भारत में 20 प्रतिशत बुजुर्ग मानसिक बीमार

केजीएमयू में वृद्धों पर शोध के लिए प्रदेश का पहला रिसर्च सेंटर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भारत में वर्तमान समय में वृद्धजनों की संख्या लगभग 10 करोड़ है इसमें 20 प्रतिशत वृद्धजन किसी न किसी मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं। इसलिए वृद्वजनों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटन के लिए एक सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित ढांचे की जरूरत है। यह कहना है वृद्वावस्था मानसिक स्वास्थ्य विभाग के एचओडी व केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एससी श्रीवास्तव का।
आज के परिवेश में वृद्धजनों की संख्या में जहां तेजी से वृद्धि हो रही है, वहीं शारीरिक बदलावों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक, परिवारिक, आर्थिक कारणों की वजह से वृद्धजनों में मानसिक बीमारियों का प्रतिशत आमजनों की अपेक्षा अधिक पाया जा रहा है। इन विषयों पर शोध के उद्देश्य से 19 अगस्त 2013 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से केजीएमयू के वृद्वावस्था मानसिक स्वास्थ्य विभाग में सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च ट्रेनिंग एंड सर्विसेज इन एजिंग एंड जीरियाट्रिक मेंटल हेल्थ नाम से शोध संस्थान की नींव रखी गई थी। इस शोध संस्थान में भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के अंतर्गत दो परियोजनायें लखनऊ (अर्बन) एल्डरली स्टडी व लखनऊ (रूरल)एल्डरली स्टडी चलाई गईं।
इन दोनों शोध परियोजनाओं के परिणाम चौकाने वाले थे। इनके आधार पर लगभग 50 प्रतिशत वृद्धजन शारीरिक तथा 20.5 प्रतिशत वृद्धजन किसी न किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त होते हैं। यह औसत आम जनमानस से कई गुना अधिक है। इन्हीं परिणामों को देखते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से विभाग में सेंटर फॉर एडवांस सिर्च ट्रेनिंग एंड सर्विसेज कार्ट्स की स्थापना की गई। इसके आलावा आने वाले समय में कार्ट्स के अंतर्गत कई योजनाओं पर काम किया जाना प्रस्तावित है। केजीएमयू के कुलपति रविकांत की ओर से 16 मार्च 2013 को रैंडमली तकनीक द्वारा अध्ययन क्षेत्रों का चुनाव किया गया। इस अध्ययन के अंतर्गत उन लोगों को जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक है उन्हें लंबे समय हेतु सम्मिलित कर लिया गया। शुरुआत के चरण में यह अध्ययन सरोजनी नगर, माल ब्लॉक, चिनहट और ऐशबाग वार्ड में किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में सरोजनीनगर के मीरानपुर, पिनवट,हर्रानी, परवट पूरब, प्यारे पुर, निजामपुर मझिगवां, कली पश्चित, सदुल्लागंज, घुसवल कला, बिजनौर माटी। साथ ही माल के गांव इस प्रकार है पाराभद्ररही, ढकवा, मदनवा, अंतगढ़ीसौरा, नवीपनह, तिलन, देवारी भारत, सरथरा, देवरीगंज, एवक शंकर पुत्र में भी शोध कार्य चल रहा है।

प्रस्तावित योजनायें

विभिन्न बीमारियों के लक्षण, प्रारूप एवं उपचार संबंधित प्रदत्त आंकड़ों का संकलन।

स्वस्थ एवं बीमार होने के जैविक, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक जीवनशैली इत्यादि संबंधित निर्धारकों की जानकारी एवं उपचार
आवश्यकतानुरूप भौतिक एवं मानवीय सेवाओं संबंधित नीतियों एवं कार्यक्रमों का विकास।

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