भगवान भरोसे राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था

बढ़ते अपराधों की वजह से मॉडर्न पुलिसिंग पर उठने लगे हैं सवाल
अपराध पर नियंत्रण लगाने की बजाय अधिकारियों को खुश करने की फिक्र

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। आम आदमी हो या खास आदमी हर व्यक्ति डरा सहमा हुआ है। शहर में बच्चे, युवा और बुजुर्ग अपराधियों के निशाने पर हैं। बेखौफ अपराधी अपहरण, हत्या, डकैती, लूटपाट, चोरी, छिनैती और अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। बदमाश खुलेआम आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर बदमाश फरार हो जाते हैं। पुलिस मामले की छानबीन करने और घटना का खुलासा करने में महीनों लगा देती है। अब बढ़ते अपराधों से लोग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।
जिले में बुजुर्ग दम्पति अपराधियों के निशाने पर हैं। लखनऊ के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बुजुर्ग दम्पतियों की हत्या की घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद पुलिस बुजुर्गों को सुरक्षा देना का दावा करती है लेकिन हकीकत में बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर कुछ भी नहीं होता है। अपराधी सम्पत्ति और लूटपाट के इरादे से बुजुर्गों को लगातार अपना शिकार बनाया जाता रहा है।
सोमवार को काकोरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत शेखपुरवा निवासी कल्लू नेता (65 वर्ष) और उनकी पत्नी फिरदौस फातिमा (45 वर्ष) की हत्या कर दी गई। जब शव से बदबू आने लगी और घर के मेन गेट के पास खून फैला दिखा, तो लोगों ने कल्लू के परिजनों को जानकारी दी। परिजनों के माध्यम से पुलिस को जानकारी मिली और हत्या की जानकारी हुई। जबकि मोहल्ले में रोजाना गश्त करने का दावा करने वाली पुलिस और उसके मुखबिर तंत्र को बुजुर्ग दम्पत्ति की हत्या की भनक तक नहीं लग पाई। जबकि मोहल्ले के लोगों को बुजुर्ग दम्पति के साथ अनहोनी की आशंका थी लेकिन पुलिसिया सवालों से बचने की वजह से लोगों ने पहल करने की कोशिश नहीं की। इसी प्रकार करीब डेढ़ महीने पहले कृष्णानगर के आजादनगर मोहल्ले में फौजी कालोनी में रहने वाले बुजुर्ग दम्पति कृष्णदत्त पाण्डेय और उनकी पत्नी माधुरी पाण्डेय की हत्या कर दी गई थी। ये दोनों भी अपने मकान में अकेले रहते थे। ऐसे में घरों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों के अंदर असुरक्षा की भावना पैदा होने लगी है। राजधानी में लोग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

एसएसपी का दावा भी फेल
लखनऊ के एसएसपी की कमान संभालते समय राजेश पांडेय ने क्राइम पर नियंत्रण लगाने का दावा किया था। इसके साथ ही राजधानी में रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा का भी भरोसा दिलाया था लेकिन राजधानी में हत्या, लूट, डकैती, रेप , अपहरण और गैंगवार की घटनाओं ने एसएसपी के दावों की पोल खोल कर रख दी है। इसके साथ ही बदमाशों में पुलिस का बिल्कुल भी खौफ नहीं रह गया। इस बात का भी पता चलता है।
आंकड़ों पर गौर करें तो लखनऊ की पुलिस ने बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर कई योजनाएं बनाईं। इन योजनाओं को लागू करने की कवायद भी कई बार की गई लेकिन सब कुछ कागजों में ही होता रहा। हकीकत में कोई भी योजना अपने मूल स्वरूप में लागू नहीं हो पाई। यही वजह है कि बुजुर्गों साथ एक के बाद एक वारदातेेंं होती रहीं। राजधानी में रहने वाले बुजुर्ग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

बुजुर्गों को कई बार निशाना बना चुके हैं बदमाश
राजधानी में बुजुर्गों की हत्या का सिलसिला पुराना है। इसके बावजूद पुलिस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करने की बजाय घटनाएं होने का इंतजार करती रहती है। आंकड़ों में बुजुर्गों के खिलाफ होने वाली घटनाओं का जिक्र कुछ यूं है..

