मजबूर नहीं, आजाद हैं हम

सीएम अखिलेश यादव ने कहा योग करने के लिए

जो लोग आज योग कर रहे हैं उन्होंने इससे पहले योग नहीं किया

X1 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। योग पर सियासत गरमा गयी है। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें और यूपी के अधिकारियों को श्री श्री रवि शंकर जी ने खूब योग कराया है। यह अलग बात है कि हमने इस बात का प्रचार प्रसार नहीं किया। आज जो लोग योग कर रहे हैं उन्होंने इससे पूर्व में योग नहीं किया होगा तभी तो उन्हें आज योग करने की जरूरत पड़ गयी। अगर यह लोग पहले से योगा करते रहते तो स्वस्थ रहते । योग पार्को में हो रहा है। लोग घरों में योग कर रहे हैं। आप आजाद देश में रहते है, जिसको योग करना है वह करे, जिसको नहीं करना है वह न करे। अखिलेश ने आडवानी के इमरजेंसी वाले बयान पर कहा कि यदि ऐसा होता है तो पत्रकार भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। पत्रकारों पर भी लाठी पड़ी थी, आप तैयार रहो। अखिलेश यादव ने यह बाते यूपी 360 न्यूज पोर्टल के लांचिग अवसर पर कही।
मुख्यमंत्री ने कहा अब सरकारी योजनाओं को बारे में जानकारी लेने के लिए आप को भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी न्यूज360डॉट इन नाम से एक वेबपोर्टल का शुभारम्भ किया। सीएम अखिलेश यादव ने धमार्थ कल्याण विभाग की वेबसाइट समाजवादी श्रवण यात्रा का भी उदघाटन किया। यही नहीं अखिलेश यादव ने सोशलिस्ट मैगजीन का विमोचन भी किया। इस मौके पर कैबिनेट मिनिस्टर राजेन्द्र चैधरी, धमार्थ कल्याण मंत्री विजय मिश्रा और सूचना विभाग के मुखिया नवनीत सहगल मौजूद रहे।
पोर्टल का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि यह पोर्टल सिर्फ खबरें ही नहीं बल्कि लोगों को अधिकार भी देता है। इस पोर्टल पर जितनी भी सरकारी योजनाएं है, उनका पूर्ण विवरण मौजूद है। कोई भी व्यक्ति जो सरकारी योजना का लाभ उठाना चाहता है, इस पोर्टल की मदद ले सकता है। गौरतलब है यूपीन्यूज360डॉटइन पोर्टल यूपी का पहला ऐसा पोर्टल होगा जिसे जिला सूचना अधिकारी अपने-अपने जिलों की खबरों से इसे अपडेट करेंगे।
सीएम अखिलेश यादव ने समाजवादी श्रवण यात्रा की वेबसाइट का भी उद्घाटन किया। इस वेबसाइट की खासियत यह है कि इसमें पूरी हो चुकी यात्राओं के साथ आने वाली यात्राओं की पूरी जानकारी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस वेबसाइट के जरिये कोई भी नागरिक जो श्रवण यात्रा का लाभ उठना चाहता है वह इस वेबसाइट के जरिये अपना आवेदन कर सकता है। सीएम ने खुद को ब्रांडिग के मामले पर पिछडऩे की बात कही। उन्होंने मंच साझा कर रहे दुग्ध मंत्री राम मूर्ति वर्मा और विजय मिश्रा से कहा कि अपने-अपने नाम के आगे कोई सर नेम लगा दो। उन्होंने कहा कि हमारे पास दो-दो राममूर्ति है, दो-दो विजय मिश्रा है। सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि आज टेक्नोलॉजी का जमाना है। ऐसे में यह वेब पोर्टल आने वाले समय में लोगों को प्रसाद के साथ दूसरी सारी चीजें मुहैया कराता हुआ दिखायी देगा।

राहत कोष में दिये चेक

जिलाधिकारी सीतापुर लाल बिहारी पाण्डेय और एसपी राजेश कृष्ण ने सीतापुर के सरकारी कर्मचारियों के एक दिन का वेतन लगभग एक करोड़ तीस लाख का चेक भूकम्प पीडि़तों के लिए दिया। डीएम फरूर्खाबाद ने एक दिन के वेतन के रूप मे ंएक करोड़ 11 लाख का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने के लिए दिया। डीएम अम्बेडकर नगर 51 हजार का चेक मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिये दिए। राज्य पिछड़ा वर्ग के आयोग के अध्यक्ष राम आसरे विश्वकर्मा ने चार लाख 11 हजार रूपए का चेक प्रदान किया।

सावधान यूपी: लौटी महामारी, स्वास्थ्य विभाग के दावे फेल

पल्स पोलियो के 200 सैंम्पल पाए गये पॉजिटिव

असंवेदनशील स्वास्थ्य विभाग की कारस्तानियों के चलते एक बार फिर पोलियो के मुहाने पर उत्तर प्रदेश

