बेरोजगारी का संकट

दरअसल हमारे समाज में आज भी सरकारी नौकरी सुरक्षा की गारंटी मानी जाती है। लोगों को यह लगता है कि पैसे थोड़े कम ही मिलेंगे लेकिन नौकरी तो सुरक्षित रहेगी। इसी सोच के साथ पढ़े-लिखे युवा छोटी-छोटी सरकारी नौकरी के पीछे भागते हैं। यह sanjay sharma editor5सच्चाई है कि प्रदेश में बेरोजगार युवकों की संख्या बहुत ज्यादा है।

प्रदेश में बेरोजगारी का संकट दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। सरकार बेरोजगारी दूर करने के चाहे जितने दावे कर ले, पर ऐसा होता दिख नहीं रहा है। प्रदेश में पढ़े-लिखे बेरोजगारों की लंबी फौज तैयार हो गई है। इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब उत्तर प्रदेश सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी के 368 पदों के लिए 23 लाख से ज्यादा आवेदन आए। और विडंबना देखिए कि चतुर्थ श्रेणी के लिए आवेदनकर्ताओं में इंजीनियरिंग से लेकर पीएचडी धारक शामिल हैं। ऐसा नहीं है कि जितने लोगों ने आवेदन किया है वह सभी बेरोजगार हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं जो अस्थायी रूप से कहीं न कहीं काम करते हैं।
दरअसल हमारे समाज में आज भी सरकारी नौकरी सुरक्षा की गारंटी मानी जाती है। लोगों को यह लगता है कि पैसे थोड़े कम ही मिलेंगे लेकिन नौकरी तो सुरक्षित रहेगी। इसी सोच के साथ पढ़े-लिखे युवा छोटी-छोटी सरकारी नौकरी के पीछे भागते हैं। यह सच्चाई है कि प्रदेश में बेरोजगार युवकों की संख्या बहुत ज्यादा है। छोटे-छोटे काम कर लेने और कुछ पैसे कमाने से उसे रोजगार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। प्रदेश में बहुत से लोग हैं जो पढ़े-लिखे होने के बावजूद दो जून की रोटी की व्यवस्था करने में नाकाम हैं। सरकार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का दावा कर रही है पर ऐसा दिख नहीं रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में सरकार के कुछ विभागों में रिक्त पदों को भरने की कोशिश की गई लेकिन अधिकांश पर ग्रहण लग गया। कई भर्तियों पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई तो कई अभी भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। प्रदेश में 72 हजार प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की तथा 29 हजार गणित, विज्ञान के शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो पाई। कुछ भर्तियां प्रदेश सरकार की लापरवाही से तो कुछ प्रशासन की लापरवाही से लटकी हुई हैं। प्रदेश में नकल माफिया का नेटवर्क कितना मजबूत है यह किसी से छिपा नहीं है।
भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक होने की घटना तो आम बात हो गई है। जब उत्तर प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठिïत परीक्षा पीसीएस का पेपर लीक हो जा रहा है तो किसी अन्य परीक्षा से उम्मीद करना बेमानी है। भर्ती परीक्षा में पेपर लीक हो जाने से भर्ती रद्द कर दी जाती है। जिस तरीके से प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए विज्ञापन आ रहे हैं और परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है वह संदेह के घेरे में है। अधूरी तैयारी के बीच परीक्षा का आयोजन होना भी ठीक नहीं है। यदि सच में सरकार बेरोजगारी दूर करना चाहती है तो सिस्टम को दुरुस्त कर ईमानदारी व पारदर्शिता का माहौल तैयार करे।

Pin It