भारत-अफगानिस्तान रिश्ते व एयर कॉरिडोर

अहम सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच एयर कॉरिडोर बनाने की जरूरत ही क्यों पड़ी? क्या यह सडक़ मार्ग से माल भेजने की अपेक्षा महंगा साबित नहीं होगा? क्या इस राजीनामे से भारत सरकार के खजाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा?

sajnaysharmaभारत-अफगानिस्तान के बीच माल ढुलाई के लिए एयर कॉरिडोर बनाने पर सहमति बन गई है। कॉरिडोर बन जाने पर युद्धग्रस्त अफगानिस्तान तक भारत रसद व अन्य वस्तुओं को आसानी और त्वरित गति से पहुंचा सकेगा। हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के दौरान इस राजीनामे पर अफगानिस्तान के राष्टï्रपति अशरफ गनी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दे दी है। इससे दोनों देशों के रिश्तों की डोर और मजबूत होगी। अहम सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच एयर कॉरिडोर बनाने की जरूरत ही क्यों पड़ी? क्या यह सडक़ मार्ग से माल भेजने की अपेक्षा महंगा साबित नहीं होगा? क्या इस राजीनामे से भारत सरकार के खजाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा? क्या भारत का यह फैसला देशवासियों के लिहाज से दोस्ताना कहा जा सकता है? दरअसल, इस सहमति की सार्थकता को समझने के लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलटना पड़ेगा। प्राचीनकाल से भारत की अफगानिस्तान से दोस्ती रही है। दोनों देशों के बीच संस्कृति और सभ्यता की बहुत सारी बातें साझी हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान ने आज तक ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे अंतरराष्टï्रीय स्तर पर भारत के हितों को कभी नुकसान पहुंचा हो। अलबत्ता वह कई मौकों पर भारत के साथ दृढ़ता के साथ खड़ा रहा और खड़ा है। आतंकवाद के मुद्दे पर अफगानिस्तान ने हमेशा भारत का समर्थन किया है। इस मुद्दे पर हॉर्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में अफगानिस्तान के राष्टï्रपति अब्दुल गनी ने पाकिस्तान को एक बार फिर आईना दिखा दिया। गनी ने दो टूक कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को शह दे रहा है। वह अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकवादियों को लगातार मदद पहुंचा रहा है। गनी की इस बात से विश्व के तमाम देश स्वीकार करते हैं। वहीं भारत भी पाकिस्तान को आतंक के मुद्दे पर हमेशा घेरता रहा है। भारत मानता है कि अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए आतंकवाद का खात्मा जरूरी है। एयर कॉरिडोर बनाने पर सहमति के पीछे भी पाकिस्तान की अडंग़ेबाजी है। पाकिस्तान भारत-अफगानिस्तान व्यापार समझौते के क्रियान्वयन के लिए अपनी जमीन के प्रयोग से लगातार इंकार करता रहा है। जाहिर है दोनों देशों ने इसके लिए एयर कॉरिडोर बनाने की बात मान ली। ऐसा नहीं है कि इससे पाकिस्तान को फायदा होगा, उल्टा उसे घाटा उठाना पड़ेगा। यदि पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल रसद या अन्य वस्तुओं की आपूर्ति के लिए करने देता तो उसे सीमा पर लगने वाले तमाम कर मिलते जो उसकी अर्थव्यवस्था में सहयोग ही करते। इस कॉरिडोर के बनने से भारत को भी फायदा होगा। वह सीधे अफगानिस्तान सामान पहुंचा सकेगा और वहां की जनता के दिल में अपनी जगह बना सकेगा। इससे उन आतंकवादियों के मंसूबों पर भी पानी फिर जाएगा जो अफगानिस्तान की जनता को भारत के खिलाफ हमेशा भडक़ाते रहते हैं। कुल मिलाकर यह कॉरिडोर पाकिस्तान को एक माकूल जवाब है।

Pin It