भारत-अफगान संबंधों पर टिकीं निगाहें

“अफगानिस्तान अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इसी मायने से अफगान राष्ट्रपति की भारत यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि भारत ने पहले से ही अफगानिस्तान को चार हैलिकॉप्टर दे रखे हैं लेकिन अफगान फौज को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए और हवाई उपकरणों की जरूरत है।”

sanjay sharma editor5अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी दो दिनों के भारत दौरे पर हैं। दोनों देशों के बीच अहम रक्षा सहयोग और सैन्य संबंधी उपकरणों पर चर्चा होना तय है। चूंकि अफगानिस्तान की फौज को तालिबान के खिलाफ लडऩे के लिए और अधिक सैन्य उपकरणों की जरूरत भी है। इसलिए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति का सबसे अधिक जोर रक्षा सहयोग और सैन्य उपकरणों पर ही रहेगा। क्योंकि पिछले कुछ सालों में तालिबान ने अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में अपना दखल बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है। इसके अलावा देश की सुरक्षा पर इस्लामिक स्टेट का खतरा भी मंडरा रहा है। इसलिए अफगानिस्तान भारत के साथ अपने संबंध बेहतर करने की कोशिश में जुटा है। जबकि भारत-अफगान संबंधों पर दुनिया भर के देशों की निगाहें टिकी हुई हैं।
अफगानिस्तान को खास तौर पर अपनी एयर फोर्स को मजबूत बनाने की जरूरत है। तालिबान के साथ लड़ाई में अफगानिस्तान पर होने वाले हवाई हमलों से ही सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। इसलिए अफगानिस्तान अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इसी मायने से अफगान राष्ट्रपति की भारत यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि भारत ने पहले से ही अफगानिस्तान को चार हैलिकॉप्टर दे रखे हैं लेकिन अफगान फौज को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए और हवाई उपकरणों की जरूरत है। भारत अब तक अफगानिस्तान में अपनी छवि सॉफ्ट पावर के तौर पर बनाए रखने की नीति पर चल रहा है। भारत ने आंतरिक युद्ध झेल रहे इस देश में मुख्य तौर पर अपनी भूमिका अधारभूत संरचना और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र के विकास तक सीमित रखी है। पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन में शामिल होने के बजाय भारत ने साल 2001 से अफगानिस्तान में सडक़, स्कूल, पावर लाइन्स, संसद की इमारत और बांध बनाने जैसे कामों को अंजाम दिया है। भारत ने अफगानिस्तान को किसी भी तरह की सैन्य मदद देने से दूरी बनाए रखी है। दरअसल अफगानिस्तान और भारत का संबंध सिर्फ दो देशों के बीच का मसला नहीं है, बल्कि विश्वस्तर पर दोनों के संबंधों पर लोगों की निगाह टिकी हुई है।
दरअसल पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अपना दखल बना रखा है। वह सुरक्षा संबंधी मामलों में भारत की भूमिका का जमकर विरोध करता है। लेकिन पिछले दिनों भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रवैया अपनाकर और बलूचिस्तान का मुद्दा उठाकर पाकिस्तान की मुश्किलें बढा दी हैं। यदि अफगानिस्तान के साथ भारत के संबंध मधुर होंगे, तो निश्चित तौर पर पाकिस्तान की मुसीबतें बढेंगीं। लेकिन भारत अमेरिका को भी नाराज करने से बचेगा।

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