  •  19 अक्टूबर 2011 को नाका स्थित पानदरीबा निवासी व्यवसायी केएन तनेजा की पत्नी हर्षित तनेजा की हत्या कर दी गई थी। इस मामले का पुलिस ने नवंबर 2011 में खुलासा किया तो घटना का सच सामने आया। बुजुर्ग दम्पति की हत्या उनके समधी कृष्णलाल के ड्राइवर हर्षित ने की थी।
  •  14 अप्रैल 2013 को गोमतीनगर के विपुलखंड निवासी सेवानिवृत्त बैंक कर्मी राकेश नारायन मेहरा एवं उनकी पत्नी लता मेहरा की हत्या योग गुरू ने की थी। इसका खुलासा 26 अप्रैल 2013 को पुलिस ने किया तो सच सामने आया।
  •  30 अक्टूबर 2014 को चौक थानाक्षेत्र में रहने वाले क्राकरी व्यवसायी अमित दुलानी और उनके नौकर दशरथ की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस हत्यारों की तलाश में करीबियों से लेकर पेशेवर अपराधियों तक की कुंडली खंगाली लेकिन अब तक घटना का खुलासा नहीं हो सका।
  •  01 नवम्बर 2014 को इंदिरानगर निवासी प्रोफेसर सुरेश कुमार सिंह की पत्नी कृष्णा सिंह की घर के अंदर बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस जघन्य वारदात का खुलासा अब तक नहीं हो पाया है। पुलिस हवा में ही तीर मार रही है।
  •  1 जनवरी 2015 को महानगर के विज्ञानपुरी निवासी 60 वर्षीय रिट्ज होटल मालिक ब्रम्हशंकर खन्ना उर्फ बॉबी की घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके पीछे भी सम्पत्ति का विवाद और करीबियों का हाथ बताया जा रहा है।
  •  18 अक्टूबर को चिनहट स्थित निजामपुर मल्हौर गांव निवासी 40 वर्षीय रासमगोपाल यादव की डंडे से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। वह भी अपने घर में अकेले रहते थे। इस मामले का भी खुलासा नहीं हो पाया है।
  •  27 जनवरी 2016 को आजाद नगर स्थित फौजी कॉलोनी में सेवानिवृत्त रेलकर्मी कृष्णदत्त पांडेय एवं उनकी पत्नी माधुरी पांडेय की घर के अंदर बेरहमी से हत्या कर दी गई।

सनसनीखेज वारदातों से सहमे राजधानी के लोग
प्रदेश में पुलिस विभाग के मुखिया की कमान संभालने पर जावीद अहमद ने अपराध पर नियंत्रण लगाने का दावा किया था। इसके साथ ही लापरवाह पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का भी भरोसा दिलाया था लेकिन वक्त से साथ डीजीपी के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। हालिया स्थिति यह है कि प्रदेश की राजधानी में रहने वाले लोग ही खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। यहां वीवीआईपी इलाकों में हत्या और रेप की घटनाओं को अंजाम देने में अपराधी नहीं हिचकते हैं। शहर में करीब डेढ़ महीने के अंदर गैंगवार, रेप और मर्डर की कई दुस्साहसिक घटनाएं हुईं। इसमें मुख्यमंत्री आवास से कुछ ही दूरी पर उन्नति की रेप के बाद हत्या कर दी गई। हत्यारों ने लडक़ी का शव जंगल में फेंक दिया। इसी घटना के ठीक दो दिन बाद एक और डेडबाडी मुख्यमंत्री आवास से कुछ ही दूरी पर पेड़ से लटकती मिली। इसी प्रकार विभूतिखंड में विवाहिता की हत्या कर गोमती नगर स्टेशन के पास शव फेंकना, ऐशबाग में बेरहम पिता का अपनी ढ़ाई साल की बेटी देव्यांशी और 10 माह के बेटे छोटा का गला दबाकर हत्या, निगोहां में युवती की हत्या कर शव को जंगल में फेंकना, मिठाई वाले चौराहे के पास असलहों से लैश बदमाशों का ताबड़तोड़ गोली मारकर रितेश अवस्थी की हत्या किए जाने समेत कई मामलों में अपराधियों का दुस्साहस और पुलिस की सारी योजनाएं फेल होती नजर आ रही हैं। इन सबके बावजूद पुलिस विभाग के अधिकारी अपराध को नियंत्रित बताने में जुटे हैं। इतना ही नहीं लखनऊ के पुलिस कप्तान अपराधियों पर लगाम कसने की बजाय अपनी कुर्सी बचाने की खातिर पुलिस और प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों के घर और कार्यालय का चक्कर लगाने में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में अपराधियों पर लगाम लग पायेगा। इसको लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है।

जहां तक पिछले दिनों में हुई वारदातों का सवाल है, हमने 80 प्रतिशत केस को साल्व भी किया है लेकिन इस तरह की घटनाएं होना चिन्ता का विषय है। इसको लेकर लगातार मीटिंग की जा रही है। उच्चाधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है कि जो लोग भी दोषी हैं, उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जायेगा।

दलजीत सिंह, एडीजी, कानून व्यवस्था

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