बोर्ड परीक्षाओं को लेकर डीआईओएस व प्रधानाचार्यों में मतभेद जारी

परीक्षा तिथियों में सहमति न होने पर शिक्षक और छात्र असमंजस में

शिक्षा विभाग और स्कूलों में सामजस्य न होने से छात्रों की बढ़ी मुसीबतें
प्रधानाचार्यों ने कहा, गैप होने से परीक्षा में भंग होगी छात्रों की एकाग्रता

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा की तिथि घोषित हो चुकी हैं लेकिन अभी तक परीक्षा की तैयारियां पूरी होना तो दूर अधिकतर स्कूलों में तैयारी शुरू तक नहीं हुई है। जिन स्कूलों में सेंटर निर्धारित किया गया है उनमें सीसीटीवी कैमरे लगवाने का निर्देश जारी किया गया था, जो अब तक नहीं लगी है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में होम परीक्षा को लेकर अभी तक स्कूल के शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं प्रधानाचार्यो व डीआईओएस के बीच सहमति न बन पाने के कारण शिक्षक से लेकर छात्र सभी दुविधा में हैं।
स्कूल के प्रधानाचार्य चाहते है कि होम परीक्षा 18 फरवरी से पहले करा लिए जाए ताकि बच्चों का एकाग्रता भंग न हो। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक डीआईओएस का आदेश है कि कठिन पेपर 21 मार्च के बाद कराए जाए ताकि बच्चे लम्बे अवकाश में पढ़ाई करते रहे। इन बातों पर एक मत न हो पाने के कारण जहां एक ओर परीक्षा में देरी होना तय है वहीं अगले सत्र की तिथि निर्धारण एक बड़ी चुनौती बनने की संभावना है। असल में बोर्ड की ओर से सेशन समाप्त होने की तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है। ऐसे में 31 मार्च को समाप्त हो रहे सत्र से पहले प्रिंसिपल परीक्षा समाप्त कराना चाहते है, ताकि नए सत्र की तैयारियों के लिए समय मिल जाएं। बोर्ड एग्जाम समाप्त होने के बाद केवल दस दिन का समय शेष बचेगा। इसमें संडे और होली के अवकाश भी शामिल है। स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का मानना है कि बोर्ड एग्जाम के बाद पेपर कराना, कॉपियों का मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार कर 31 मार्च से पहले देना संम्भव नहीं है। सेशन समाप्त होने के बाद रिजल्ट देना गलत होगा। केवल एक या दो जनरल विषयों को छोडक़र 21 मार्च के बाद ही पेपर कराएं जा सकते हैं।

सरकारी स्कूल अभी कैमरे से दूर
परीक्षाओं को लेकर जहां एक ओर असमंजस की स्थिति बनी हुई है वहीं सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी लगवाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग पर निर्भर है। शिक्षा विभाग को अब तक सभी स्कूलों में कैमरे लगवाने कर परीक्षा की तैयारी पूरी कर देना था, लेकिन बजट को लेकर यह मामला अभी तक लटका हुआ है।

नए सेशन को व्यवहारिक बनाएं
प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. जेपी मिश्रा का कहना है कि सेशन बदलने का नियम लागू हुआ है तो उसका पालन भी होना चाहिए। पहली अप्रैल से नया सत्र होगा और अब तक प्रवेश होने की प्रक्रिया शुरु हो जानी चाहिए थी। इसलिए 21 मार्च के बाद होली के कारण पेपर कराना व्यवहारिक नहीं है। स्कूलों के प्रिंसिपल इस बात से परेशान है। खासतौर पर उन स्कूलों के प्रिंसिपल जिनके यहां पर बोर्ड परीक्षा के लिए केन्द्र बनाए गए है।

सिर्फ महत्वपूर्ण पेपर बाद में कराएं
डीआईओएस ने आदेश जारी कर कहा है कि केवल महत्वपूर्ण पेपर 21 मार्च के बाद कराए। इससे 18 फरवरी के बाद भी छात्र पढ़ाई करते रहेंगे। अगर ऐसा न हुआ तो स्टूडेंट्स को 18 फवरी से 31 मार्च तक अवकाश मिल जाएगा। डीआईओएस उमेश त्रिपाठी का कहना है कि छात्रों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए बोर्ड ने यह नियम लागू किया हैं।

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