसका म्यामांर की सीमा से सटा होना है। उग्रवादी यहां वारदातों को अंजाम देकर सीमा पार कर फरार हो जाते हैं और फिर मौका देखकर हमला करते हैं। सरकार को चाहिए कि यहां विकास कार्यों को तेज करे और रोजगार के साधन विकसित करे। इससे उग्रवादी संगठनों से जुड़ रहे युवकों को दूर किया जा सकेगा। मणिपुर प्राकृतिक रूप से संपन्न राज्य है। यहां सरकार पर्यटन का विकास कर काफी संख्या में युवकों को रोजगार मुहैया करा सकती है। इसके अलावा सरकार को उग्रवादियों से वार्ता की पहल भी करनी चाहिए क्योंकि हिंसा किसी राज्य के विकास रोकती है।

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