भ्रष्टï यादव सिंह को क्लीन चिट देने वाले विवादित डीजीपी ने जाते-जाते करा दी सरकार की फजीहत

डीजीपी के इशारे पर कार्यकाल बढ़ाने को की गई थी जनहित याचिका
यादव सिंह को क्लीन चिट देने में करोड़ों की डील का लगा है आरोप
अपने कारनामों से खासे विवादित रहे हैं
जगमोहन यादव अपने कारनामों से खासे विवादित रहे हैं जगमोहन यादव
अपराधियों को संरक्षण देने, जमीन पर कब्जा करने और अवैध संपत्ति जुटाने की शिकायत

बरेली में जमीन पर कब्जा कराने में दिखाई थी खासी रुचिबरेली में जमीन पर

R1संजय शर्मा
लखनऊ। सरकार ने सोचा नहीं था कि अपने रिटायरमेंट से ठीक पहले डीजीपी जगमोहन यादव ऐसा गुल खिला सकते हैं। बीती शाम केपी निगम ने सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह की याचिका का हवाला देकर मांग की कि डीजीपी का कार्यकाल बढ़ाया जाए। रात में ही हाईकोर्ट के जज ऋ तुराज अवस्थी के घर पर दो सदस्यीय बेंच ने सुनवाई की और 21 जनवरी की तारीख लगा दी, मगर इस कारनामे ने पूरे देश में सरकार की फजीहत करा दी। देश भर के नौकरशाहों में चर्चा हो गई कि आखिर सरकार ने जगमोहन यादव जैसे शख्स को बनाया ही क्यों? जगमोहन यादव ने अपने कार्यकाल में वैसे भी पुलिस की फजीहत कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
जगमोहन जब लॉ एंड आर्डर थे तभी उनके कारनामे सरकार को परेशानी में डालते रहते थे। वह मौजूदा डीजीपी के खिलाफ लगातार लॉबिंग करते रहते थे। उन्हें गुमान था कि वह यादव परिवार के बेहद करीबी हैं लिहाजा पुलिस महकमे में सिर्फ उनकी ही सुनवाई होनी चाहिए। उनके इन कारनामों ने डीजीपी कार्यालय में खेमेबंदी कर दी थी। जब पानी सिर से ऊपर हो गया तब सीएम अखिलेश यादव ने कड़ा फैसला लेते हुए उन्हें हटा दिया।
जगमोहन यादव ने नोएडा के विवादित इंजीनियर यादव सिंह को भी उस समय क्लीन चिट दे दी। जब वह सीबीसीआईडी के डीजी थे और यादव सिंह के कारनामों की जांच सीबीसीआईडी कर रही थी। सूत्रों का कहना है कि इस क्लीन चिट के बदले दस करोड़ रुपए की डील हुई थी। हालांकि इसकी पुष्टिï नहीं हुई।
एक दो बार नहीं कई बार ऐसा हुआ जब जगमोहन यादव ने अपने बड़बोलेपन के कारण पूरी सरकार की फजीहत कराई। जब अखिलेश सरकार पर बढ़ते हुए अपराधों को लेकर विपक्ष लगातार हमला कर रहा था तब डीजीपी जगमोहन यादव ने कह डाला कि रामराज्य में भी बलात्कार होते थे। यही नहीं कुछ दिन पहले उन्होंने भरी प्रेस कांफ्रेंस में एक पत्रकार से यह तक कह दिया कि अकेले में चलो तब बताते हैं कि कैसे होता है रेप। डीजीपी का यह बयान सोशल मीडिया में बेहद चर्चा का विषय बना रहा। सरकार को लगातार शिकायत मिलती रही कि डीजीपी जगमोहन यादव कुछ विवादित लोगों को आगे बढ़ाकर जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं और बेशुमार दौलत इक_ïी कर रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी अवैध संपत्ति और उनके कारनामों को लेकर एक जनहित याचिका दायर हुई जो अभी भी पेंडिंग है।
मगर इन सब बातों से जगमोहन यादव को कोई फर्क नहीं पड़ा। बरेली में एक बेशकीमती जमीन पर कब्जे को लेकर उन्होंने बरेली के एसएसपी के खिलाफ सीधा मोर्चा ही खोल दिया। कुछ दिन पहले ही माडर्न कंट्रोल के कार्यक्रम में जब सीएम बोल रहे थे मंच पर ही डीजीपी सो रहे थे, मगर अब अपना कार्यकाल बढ़वाने या किसी आयोग में अपनी तैनाती कराने को जगमोहन यादव बेचैन हैं।

हिस्ट्रीशीटर के घर दावत खाने पहुंचे थे डीजीपी

अपने पूर्ववर्ती डीजीपी एके जैन के नक्शे कदम पर चलते हुए डीजीपी जगमोहन यादव ने भी अपराधियों पर खासी मेहरबानी दिखाई। जहां श्री जैन ने एक हत्यारोपी अपराधी को गिरफ्तार न करने और न ही छापा मारने के संबंध में इलाहाबाद के एसएसपी को खत लिख दिया था वहीं डीजीपी जगमोहन यादव उनसे भी आगे निकल गए। वह डीजीपी बनने के बाद हिस्ट्रीशीटर अफसर अली के घर पर ईद की दावत खाने पहुंच गए। अफसर अली के खिलाफ लखनऊ के कई थानों में गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं, जो पुलिस अफसर अली के कारनामों पर निगाह रखती थी, वही पुलिस डीजीपी के इस हिस्ट्रीशीटर के घर जाने के कारण उसके घर के बाहर ड्यूटी दे रही थी। यह वह कदम था जिसने यूपी पुलिस की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

सीएम नहीं चाहते थे जगमोहन को डीजीपी बनाना
सीएम अखिलेश यादव किसी भी कीमत पर जगमोहन यादव को डीजीपी नहीं बनाना चाहते थे। उनका कहना था कि जो आदमी एडीजी कानून व्यवस्था का पद भी संभाल नहीं सका वह डीजीपी बनकर क्या गुल खिलायेगा यह सहज ही समझा जा सकता है, मगर परिवार के कुछ वरिष्ठï लोगों ने जगमोहन यादव को लेकर ही दबाव बनाया और फिर मजबूरी में जगमोहन यादव को ही डीजीपी बनाना पड़ा।

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