बेशर्म अफसर…

sanjay sharma editor5लोग डीजीपी से मिलने को तरस जाते थे। अगर किसी के डीजीपी से संबंध होते थे। कोई उनसे मिल लेता था तो समाज में उसकी हैसियत बढ़ जाती थी। डीजीपी हर किसी से मिलते भी नहीं थे। अब कोई भला सोच भी कैसे ले कि डीजीपी स्तर का अफसर दलालों का दोस्त हो जायेगा।

ट्रक रोक कर पचास रुपये वसूलते सिपाही को देख कर हम सबको बहुत गुस्सा आता है। मुझे भी लगता था कि किस तरह से यह पुलिस वाले खुलेआम डकैती डालते हैं। बड़े अफसर भी खुलेआम इन लोगों को गाली देते रहते हैं कि इन लोगों कि वजह से पूरे विभाग कि इमेज खराब
हो रही है।
मगर जब से यूपी के डीजीपी जैसे लोगों के कारनामे सुने हैं तब से इन सिपाहियों पर तरस आने लगा है। जब विभाग का सबसे बड़ा अफसर ही लुटेरा बन जाये तो भला नीचे वाले अफसरों की क्या औकात। यकीन ही नहीं होता कि जो शख्स संविधान की कसम खाकर नौकरी करने आये वही संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए सिर्फ पैसे की दौड़ में शामिल होते नजर आते हैं। कुछ साल पहले कोई सोच भी नहीं सकता था कि इतना बड़ा पुलिस अधिकारी कभी पैसे कमाने की सोच भी सकता है। अगर सीओ स्तर तक का अफसर भी कहीं पैसे की बात करता था तो पूरे विभाग में यह बात चर्चा का विषय बन जाती थी।
डीजीपी बहुत बड़ा नाम होता था। लोग डीजीपी से मिलने को तरस जाते थे। अगर किसी के डीजीपी से संबंध होते थे। कोई उनसे मिल लेता था तो समाज में उसकी हैसियत बढ़ जाती थी। डीजीपी हर किसी से मिलते भी नहीं थे। अब कोई भला सोच भी कैसे ले कि डीजीपी स्तर का अफसर दलालों का दोस्त हो जायेगा। डीजीपी खुद दलाल हो जायेगा इसकी तो कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। मगर अब जब हकीकत सामने आई तो सबको हैरानी के साथ इस व्यवस्था से लोगों को मानो नफरत हो गई। लगा कि अब जब पुलिस के सबसे बड़े अफसर भी खुद दलालों के साथी हो जायेंगे तो न्याय की उम्मीद भी भला किससे की जाये।
अब इन बेईमानों का क्या इलाज हो सकता है। यह अफसर जो हजारों करोड़ के मालिक बने हुए हैं क्या इसी तरह बेईमानी करते रहेंगे। लोगों को सडक़ों पर आकर खुद इन बेईमानों के दिमाग ठीक करना पड़ेगा। उन्हें समझाना पड़ेगा कि अब बेईमानों का राज ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला। इन नाकारा अफसरों को समझाना ही चाहिए कि अगर वो संविधान कि झूठी कसम खाएंगे तो उनका दिमाग इस समाज के लोग ही ठीक कर देंगे।

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