बैंकिंग प्रणाली में सुधार की जरूरत

आज देश में उद्योगपति विजय माल्या को बिना समुचित गारंटी के लगातार कर्ज देने पर सवाल खड़ा हो रहा है। लेकिन इन कर्जों की असलियत बैंककर्मियों की लापरवाही है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बैंकों ने वसूली की संभावनाओं पर बिना ठीक से विचार किए ही भारी कर्ज मुहैया कराया है।

sanjay sharma editor5वित्त मंत्री अरुण जेटली की यह घोषणा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के पुनर्गठन के लिए एक विशेषज्ञ समूह बनाएगी। यह बात बैंकों के कायाकल्प के प्रति उनकी पहल को बताती है। वित्त मंत्री ने कहा कि देश को अधिक बैंकों की नहीं, बल्कि मजबूत बैंकों की जरूरत है। बैंकिंग प्रणाली में अनेक स्तरों पर सुधार की जरूरत लंबे समय से महसूस हो रही है। कर्ज के रूप में बैंकों की फंसी भारी रकम, बैंकों को अपेक्षानुरूप लाभ न होना, कई बैंकों का घाटे में होना सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। ऐसे में बैंकिग क्षेत्र में सुधार की ज्यादा जरूरत है।
अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और देश के वित्तीय स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए बैंकों का मजबूत होना जरूरी है। संतोष की बात है कि सरकार ने वित्तीय परिसंपत्तियों की पुनर्संरचना और सुरक्षा, दिवालियेपन से संबंधित कानूनी पहलें की है। कर्ज वसूली के लिए ट्रिब्यूनल बनाने की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। लेकिन, इन सब उपायों के साथ बैंकों के सक्षम प्रबंधन को सुनिश्चित कराने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे। आज देश में उद्योगपति विजय माल्या को बिना समुचित गारंटी के लगातार कर्ज देने पर सवाल खड़ा हो रहा है। लेकिन इन कर्जों की असलियत बैंककर्मियों की लापरवाही है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बैंकों ने वसूली की संभावनाओं पर बिना ठीक से विचार किए ही भारी कर्ज मुहैया कराया है। हाल में आई वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में सरकारी बैंकों के प्रमुखों की आलोचना की गई है और उन्हें सार्वजनिक धन को बरबाद नहीं करने की चेतावनी दी गई है। कर्ज की वापसी तय किए बगैर ही इन बैंकों ने बहुत सारा जनता का पैसा कर्ज के तौर पर दे दिया। बैंक प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त करने की एक खास वजह यह भी है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से देश के वित्तीय बाजार में 70 फीसद हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है। खबरों के मुताबिक, पिछले दिनों बैंक प्रमुखों की बैठक में वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि देश के करदाता इस बात से नाराज हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कामकाज और प्रदर्शन बेहद निराशाजनक है। इस बैठक में रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन भी थे, जो बैंकों के प्रबंधन और प्रशासन की लचर प्रवृत्ति पर पहले भी चिंता जता चुके हैं। ऐसे में अगर बैंकिंग प्रणाली बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता से काम नहीं करेगी, तो आर्थिक समृद्धि और विकास का सपना पूरा नहीं हो सकेगा। इसके लिए बैंकों को मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही बेहतर प्रबंधन और एनपीए के जाल से छुटकारा दिलाने की भी।

Pin It