भ्रष्टïाचार की गहरी जड़ें…

अभी तक सीबीआई ने यादव सिंह की 38 सम्पत्तियों का पता लगाया है जिनकी कीमत 250 करोड़ रुपए से ज्यादा है। सीबीआई के मुताबिक बीते कुछ दशकों में आय से अधिक संपत्ति का ऐसा मामला उनके सामने अभी तक नहीं आया था। एक अधिकारी के मुताबिक सीबीआई ने राजनेताओं से लेकर ब्यूरोक्रेट्ïस तक की जांच की है लेकिन यादव सिंह के पास जितनी अकूत दौलत है वह किसी के पास नहीं थी।

sanjay sharma editor5देश में भ्रष्टïाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। रातो-रात अमीर बनने की चाहत में लोग गलत काम करने से बाज नहीं आ रहे हैं। सबसे ज्यादा कहीं भ्रष्टïाचार है तो वह सरकारी विभागों में। सरकारी राजस्व को बड़े और जिम्मेदार पदों पर आसीन लोग किस तरह अपने हित में बर्बाद कर रहे हैं इससे सभी वाकिफ हैं। जिस तरीके से सरकारी पैसों का बंदरबाट किया जा रहा है वह कहीं से भी उचित नहीं है। नेता, मंत्रियों के बीच अच्छी पकड़ होने के कारण अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं। कई अधिकारियों पर भ्रष्टïाचार का आरोप लगने के बावजूद भी कोई कार्रवाई न होने के कारण ही घोटालों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। इससे तो स्पष्टï है कि भ्रष्टïाचार के केन्द्र में कौन है। किसकी शह पर ऐसे अधिकारियों को प्रोत्साहन मिल रहा है। पिछले साल जब नोएडा के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह के यहां छापा पड़ा था तो करोड़ों-अरबों रुपए की सम्पत्ति सामने आयी थी। अब जब सीबीआई की टीम इसकी जांच कर रही है तो भ्रष्टïाचार की परतें खुल रही हैं।
आलम यह है कि यादव की अकूत सम्पत्ति देखकर सीबीआई की टीम भी हैरान है। आय से अधिक सम्पत्ति की जांच कर रही सीबीआई को अब तक मिले सुराग के मुताबिक यादव सिंह और उसके रिश्तेदारों के पास से 250 करोड़ से अधिक सम्पत्ति का ब्यौरा मिला है। अभी तक सीबीआई ने यादव सिंह की 38 सम्पत्तियों का पता लगाया है जिनकी कीमत 250 करोड़ रुपए से ज्यादा है। सीबीआई के मुताबिक बीते कुछ दशकों में आय से अधिक संपत्ति का ऐसा मामला उनके सामने अभी तक नहीं आया था। एक अधिकारी के मुताबिक सीबीआई ने राजनेताओं से लेकर ब्यूरोक्रेट्ïस तक की जांच की है लेकिन यादव सिंह के पास जितनी अकूत दौलत है वह किसी के पास नहीं थी। यह तो केवल एक यादव सिंह की कहानी है। प्रदेश में ऐसे हजारों यादव सिंह हैं जो जनता की मेहनत की कमाई पर कुंडली मार कर बैठे हुए हैं। ऐसा नहीं है कि ऐसे लोगों के बारे में सरकार को पता नहीं है।
आखिर कैसे दो-चार साल के कैरियर में अधिकारी करोड़ों की सम्पत्ति के मालिक बन जा रहे हैं। यह अजीब विडंबना है कि एक तरफ सरकार भ्रष्टïाचार पर अंकुश लगाने की बात कहती है और वहीं दूसरी तरफ ऐसे भ्रष्टï अधिकारियों पर कार्रवाई करने से बचती है। इतना ही नहीं भ्रष्टï अधिकारियों को सरकार बचाने की फिराक में लगी रहती है। यादव सिंह के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला था। प्रदेश सरकार ने यह भरसक कोशिश की थी कि सीबीआई जांच न हो। यादव सिंह का सफर बहुत ही रोचक रहा है। इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त यादव सिंह अपने रसूख की बदौलत ही जूनियर इंजीनियर से इंजीनियर इन चीफ नोएडा, यमुना एक्सप्रेस वे और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी तक का सफर तय किया।

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