भ्रष्टïाचार के दलदल में फंस गया है एकेटीयू

मंत्री से लेकर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव तक से छात्र लगा चुके हैं गुहार
छात्रों का आरोप, जानबूझकर फंसाया जा रहा है हम लोगों को
विश्वविद्यालय के कुलपति और पीआरओ नहीं देते कोई जवाब

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनीवर्सिटी कैरीओवर परीक्षा में फेल स्टूडेंट्स की सुनवाई नहीं कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की समस्या से कोई सरोकार नहीं है। यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्रों के साथ की गई लापरवाही को छिपाने के लिये छात्रों के साथ सिर्फ दादागिरी करने पर आमादा है। स्टूडेंट्स पिछले कई दिनों से अपने हक के लिए विश्वविद्यालय कैंपस से लेकर प्राविधिक शिक्षा मंत्री के आवास तक पर भटक रहे हैं लेकिन कहीं से उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। अपनी फरियाद लेकर छात्र सपा कार्यालय भी गए थे लेकिन वहां से भी कोई खास आश्वासन नहीं मिला। छात्रों की मानें तो एकेटीयू प्रशासन ने तो ठान लिया है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करना है। विवि प्रशासन छात्रों को डराने-धमकाने से लेकर उनका भविष्य बिगाडऩे तक की धमकी दे रहा है। एकेटीयू के वीसी का रवैया भी ठीक नहीं है। उन्हें छात्रों की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। वह सिर्फ लीपापोती कर गैरजिम्मेदार लोगों को बचाने का काम कर रहे हैं।
एकेटीयू से संबद्ध कई इंजीनियङ्क्षरग कालेजों के करीब 86 स्टूडेंट कैरीओवर परीक्षा में फेल कर दिए गए हैं। इन छात्रों का आरोप है कि उनकी परीक्षा कापियों का मूल्यांकन ठीक से नहीं किया गया। इस वजह से इन छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। छात्र कई दिनों से अपनी कापियों के मूल्यांकन को लेकर यूनिवर्सिटी का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन 19 नवंबर को यह मामला ज्यादा गंभीर हो गया था। यूनिवर्सिटी में छात्रों को उनकी कापियां दिखाने व उन्हीं के सामने जांचने के लिए बुलाया गया था। जब छात्र यूनिवर्सिटी पहुंचे तो कापियां दिखाने का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें तीन छात्र पास भी हुए। स्टूडेंट के पास होते ही विवि के जिम्मेदारों ने बाकी छात्रों को कॉपियां दिखाने से मना कर दिया, जिस पर छात्रों ने जम कर हंगामा किया। मालूम हो कि छात्रों ने अपनी इन्हीं समस्या को लेकर दस नवम्बर को प्राविधिक शिक्षा मंत्री फरीद किदवई से इंसाफ की गुहार लगाई थी, जिस पर मंत्री ने 15 छात्रों का रोल नम्बर लेकर विश्वविद्यालय को सौंपा था। साथ ही यह भी निर्देश दिया था की इन छात्रों की कॉॅपियां दिखाई जाएं। छात्रों की इस जिद पर विवि के कुलपति ने भी छात्रों को चैलेंज देते हुए कहा कि यदि एक भी छात्र की कॉपी सही निकली और वह पास हो गया तो हम सभी छात्रों की कापियां दोबारा चेक कराएंगे। 19 नवंबर को जब कापियां दिखायी जाने लगीं तो तीन स्टूडेंट्स पास हो गए। यह देख विश्वविद्यालय कर्मियों ने कापियां दिखाना बंद कर दिया। इस पर छात्र काफी आक्रोशित हो गए। छात्रों का आरोप है कि पहले भी इसी तरह हम लोगों को कॉपियां दिखाने के लिए बुलाया जा चुका है। जैसे ही इनकी कमियां हमारे सामने आती हैं यह लोग प्रक्रिया बंद कर देते हैं। जब हम लोग इसके लिए धरना देते हैं तो कॉपियां दिखाने व जांचने के लिये दूसरी तारीख देकर टरका दिया जाता है। पिछले दो महीने से हम एकेटीयू दौड़ रहे हैं।
विश्वविद्यालय परिसर में कॉपियों को दिखाने के दौरान एक शिक्षक से कहासुनी हो गई थी जिस पर आक्रोशित छात्रों ने शिक्षक को पीट दिया था। छात्रों की मानें तो उन्होंने सिर्फ दो-चार थप्पड़ ही मारे थे लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को बढ़ा-चढ़ाकर बताया। विश्वविद्यालय प्रशासन को लगा कि छात्रों पर दबाव बनाने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा। इसी रणनीति के अंतर्गत प्रशासन ने इतना तक कह दिया कि शिक्षक कोमा में चला गया है। इसलिए 13 छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। जबकि शनिवार को जब पड़ताल की गई तो ऐसा कहीं कोई मामला संज्ञान में नहीं आया। जानकीपुरम थाना प्रभारी आरबी यादव ने ऐसी किसी भी घटना से इनकार कर दिया था। जब कुलपति से बात करने की कोशिश की कई तो उन्होंने कहा कि हम आपको कोई स्टेटमेंट नहीं देंगे। आप मेरे पीआरओ से बात करें। जब पीआरओ आशीष मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है। कुल मिलाकर कहीं से कोई जवाब नहीं मिल। कुलपति और पीआरओ दोनों ही अपनी जिम्मेदारी से पल्ला पल्ला झाडऩे की कोशिश में लगे रहे। यह बहुत बड़ी विडंबना है कि कुलपति प्रो. विनय पाठक मीडिया में बयान देते हैं कि छात्रों की मार से शिक्षक कोमा में चला गया है और उपद्रवी छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी गई है, वहीं उनके पीआरओ को कोई जानकारी ही नहीं है।
ऐसा ही हाल कुछ महीने पहले पॉलीटेक्निक छात्रों का था। पॉलीटेक्निक छात्र प्राविधिक मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल सबके पास अपनी समस्याओं को लेकर गए थे। महीनों भटकने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ था। आज ऐसा ही हाल इन छात्रों का है।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री भी नहीं कर रहे सुनवाई

