भाजपा को एक और झटका बागी विधायक नहीं डालेंगे वोट

 

  • बागी विधायक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट की शरण में
  • सुप्रीम कोर्ट ने दस मई को दी है फ्लोर टेस्ट की इजाजत
  • प्रोटेम स्पीकर की निगरानी में होगा फ्लोर टेस्ट

1114पीएम न्यूज़ नेटवर्क

देहरादून। नैनीताल हाईकोर्ट ने बागी विधायकों की याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद अब ये बागी विधायक 10 मई को होने वाले फ्लोर टेस्ट में भाग नहीं ले सकेंगे। कोर्ट के इस फैसले के बाद बागी विधायकों को बड़ा झटका लगा है। इससे कांग्रेस और हरीश रावत की सरकार को संजीवनी मिल सकती है। बागी विधायकों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट आज दोपहर सुनवाई कर रहा है।
हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर के बागी विधायकों की निलंबन के फैसले को जारी रखते हुए यह फैसला सुनाया। कांग्रेस के नौ बागी विधायकों ने विस स्पीकर के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी। इसके बाद अब विधानसभा में 62 विधायक फ्लोर टेस्ट में भाग लेंगे। कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट आज सवा दस बजे फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अदालत ने सात मई को दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। बागी विधायकों की याचिका पर नौ मई का निर्णय 10 मई को होने वाले फ्लोर टेस्ट के लिए अहम साबित होगा।
कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के मामले में हाईकोर्ट में दायर याचिका पर 7 मई को दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हो गई थी। बागी विधायकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम व दिनेश द्विवेदी ने सीएम के पत्र का हवाला देते हुए बर्खास्तगी की कार्रवाई को आधारहीन साबित करने की कोशिश की तो स्पीकर की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल व अमित सिब्बल ने वीडियो फुटेज दिखाकर नौ विधायकों के बागी होने का सबूत पेश किया था।
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता बागी विधायकों का पक्ष रखते हुए सीए सुंदरम ने 26 मार्च को मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल को दिए पत्र का हवाला दिया था, जिसमें 18 मार्च को विनियोग विधेयक का पास होना और कांग्रेस के नौ विधायकों का स्वेच्छा से पार्टी छोडऩा समेत अन्य बिंदुओं को लिखा गया है।
याची की ओर से स्पीकर की सीडी को भी पेश किया गया था। मालूम हो कि बागी विधायक सुबोध उनियाल, शैला रानी रावत, उमेश शर्मा काऊ, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, हरक सिंह रावत, अमृता रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल व प्रदीप बत्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मार्च को स्पीकर की ओर से उनकी सदस्यता को समाप्त करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
27 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी। मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्पीकर से सिफारिश की थी। हरीश रावत की याचिका पर सुनवाई के बाद स्पीकर ने सभी नौ विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए बागी विधायक

नैनीताल हाईकोर्ट के बागी विधायकों की वोट देने की याचिका खारिज किए जाने के बाद विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब बागी विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। कांग्रेस के 9 बागी विधायक अब मामले में पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आश्रित हो गए हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दस मई को फ्लोर टेस्ट की इजाजत दी थी और फ्लोर टेस्ट के दौरान राष्ट्रपति शासन हटाने की बात कही थी।

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