बेरोजगारों की बढ़ती फौज

श्रम क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी की श्रेणी में दुनिया के 131 देशों की सूची में भारत का 120वां स्थान है। विश्व बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसकी वजह महिलाओं के लिए अच्छे अवसरों की कमी है। देश के गांवों में रोजगार की कमी का एक बड़ा कारण लंबे समय से चल रहा कृषि संकट है।

sanjay sharma editor5युवा आबादी वाले देश में रोजगार की दरकार भी ज्यादा होती है, लेकिन देश में रोजगार की संभावनाओं की कमी इस स्थिति को भयंकर बना रही है। बेरोजगारी की स्थिति पर आया हालिया नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़े रोजगार की भयावहता को दिखाते हैं। यह चिंताजनक है। इसमें कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ी है, जबकि शहरी क्षेत्रों में रोजगार में मामूली इजाफा हुआ है। साल 2004-05 में ग्रामीण बेरोजगारी की दर 1.6 फीसदी थी, जो 2011-12 में 1.7 फीसदी हो गयी।
हालांकि, इसी अवधि में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 4.5 फीसदी से घट कर 3.4 फीसदी हो गयी है। यह भी उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 50 फीसदी लोग स्व-रोजगार में हैं। दूसरी खास बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार में महिलाओं की भागीदार साल 2004-05 से 2011-12 के बीच 12 से 14 फीसद कम हुई है।
श्रम क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी की श्रेणी में दुनिया के 131 देशों की सूची में भारत का 120वां स्थान है। विश्व बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसकी वजह महिलाओं के लिए अच्छे अवसरों की कमी है। देश के गांवों में रोजगार की कमी का एक बड़ा कारण लंबे समय से चल रहा कृषि संकट है। सर्वे में अल्पसंख्यक समुदायों के बेरोजगारी बढऩे की भी बात है।
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि बीते तीन-चार सालों में रोजगार के अवसर न के बराबर बढ़े हैं। अर्थव्यवस्था में भी आशानुरूप सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में बेरोजगारी का संकट गहराया हुआ है। सर्वे में पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए गए हैं, लेकिन मौजूदा सरकार को इस सर्वे के सभी पहलुओं पर गंभीरता से सोचने की बात कही गयी है। इसके लिए विकास की प्राथमिकताओं पर गौर करने की जरूरत है। अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए और ‘मेक इन इंडिया’’ जैसे कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए सरकार को नीतिगत समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि मौजूदा सरकार की मूलभूत आर्थिक नीतियां इन्हीं आधारों पर टिकी हैं, जिन पर पिछली सरकारें चल रही थीं। रोजगार के इच्छुक युवाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ग्रामीण आय और अवसरों में कमी के चलते लोग शहरों का रुख कर रहे हैं। बेरोजगारी की समस्या पर लगाम लगानी होगी। इसके लिए मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों में तेजी लाना होगा। रोजगार के मौके बढ़ेंगे, तो उत्पादन, आय और मांग बढ़ेगी। इन कारकों के अभाव का असर औद्योगिक और उपभोक्ता उत्पादन में कमी के साथ खुदरा मुद्रास्फीति के बढऩे में देखा जा सकता है। उम्मीद है कि सरकार आम बजट में रोजगार के मौके बनाने में गौर करेगी।

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