भारत की अफगानिस्तान से दोस्ती, सभी देशों का समर्थन

वर्षों चले युद्ध में अफगानिस्तान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके पुनर्निर्माण में भारत भरपूर सहयोग कर रहा है। कठिन परिस्थितियों में और तालिबानों के आतंक के बीच भारत के इंजीनियरों और दूसरे कामगारों ने अफगानिस्तान की उबड़ खाबड़ पहाडिय़ों पर फिर से सडक़ें बनाना शुरू कर दिया है। देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर्स की वृद्धि में इन सडक़ों का योगदान अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है।

डॉ. गौरीशंकर राजहंस
इसमें कोई संदेह नहीं कि गत दो वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की विदेश नीति को शिखर पर ला दिया। पाकिस्तान को छोडक़र संसार के सारे देश भारत के मित्र हो गए। आज भारत का आर्थिक विकास 7.9 प्रतिशत है जो संसार में सबसे अधिक है। संसार के सारे देश अब लालच भरी निगाह से भारत में निवेश करने पर विचार कर रहे हैं। अपनी विदेश नीति को नया आयाम देने के लिये अभी अभी नरेन्द्र मोदी पांच देशों की यात्रा पर गये हैं जिसमें अफगानिस्तान, कतर, स्विटजरलैंड, अमेरिका और मेक्सिको प्रमुख हैं। यात्रा की शुरुआत उन्होंने अफगानिस्तान से की। गत 6 महीनों में नरेन्द्र मोदी की यह दूसरी अफगानिस्तान यात्रा है। इसी से पता चलता है कि भारत के प्रधानमंत्री अफगानिस्तान को कितना महत्व देते हैं।
हाल में ईरान के साथ चाहबहार बंदरगाह पर जो समझौता किया उसे देखकर सारा संसार आश्चर्यचकित रह गया। खासकर, पाकिस्तान और चीन बुरी तरह जल-भुन गये। परन्तु यह नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता थी जिससे अब पाकिस्तान होकर अफगानिस्तान जाना भारत के उद्यमियों और व्यापारियों के लिये जरूरी नहीं है। अब सीधे ईरान से होकर अफगानिस्तान जाया जा सकता है और फिर अफगानिस्तान से मध्य-एशियाई देशों तक पहुंचा जा सकता है।
यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। परन्तु उससे भी बड़ी उपलब्धि यह हुई कि प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान के हेरात प्रान्त में 1700 करोड़ रुपये की लागत से बना भारत-अफगानिस्तान मैत्री डैम का उद्ïघाटन किया। यह डैम निश्चित रूप से अफगानिस्तान की आर्थिक प्रगति में भरपूर सहायक होगा। पहले इस डैम को सलमा ‘डैम’ कहते थे। अफगानिस्तान के राष्टï्रपति अशरफ गनी के साथ मिलकर उन्होंने इस डैम का संयुक्त रूप से उद्ïघाटन किया और दोनों ने इसे सक्त्र्भारत अफगानिस्तान की अटूट मित्रता का ‘डैम’ कहा।
इस डैम के बनने से अफगानिस्तान के इन्फ्रास्ट्रक्चर्स में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। इस डैम से 75 हजार हेक्टेयर मील की सिंचाई होगी और इस डैम के द्वारा 42 मेगावाट बिजली पैदा होगी जो अफगानिस्तान के पिछड़े क्षेत्रों के लिये वरदान साबित होगी। इस डैम की लम्बाई 20 किलोमीटर और चौड़ाई 3़7 किलोमीटर है। इसमें सालभर इतना पानी रहेगा कि सिंचाई और बिजली में कभी कोई कठिनाई नहीं होगी। अफगानिस्तान के राष्टï्रपति अशरफ गनी ने इस डैम के उद्ïाटन के समय भारत की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारत के इंजीनियरों और कामगारों ने तालिबान और दूसरे आतंकवादियों की परवाह किये बिना इसे बनाया।
भारत ने अफगानिस्तान में वहां का बृहद् संसद भवन भी बनाया है जिसका उद्ïघाटन पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। इस संसद भवन को बनाने में जिन इंजीनियरों और कामगारों ने दिन रात परिश्रम किया था उन्हें तालिबानों ने हर तरह से तंग किया था। अनेक लोगों का अपहरण हुआ था और अनेक इंजीनियर और कामगार मारे गये थे। पाकिस्तान और उसके मित्र देश यही सोच रहे थे कि तंग आकर भारत संसद भवन का निर्माण बन्द कर देगा।
वर्षों चले युद्ध में अफगानिस्तान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके पुनर्निर्माण में भारत भरपूर सहयोग कर रहा है। कठिन परिस्थितियों में और तालिबानों के आतंक के बीच भारत के इंजीनियरों और दूसरे कामगारों ने अफगानिस्तान की उबड़ खाबड़ पहाडिय़ों पर फिर से सडक़ें बनाना शुरू कर दिया है। देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर्स की वृद्धि में इन सडक़ों का योगदान अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि पाकिस्तान के तालिबान और हक्कानी ग्रुप के आतंकवादी भारत के प्रयासों को जी जान से मिटाने में लगे हुए हैं। परन्तु भारत ने हिम्मत नहीं हारी है। वह अफगानिस्तान में अनेक स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों का निर्माण कर रहा है। भारत चाहता है कि अफगान जनता खासकर उसकी छात्राएं ऊंची शिक्षा प्राप्त करें। परन्तु तालिबान उनकी राह में अनेक रोड़े अटका रहा है। भारत सरकार अफगानिस्तान के छात्रों को प्रतिवर्ष 1000 स्कोलरशिप दे रही है। भविष्य में यह संख्या और भी बढ़ाई जाएगी। इससे अफगानिस्तान के लोगों में यह भावना फैली है कि भारत सही अर्थ में उनका मित्र है। भारत सीमित संख्या में अपने यहां अफगानिस्तान के सैनिकों को भी ट्रेनिंग दे रहा है।

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