पिछले 15 दिन से ये स्टूडेंट्स गाहे-बगाहे प्राविधिक शिक्षा मंत्री फरीद किदवई के आवास पर अपनी समस्याओं को लेकर जा रहे हैं। छात्रों को एकेटीयू के वीसी प्रो. विनय पाठक से कोई उम्मीद नहीं रह गई है कि वह उनकी समस्याओं का निस्तारण कराएंगे। शुक्रवार को देर रात छात्र प्राविधिक शिक्षा मंत्री के आवास पर डेरा डाले रहे तो शनिवार को सुबह फिर उनके आवास मिलने गए। पिछले दो माह से विश्वविद्यालय और मंत्री आवास दौड़ते-दौड़ते कई छात्र मायूस हो गए हैं। इनका मानना है कि अगर हम अपनी गलती से फेल होते तो इतना कष्टï नहीं होता, लेकिन हमें जानबूझकर फेल किया गया है। हमारी कोई गलती नहीं है फिर भी वीसी प्रो. विनय पाठक हमे गलत ठहराने पर उतारू हैं। शिक्षा मंत्री भी हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैंं।

86 छात्रों का भविष्य दांव पर
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम यूनिवर्सिटी ने 86 छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा रखा है। छात्रों को इंसाफ के लिए कभी मंत्री तो कभी राज्यपाल का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। कई महीनों से इन छात्रों के हाथ निराशा ही लग रही है। छात्रों की मानें तो समस्या हल करने के लिए यूनिवर्सिटी के कुलपति इससे अपनी जेबें गर्म करने की योजना बना रहे हैं। अपने भविष्य के साथ इंसाफ की उम्मीद में छात्र कल फिर विवि में पूरी रात डटे रहे।

