भ्रष्ट प्रमुख सचिव चंचल तिवारी को बचाने उतरे पंचायती राज के कर्मचारी

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  • सीएम को लिखे खत में कहा कि 4पीएम ने चंचल तिवारी के खिलाफ गलत छापा
  • 5 करोड़ रुपए लेकर प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी ने जारी किया था गलत शासनादेश
  • 14वें वित्त आयोग के साढ़े तीन हजार करोड़ की हेराफेरी करने को बेताब हैं कुछ लोग
  • चंचल के शासनादेश से जिलों में डीएम और सीडीओ नहीं कर पायेंगे पंचायती राज के कर्मचारियों पर नियंत्रण
  • ब्लाकों में वीडीओ के नियंत्रण से एडीओ पंचायत को अलग करने की साजिश
  • चंचल तिवारी नहीं चाहते कि हजारों करोड़ के खर्चें का हिसाब किताब देखें खंड विकास अधिकारी
  • विकास खंड पर राजपत्रित अधिकारी होता है सिर्फ बीडीओ और उसी की हैसियत खत्म करने की साजिश
  • मुख्यालय पर चंदा इकठा करके लाई गई भीड़ से बनाया गया दबाव और स्थगित करवा दिया मुख्य सचिव की मीटिंग का कार्यवृत्त
  • 4पी एम ने पहले ही खुलासा किया था कि भीड़ जुटाने और प्रमुख सचिव चंचल तिवारी को पैसे देने के लिए की गई थी वसूली
  • पंचायत राज सेवा परिषद ने अपने खत में माना कि लखनऊ के आंदोलन के लिए प्रदेश भर से जुटाया गया था चंदा

संजय शर्मा
लखनऊ। 4पीएम की खबरों से बौखलाए पंचायती राज्य सेवा परिषद के अध्यक्ष एसएन सिंह अपने विभाग के भ्रष्टï प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी को बचाने के लिए उतर आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गलत तथ्यों के आधार पर चंचल तिवारी का बचाव किया है और 4पीएम की मान्यता रद्द करने की गुहार लगाई है। दरअसल सबसे पहले 4पीएम ने ही खुलासा किया था कि 14वें वित्त आयोग के हजारों करोड़ रुपए की बंदरबांट करने के लिए प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी ने 5 करोड़ रुपए लेकर एक गलत शासनादेश जारी कर दिया। इस शासनादेश से प्रदेश भर में डीएम और सीडीओ का नियंत्रण पंचायती राज कर्मियों पर नहीं रहता। वह इन लोगों की चरित्र पंजिका भी नहीं लिख सकते हैं। यहीं नहीं ब्लाक स्तर पर सालों से चली आ रही परंपरा को खत्म करते हुए खंड विकास अधिकारियों के नियंत्रण से एडीओ पंचायत को न सिर्फ अलग किया बल्कि शासनादेश में यह भी प्रावधान करा दिया कि सिर्फ एक हस्ताक्षर से एडीओ पंचायत पैसा निकाल सकता है, जबकि नियमानुसार अब तक बीडीओ और एडीओ के संयुक्त हस्ताक्षर से ही पैसा निकल सकता था। सभी विभागों में दो अधिकारियों के हस्ताक्षर का प्रचलन है, जिससे भ्रष्टïाचार न किया जा सके।
सीएम को लिखे खत में श्री सिंह ने कहा कि शासनादेश भारत सरकार के निर्देश पर जारी किया गया इसमें प्रमुख सचिव की भूमिका नहीं है। मजे की बात यह है कि अब तक धरने के लिए वसूली के लिए मना कर रहे श्री सिंह ने इस पत्र में स्वीकार कर लिया कि धरने में आने वाले बस आदि के लिए चंदा जून में लिया गया था, जबकि जीओ फरवरी में जारी हुआ। हमने अपनी खबर में यही बात लिखी थी कि चंचल तिवारी को यह रुपये देने का वादा किया गया था और उसी वादे के लिए यह वसूली बाद में की गई। श्री सिंह ने अपने खत में यह बात स्वीकार करके हमारी खबर पर मुहर लगा दी। सबसे गंभीर बात यह है कि भीड़ के दबाव में मुख्य सचिव की मीटिंग का कार्यवृत्त अभी तक रुका हुआ है। इस तरह के प्रचलन से कोई भी विभाग भीड़ इकठी करके सरकार पर दबाव बनाकर अपने पक्ष में निर्णय करायेगा जो सरकार के लिए उचित नहीं।

ग्राम्य विकास को बर्बाद होते देखकर भी खामोश क्यों हैं विभाग के मंत्री गोप!
प्रदेश भर के खंड विकास अधिकारियों में बेहद गुस्सा है। ग्राम्य विकास ही केन्द्र और प्रदेश की नीतियों को ग्राम्य स्तर पर लागू करने वाला सबसे बड़ा विभाग है। प्रमुख सचिव चंचल तिवारी के शासनादेश के बाद जब प्रदेश भर के बीडीओ आंदोलन पर उतरे तो मुख्य सचिव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त ने दोनों पक्षों से बात करके तय कर दिया था कि विकास खंड के स्तर पर खंड विकास अधिकारी ही राजपत्रित अधिकारी होता है लिहाजा सभी विभाग उसके अधीन रहेंगे। इस फैसले से पंचायती राज विभाग में हडक़ंप मच गया क्योंकि अगर ऐसा हो जाता तो प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी और उनके गुर्गे 14वें वित्त आयोग के हजारों करोड़ रुपए की हेराफेरी नहीं कर पाते। लिहाजा पूरे प्रदेश से वसूली हुई और लखनऊ में पंचायती राज के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में सफाई कर्मचारियों को यह कहकर लाया गया कि उन्हें ग्राम्य विकास अधिकारी बना दिया जायेगा। प्रदर्शन के बाद पंचायती राज मंत्री और अधिकारियों के बीच वार्ता में तय हुआ कि ग्राम्य विकास मंत्री और पंचायती राज मंत्री बैठक कर इस मसले पर फैसला लेंगे। सूत्रों का कहना है कि भीड़ तो सफाई कर्मचारियों की जुटाई गई, मगर उन्हें ग्राम्य विकास अधिकारी बनाए जाने पर कोई बात नहीं हुई। प्रदेश भर के खंड विकास अधिकारियों को भरोसा था कि ग्राम्य विकास मंत्री जल्दी ही वार्ता करके तय करा देंगे कि खंड विकास स्तर पर बीडीओ के नियत्रंण में एडीओ पंचायत रहेंगे। पूर्व में भी यह व्यवस्था चली आ रही है। मगर कई दिन बीतने के बाद भी ग्राम्य विकास मंत्री इस मुद्दे पर खामोश हैं और उन्होंने पंचायती राज मंत्री से बात करके कोई फैसला नहीं किया। बताया जाता है कि पंचायती राज मंत्री राज किशोर सिंह और ग्राम्य विकास मंत्री अरविन्द सिंह गोप रिश्तेदार भी हैं। ग्राम्य विकास मंत्री की इस खामोशी से प्रदेश भर के खंड विकास अधिकारी बेहद गुस्से में हैं और उनका कहना है कि वे समझ नहीं पा रहे कि उनके मंत्री गोप अपने ही विभाग को कैसे बर्बाद होने दे रहे है।

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