मडिय़ांव में ग्रामीण बदमाशों से लेते रहे मोर्चा और सोती रही राजधानी पुलिस

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  • 4पीएम ने पहले ही खबर प्रकाशित कर पुलिस की हकीकत को किया था उजागर
  • 100 नंबर पर सूचना के डेढ़ घंटे बाद पहुंची पुलिस
  • एसपी ट्रांसगोमती समेत कई थानों की फोर्स देर से पहुंची
  • पुलिस के रवैये से ग्रामीणों में रोष

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जानकीपुरम इलाके के मडिय़ांव गांव में कल देर रात फिर डकैत पहुंचे लेकिन गांववालों की सजगता से बड़ी घटना टल गई। ग्रामीणों ने डकैतों से मोर्चा लिया और करीब एक घंटे तक दोनों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। इस दौरान डकैतों व ग्रामीणों के बीच कई राउंड हवाई फायर भी हुआ। आखिरकार एक घंटे के संघर्ष के बाद हथियार बंद लगभग एक दर्जन बदमाश वहां से भाग निकले। लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि सूचना के डेढ़ घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। घटना स्थल पहुंचे एसपी ट्रांसगोमती समेत कई अधिकारियों ने लगभग दो घंटे आस-पास के इलाके में सर्च आपरेशन चलाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। वहीं, ग्रामीणों में पुलिस के रवैये को लेकर काफी रोष है।
मडिय़ांव गांव के कुमर गढ़ा मोहल्ला निवासी दर्जी कारीगर संदीप लोधी ने बताया कि रात करीब 12:30 बजे संकट मोचन मंदिर के पास वह बैठे थे। इस दौरान लाल रंग की बॉक्सर मोटरसाइकिल से दो लोग गली में निकले।

आईजी, एसएसपी व एसओ चल रहे हैं छुट्टी पर
एसएसपी लेडी सिंघम मंजिल सैनी ने 18 मई को राजधानी में चार्ज लिया था। चार्ज लेते ही उन्होंने राजधानी को अपराध मुक्त करने का वादा किया था, लेकिन वह चार्ज के महज पांच दिन बाद ही 23 मई से छुट्टी पर हैं। जानकारों की मानें तो अभी तक उन्होंने शहर के कई अहम घटनाओं को रीड भी नहीं किया है। ऐसे में उनकी सक्रियता पर भी सवाल उठना लाजिमी है। एसएसपी के पीआरओ आलोक पाठक ने बताया कि कप्तान संभवत: 28 मई शनिवार तक छूट्टी पर हैं। उधर, आईजी लखनऊ ए सतीश गणेश भी सोमवार से 10 दिन की छुट्टी पर हैं। तो वहीं एसओ जानकीपुरम गोपाल सिंह यादव भी छुट्टी पर चल रहे हैं।

….वह थोड़ी दूर आगे जाकर दोबारा लौटकर वहां से गुजरे। इस पर उन्हें मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति पर कुछ संदेह हुआ, तो वह उसके पीछे लग गए। थोड़ी दूर पहुंचे ही थे कि उन्हें यादव टोला की ओर से फायङ्क्षरग और चिल्लाहट की आवाज सुनायी दी। इस पर उन्होंने मोहल्ले के अन्य लोगों को जगाया और यादव टोला की ओर बढ़े। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे ही वह लोग दबे पांव आगे बढ़ रहे थे देखा लोग छतों से ईटे-गुमे चला रहे थे। इस बीच उस सवार के पीछे एक और व्यक्ति स्पलेण्डर गाड़ी से तेजी से जा रहा था। इस पर ग्रामीणों ने डकैत-डकैत पकड़ो-पकड़ो की आवाज लगायी। दोनों बाइक सवार गांव से भागने का रास्ता ढूंढ रहे थे। जब ग्रामीणों ने उनका पीछा किया तो बदमाशों ने उन पर फायर झोंका। फायर होने की वजह से ग्रामीण सहम गए लेकिन इस बीच एक ग्रामीण अपनी बंदूक लेकर उनके पीछे दौड़ा। उसने भी बदमाशों पर फायर झोंक दिया। इस दौरान छत पर मौजूद लोगों ने मोहल्ले की गलियों में बाइक से दौड़ लगा रहे बदमाशों पर ईटे-गुमे चला दिए, जिसके बाद बदमाश गांव से बाहर खेत की तरफ भागे। ग्रामीणों को अपने पीछे देख वह लोग खेतों के रास्ते होते हुए गांव को आने वाली सड़क पर पहुंचे। उन्होंने वहां पर पहुंचते ही पहले से खड़ी चार पहिया में मौजूद कुछ लोगों को भागने को कहा। ग्रामीणों के सामने ही कार व बाइक सवार हथियार बंद लगभग एक दर्जन बदमाश भाग निकले। गांव के बल्लू ने बताया कि बदमाशों ने भागते समय दो बार ग्रामीणों को खदेडऩे के लिए हथगोले भी उन पर दागे।