लखनऊ। यूपी को पोलिया मुक्त होने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के लिए यह बुरी खबर है। यह बुरी खबर पूरे उत्तर प्रदेशवासियों के लिए है। यूपी में पोलियो रूपी शैतान ने एक बार फिर सिर उठाया है। बरेली में 200 ऐसे केसेज सामने आये हैं जिनमें पोलियो जैसे लक्षण मिले हैं।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि स्वास्थ विभाग के उस दावे का क्या होगा जिसमें कहा गया था कि यूपी अब पोलियो मुक्त है। स्वास्थ मंत्री अहमद हसन ने बड़े जोर शोर से इस मुददे को सरकार की उपलब्धि बताया था कि समाजवादी सरकार की कोशिशों के बाद ही यूपी को पोलियो मुक्त किया जा सका है। ऐसे दावों के बीच बरेली में हजारों बच्चों के सैम्पल में पोलियो जैसे लक्षण मिलना सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं और पूरे सिस्टम पर सवालियां निशान लगा रहे हैं कि आखिर ऐसे असंवेदनशील बयान क्यों दिये जाते हैं।
2010 में यूपी में मिला था पोलियो का आखिरी केस
यूपी में पोलियो का आखिरी केस फिरोजाबाद जिले में साल 2010 में मिला था और बरेली में पोलियो का आखिरी केस वर्ष 2009 में भामुरा गांव में पाया गया था। डब्ल्यूएचओ के नियमों के मुताबिक तीन साल तक पोलियो के जीरो रिकॉर्डेड केस की स्थिति में ही किसी देश / प्रदेश को पोलियो मुक्त स्टेटस दिया जा सकता है। सालों तक पोलियो कैंपेन चलाने के बाद जब यूपी में तीन वर्षों तक कोई पोलियो केस नहीं मिला तो यूपी को भी पोलियो मुक्त प्रदेश का दर्जा मिला। एक भव्य कार्यक्रम में डब्लयूएचओ और स्वास्थ विभाग ने अपनी पीठ पर गुड़ मला और एक दूसरे को बधाई देकर सम्मानित किया। ऐसे में दोबारा से पोलियो जैसे केसे मिलना किसकी जिम्मेदारी है? क्योंकि पूरे मिशन पर करोड़ों अरबों ंरूपये खर्च किये गये थे। हजारों लोग इस कार्यक्रम से जुड़े थे।

क्या है मामला
बरेली के बहेरी, मीरगंज, फरीदपुर, नवाबगंज सहित अन्य तहसीलों से लोग अपने बच्चों को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंचे। कई बच्चों को लकवा लगने की शिकायत थी। उनके पैर का कडक़पन खत्म हो गया था। इससे सतर्क हुए स्वास्थ्य विभाग ने डब्ल्यूएचओ को जानकारी दी। इसके बाद बरेली ब्रांच की टीम डॉ. नम्रता, डॉ. स्मृति और डॉ. एस कौशिक ने बारी-बारी से बच्चों की जांच की। उसके बाद स्टूल टेस्ट के लिए नमूने लिए गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी अलग से नमूने लेकर जांच के लिए भेजा है। 1000 सैंपलों में एक निकलता है पॉजिटिव पोलियो के संदिग्ध एक हजार नमूनों में सिर्फ एक के पॉजिटिव निकलने की आशंका रहती है, लेकिन बरेली के स्वास्थ्य विभाग और डब्ल्यूएचओ में इन 200 नए मामलों को लेकर सर्तकता है। प्रभावित बच्चों की प्रारंभिक जांच जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ डब्ल्यूएचओ टीम ने भी की है और रिपोर्ट का इंतजार है। बरेली के (सीएमओ) मनोज शुक्ला इस प्रकरण को बहुत गंभीर नहीं मानते, उनका कहना है कि नमूनों को जांच के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला में भेजा दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।

पल्स पोलियो के 200 सैंम्पल…
बरेली में ही पोलियो के केसेज मिलना इस ओर इशारा कर रहे हैं कि बरेलीवासियों ने इस मुहिम को गंभीरता से नहीं लिया। वहां बच्चों को दवाई नहीं पिलाई गयी। क्योंकि पोलियो कार्यक्रम के दौरान इस तरह की भी अफावाहे उड़ रही थी कि एक वर्ग विषेश के लोग अपने बच्चों को पोलियो की खुराक नहीं पिलायें। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस करने का यह मतलब नहीं है कि बच्चा पोलियो से ग्रस्त है। जब तक कि स्टूल (मल) टेस्ट की रिपोर्ट से इस बात कि पुष्टि नहीं हो जाती कि बच्चे के शरीर में पोलियो के वायरस पाए गए हैं, तब तक इसे पोलियो केस नहीं माना जा सकता है।

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