भारत-रूस समझौतों के संकेत

सीरिया में आतंकियों के खात्मे के लिए रूस लगातार सैन्य अभियान चला रहा है। इसका रूस की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा रूस नहीं चाहता कि चीन और पाकिस्तान मिलकर दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन बिगाड़े। आतंकवाद और पाकिस्तान को लेकर जिस तरह की ढुलमुल नीति चीन अपना रहा है, उससे रूस की यह शंका बलवती हुई है। आतंकवाद के खिलाफ पुतिन ने भारत का साथ देने का ऐलान कर चीन को संदेश दे दिया है।

sanjay sharma editor5ब्रिक्स सम्मेलन से पूर्व भारत और रूस के बीच हुए समझौते कई मायनों में अहम हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सौदे ऐसे समय हुए हैं जब उड़ी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय फौज ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की और भारत-पाक के बीच तनाव चरम पर हैं। ताजा समझौते के बाद भारत एस 400 मिसाइल सिस्टम से लैस हो जाएगा। यह अत्याधुनिक व लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है और 36 लक्ष्यों पर निशाना साधने में सक्षम है। रूस के बाद भारत इस सिस्टम से लैस होने वाला दुनिया का दूसरा देश होगा। इसमें तीन मिसाइलों का इस्तेमाल होता है। पहली मिसाइल की मारक क्षमता 400, दूसरी की 250 और तीसरी की मारक क्षमता 120 किमी है। इससे कामोव हेलीकॉप्टर खरीदने का भी रास्ता साफ हो गया है। इसके अलावा दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा, गैस पाइप लाइन, स्मार्ट सिटी और जहाज निर्माण क्षेत्र में भी समझौते किए हैं। सवाल यह है कि क्या इन समझौतों से केवल भारत मजबूत होगा? आखिर इतने दिनों बाद रूस ने भारत को मिसाइल सिस्टम क्यों दिया? क्या इसके पीछे रूस की कोई कूटनीतिक मंशा है या वह इन समझौतों से खुद को आर्थिक रूप से मजबूत करना चाहता है? दरअसल, रूस के विभाजन के बाद डगमगाई अर्थव्यवस्था को पुतिन तमाम मशक्कत के बाद पटरी पर ला सके हैं और वे इसे मजबूत करना चाहते हैं। पुतिन को पता है कि हथियार और तकनीकी रूस की अर्थव्यवस्था की सेहत को तेजी से सुधार सकते हैं। पुतिन यह भी जानते हैं कि भारत के साथ किए जाने वाले भारी-भरकम रक्षा सौदों पर विश्व बिरादरी भी सवाल नहीं उठाएगी। इसके अलावा सीरिया में आतंकियों के खात्मे के लिए रूस लगातार सैन्य अभियान चला रहा है। इसका रूस की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा रूस नहीं चाहता कि चीन और पाकिस्तान मिलकर दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन बिगाड़े। आतंकवाद और पाकिस्तान को लेकर जिस तरह की ढुलमुल नीति चीन अपना रहा है, उससे रूस की यह शंका बलवती हुई है। आतंकवाद के खिलाफ पुतिन ने भारत का साथ देने का ऐलान कर चीन को संदेश दे दिया है। वहीं, भारत भी इस बात को जानता है कि रूस की मैत्री के मूल्य पर किसी दूसरे राष्टï्र को तवज्जो नहीं दी जा सकती, भले वह अमेरिका ही क्यों न हो। पिछले दिनों पाकिस्तान और रूस के सैन्याभ्यास से भारत के माथे पर शिकन पड़ गई थी। विशेषज्ञ मानने लगे थे कि भारत और रूस के संबंध बिगड़ सकते हैं। लेकिन रूस से हुए समझौतों ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। कुल मिलाकर इन समझौतों से भारत के आर्थिक विकास में भी पंख लगेंगे।

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