सीतापुर के नंबर की थीं गाडिय़ां
मडिय़ांव गांव के यादव टोला निवासी बब्लू ने बताया कि बॉक्सर सवार दो बदमाशों में गाड़ी चला रहे बदमाश ने शर्ट व पैंट पहन रखी थी। जबकि पीछे बैठे बदमाश ने नीले रंग की टी-शर्ट। बाइक सीतापुर के नम्बर की थी। मोटरसाइकिल की नंबर प्लेट पर केवल यूपी-34 ही लिखा दिखाई दे रहा था बाकि के नंबर गायब थे।
सूचना के डेढ़ घंटे बाद आयी पुलिस
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बदमाश गांव में लगभग बारह बजे से 12:15 के बीच आए थे। बदमाशों की गतिविधियों पर अनहोनी की आशंका के मद्ïदेनजर 12:30 बजे 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी गई। बदमाशों से संघर्ष के दौरान लोगों ने पुलिस को सूचना दी लेकिन पुलिस को पहुंचने की फुर्सत नहीं मिली। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस मौके पर तत्काल पहुंचने की बजाय पता पूछती रही। घटना के डेढ़ घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची, जबकि थाने से गांव की दूरी चंद कदम पर है।

दस सितंबर 2015 को पड़ी थी डकैती
मडिय़ांव गांव से चंद कदम की दूरी पर योगीपुरम कालोनी है। यहां पर पिछले वर्ष 10 सितंबर को लगभग एक दर्जन हथियार बंद कच्छा-बनियान गिरोह के सदस्यों ने पांच घरों पर घावा बोला था। उन्होंने डकैती के दौरान कई लोगों को लोहे के राड व असलहे की बट से पीट-पीटकर लहूलुहान कर दिया था। बदमाशों ने लूटपाट का विरोध करने पर एक युवक की हत्या भी कर दी थी। इसके बाद मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे आलाधिकारियों ने यहां पर चौकी बनाने के साथ पीडि़तों को पिस्टल का लाइसेंस देने को कहा था। घटना के लगभग एक साल बाद भी न तो यहां पर चौकी बनी और न ही पीडि़तों को पिस्टल का लाइसेंस मुहैया कराया गया। जो पुलिस की संवेदनशीलता को जग जाहिर करता है।
4पीएम ने पुलिस की लापरवाही पर पहले ही उठाए थे सवाल
4 पीएम ने 16 मई के अंक में खबर छापी थी और पुलिस की हकीकत को उजागर करने की कोशिश की थी। इसके साथ ही राजधानी में हाइटेक पुलसिंग सिर्फ कागजों में नजर आ रही हैै। हकीकत में पुलिस की गश्त शहरी क्षेत्रों में भले ही हो रही हो लेकिन देहात से सटे इलाकों में बिल्कुल नहीं होती। इसी वजह से राजधानी के लोग अपनी जान की सुरक्षा को लेकर खुद ही सजग होने लगे हैं। इसी वजह से बीती रात सतर्क ग्रामीणों ने बदमाशों से मोर्चा लिया और बड़ी वारदात को अंजाम देने आए बदमाशों को खदेड़ दिया।

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