भारत और चीन के बीच ट्रंप

सवाल यह है कि क्या ट्रंप के इन विचारों को भारत गंभीरता से ले सकता है? अमेरिका की आधी आबादी के बीच अयोग्य माने जाने वाले ट्रंप से क्या वाकई कुछ मदद मिलेगी? क्या वे भारत के हितों के लिए अमेरिकी हितों को दरकिनार कर सकेंगे? क्या रूस और चीन के संबंधों को देखते हुए अमेरिका भारत के साथ मजबूती से खड़ा हो पाएगा? भारत को लेकर चीन की और भी चिंताएं हैं।

sajnaysharmaकई दशकों बाद भी भारत और चीन के संबंधों में बहुत कुछ बदला नहीं है। चीन की कूटनीति हमेशा भारत के खिलाफ रही है। वह भारत को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ता है। चाहे आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करना हो या एनएसजी के भारत के सदस्य बनने की राह में रोड़ा अटकाने का मामला हो, चीन भारत के विरोध में खड़ा दिखता है। विरोधाभास यह कि दोनों ही देश भारत से सुविधाएं लेने और व्यापार बढ़ाने की फिराक में रहते हैं। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्टï्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पाक और चीन का भारत के प्रति यह दोहरा रवैया रास नहीं आ रहा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि भारत उनका अच्छा मित्र है और वे पाकिस्तान व चीन के दोहरे रवैए को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। सवाल यह है कि क्या ट्रंप के इन विचारों को भारत गंभीरता से ले सकता है? अमेरिका की आधी आबादी के बीच अयोग्य माने जाने वाले ट्रंप से क्या वाकई कुछ मदद मिलेगी? क्या वे भारत के हितों के लिए अमेरिकी हितों को दरकिनार कर सकेंगे? क्या रूस और चीन के संबंधों को देखते हुए अमेरिका भारत के साथ मजबूती से खड़ा हो पाएगा? भारत को लेकर चीन की और भी चिंताएं हैं। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भारत तेजी से बढ़ रहा है। कई मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए भारत पसंदीदा जगह बन गया है। इससे चीन की सरकारी मीडिया भी चिंतित है। ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में लिखा है कि भारत मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस के तौर पर चीन को पछाड़ पाएगा या नहीं। लेकिन जैसी स्थितियां दिख रही हैं, उससे चीन को अपने इस उद्योग को बढ़ाना होगा। चीन को इस मामले में अमेरिका से भी चुनौती मिलने वाली है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्टï्रपति ट्रंप ने भी अपने देशवासियों से वादा किया है कि वे जल्द ही मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में वापसी करेंगे। चीन की चिंता यह है कि यदि भारत और अमेरिका के बीच मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में कोई समझौता हो गया तो यह दोनों देशों के लिए भले लाभदायक हो लेकिन उसके हक में अच्छा नहीं होगा। जहां तक भारत का सवाल है यहां सस्ता मानव संसाधन उपलब्ध है। इस मामले में वह चीन को काफी पीछे छोड़ देगा और जिस तरह भारत में कंपनियां निवेश कर रही हैं, उससे भविष्य सुखद दिख रहा है। अब देखना यह है कि भारत को लेकर ट्रंप की सकारात्मक सोच हकीकत में कितना तब्दील हो पाती है।

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