कापियों पर नम्बर नहीं फिर भी छात्र फेल
स्टूडेंट्स ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की लापरवाही तब सामने आयी जब हम लोगों ने कापियां देखी, जिसमें किसी भी कॉपी पर कोई नम्बर नहीं चढ़ा है। इससे साबित हो रहा है कि यह कॉपियां जांची ही नई गई हैं। बिना नम्बर दिये जिम्मेदार लोगों ने हमें फेल कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि पैसे के लिए सारा खेल खेला जा रहा है। छात्रों के काफी दौड़-भाग कर अपने भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ आवाज उठाई तब विवि प्रशासन छात्रों चुप कराने पर अमादा हो गया। अब जब सारा मामला लोगों के संज्ञान में आ गया है तब छात्रों को दोषी दिखाकर विवि प्रशासन अपनी छवि बचाने की कोशिश में लगा हुआ है। विवि प्रशासन जानबूझकर अपनी कमियों को छिपाने के लिए कई छात्रों पर यह आरोप लगा रहा है कि छात्र शराब पी कर यूनिवर्सिटी में हंगामा करते हैं। यह वह छात्र हैं जिन्हें यूनिवर्सिटी से निकाला गया है, जबकि छात्रों का कहना है कि हम लोंग इनसे अपने भविष्य को बचाने की गुहार लगा रहे हैं और यह लोग हम सब को अनुशासनहीन साबित करने पर तुले हुए हैं। विश्वविद्यायल प्रशासन द्वारा छात्रों के भविष्य के अन्याय करने का कोई अधिकार नहीं है।

छात्रों ने कहा…
इंजीनियरिंग छात्रा स्वेता पटेल ने कहा कि हम लोगों की सुनवाई नहीं हो रही है। हम सडक़ पर जिदंगी गुजार रहे हैं। भूखे-प्यासे हम लोग मुख्यमंत्री से लेकर प्राविधिक शिक्षा मंत्री तक के यहां दौड़ रहे हैं। गलती एकेटीयू प्रशासन की है और सजा हमें दी जा रही है। विवि प्रशासन हमारी जिदंगी बरबाद करने पर उतारू है।

इंजीनियङ्क्षरग छात्रा निवेदिता ने कहा कि पिछले दो महीने से हम दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हम थक चुके हैं। हमारा रिजल्ट सही किया जाए। हमारी गलती तो बताओ। जानबूझकर हमारे खिलाफ साजिश रची जा रही है। हमें इंसाफ चाहिए।

यूसीआर कॉलेज इलाहाबाद की खुशबू ने कहा कि दो महीने से हम कभी एकेटीयू तो कभी मंत्री के आवास का चक्कर लगा रहे हैं। हमारी समस्याओं से किसी को कोई सरोकार नहीं हैं। मुलायम सिंह यादव के पास भी हम लोग गए थे। हम उन्हें बताना चाहते थे कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है। जानबूझकर हमें फेल किया गया है। यह सरासर अन्याय है।

इंजीनियरिंग छात्र प्रेमशंकर ने कहा कि हम लोग थक गए हैं। कई छात्र घर-परिवार छोडक़र कई दिनों से राजधानी में पड़े हुए हैंं। कई छात्रों का रहने का ठिकाना भी नहीं हैं। हम लोग कैसे मैनेज कर रहे हैं हम ही जान रहे हैं।

स्टूडेंट्स मनोज कुमार और देव कुमार कहते हैं कि एकेटीयू दादागिरी करने पर उतारू है। हम कुछ बोलते हैं तो हम पर झूठा आरोप लगाया जाता है। जब हम कॉपी दिखाने के लिए कहते हैं तो हमारा रोल नंबर लेकर टरका देते हैं। हम लोगों पर झूठा आरोप लगाया गया कि छात्रों की पिटाई से टीचर कोमा में चला गया जबकि टीचर अपने घर पर है। इतना ही नहीं एकेटीयू में इतनी ज्यादा लापरवाही बरती जाती है कि बिना कॉपियां जांचे ही रिजल्ट दे दिया जाता है।

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