भारत और चीन संबंधों के लिहाज से खास रहा वर्ष 2015

 केजेएम वर्मा
वर्ष 2015 भारत और चीन के बीच उच्च स्तरीय वार्ताओं के लिहाज से काफी सार्थक रहा। ज्यादा संवाद और टकराव रहित संबंध की ओर बढ़ते हुए दोनों पक्ष वर्ष 2016 में आतंकवाद से निपटने के लिए और सीमाई विवादों को हल करने के प्रयासों की दिशा में सहयोग बढ़ाने को लेकर आशान्वित हैं। इस साल दोनों पक्षों के बीच कई उच्च स्तरीय यात्राएं हुईं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजिंग यात्रा, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृहमंत्री राजनाथ सिंह की चीन यात्रा और चीनी उपराष्ट्रपति ली युआनचाओ की भारत यात्रा शामिल है। हाल के इतिहास के सबसे दिलचस्प वर्ष को अलविदा कहते हुए उत्तरी क्षेत्र के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा इस माह चीन के आमंत्रण पर बीजिंग की यात्रा पर गए। हुड्डा की यात्रा इस लिहाज से महत्वपूर्ण थी कि उनके पूर्ववर्ती जनरल बीएस जसवाल को इस आधार पर वीजा देने से इंकार कर दिया गया था कि ‘विवादास्पद’ जम्मू-कश्मीर उत्तरी कमान के तहत आता है। इस बात से नाराज भारत ने गुस्से से भरी प्रतिक्रियाएं दीं थीं। अधिकारियों ने कहा कि जनरल हुड्डा के इस दौरे ने दोनों देशों के बीच एक बड़े विवाद को हटाते हुए सैन्य संबंध बहाल किए हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की पिछली साल हुई भारत यात्रा की तरह प्रधानमंत्री मोदी की इस साल हुई चीन यात्रा में भी सीमा विवाद को सुलझाने और घुसपैठ के मुद्दे से निपटने के उपाय करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उठाए जा सकने वाले कदमों पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रधानमंत्री की यात्रा के परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच 22 अरब डॉलर के कारोबारी समझौते हुए। दोनों देशों के सैन्य मुख्यालयों के बीच हॉटलाइन कनेक्शन स्थापित हुए, स्थानीय कमांडरों के संवाद के लिए ज्यादा सीमा बिंदु खोले गए, 46 अरब डॉलर तक पहुंच चुके व्यापारिक घाटे से निपटने के लिए कार्यबल का गठन हुआ और चीनी पर्यटकों को ई-वीजा की सुविधा शुरू हुई।
चीनी अधिकारियों ने कहा कि भारत में चीनी निवेश में लगातार इजाफा हुआ है और यह तीन अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। सिंह की चीन यात्रा के दौरान दोनों देश पहली बार क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर राजी हुए। चीन ने आतंकवाद रोधी अभियान के तहत पूर्वोत्तर के कुछ विद्रोही समूहों पर कार्रवाई की प्रतिबद्धता जाहिर की। लेकिन चीन द्वारा पाकिस्तान के साथ बढ़ाए जा रहे संबंधों और इसके 46 अरब के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद दिखे। भारत ने इस पर आपत्ति जाहिर की क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर से होकर जाता है। यह गलियारा चीन के मुस्लिम बहुल शिनजियांग को पाकिस्तान के रणनीतिक ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। यह उसे अरब सागर तक पहुंच उपलब्ध कराता है और पश्चिम एशिया से तेल के त्वरित आयात को सुगम बनाता है। चीन के महत्वाकांक्षी मैरीटाइम सिल्क रोड पर भी मतभेद बने रहे क्योंकि भारत को हिंद महासागर में इसके असर को लेकर चिंता है।
चीन ने कैलाश मानसरोवर की दुर्गम यात्रा पर जाने वाले भारतीयों के लिए इस साल लिपुलेख दर्रे से इतर एक नया, सुरक्षित और ज्यादा सुविधाजनक मार्ग खोला है। सिक्किम में नाथू ला दर्रे से होकर जाने वाले दूसरे मार्ग को खोलने की घोषणा मोदी की चीन यात्रा के दौरान की गई थी। इस नए मार्ग ने तीर्थयात्रा में लगने वाले 20 दिन के समय को घटाकर लगभग आठ दिन कर दिया है। भारत और चीन ने विवादपूर्ण सीमा मुद्दे को सुलझाने के लिए नयी दिल्ली में 18वें दौर की वार्ता की। दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए सहमत हुए, जो द्विपक्षीय संबंधों में लगातार वृद्धि के लिए ‘पूर्वापेक्षित’ है। इसके साथ ही दोनों पक्ष आतंकवाद से निपटने के लिए, समुद्री सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए भी राजी हो गए। उच्च रियायत वाले ऋणों का प्रस्ताव देते हुए जापान इस साल भारत की पहली बुलेट ट्रेन की 12 अरब डॉलर की लागत वाली परियोजना को हासिल करने में सफल रहा। यह ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलनी है। इससे खीझा चीन चेन्नई-दिल्ली और मुंबई-दिल्ली मार्गों की परियोजना हासिल करने की उम्मीद कर रहा है।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यदि चीन उसी स्तर की रियायत वाले ऋण देता है तो उसके लिए रास्ते खुले हैं। भारत ने अमेरिका और चीन के बीच ताजा तनाव को लेकर भी चिंता जाहिर की। यह तनाव दक्षिण चीन सागर में बीजिंग द्वारा बनाए गए कृत्रिम द्वीपों के पास अमेरिका के निर्देशन वाले मिसाइल विध्वंसक के विचरण को लेकर है। चीन ने कड़ा विरोध जताते हुए अमेरिका को इस क्षेत्र में नौवहन पोत और सैन्य विमान भेजने के खिलाफ चेतावनी दी थी। चीन भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को लेकर भी चिंतित नजर आता है। इस नीति के तहत भारत चीन के पास स्थित दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है। चीन की प्रमुख चिंता भारत द्वारा वियतनाम और फिलीपीन के साथ तेजी से संबंध विकसित किए जाने को लेकर है। इन चिंताओं के बावजूद अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2015 को भारत और चीन के बीच गहरे संबंधों के लिए और वार्ता के जरिए संबंधों की बहाली के लिए जाना जाएगा।

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