बेड रेस्ट पर हों तो लें खून पतला करने की दवाइयां

लखनऊ। आपरेशन के बाद यदि कोई मरीज लंबे समय तक बेडरेस्ट पर रहता है तो उसे खून पतला करने वाली दवाइयां अवश्य लेनी चाहिये, जिससे मरीज को हार्ट में थक्का बनने की समस्या से निजात मिलेगी और वह पूरी तरह से ठीक हो पायेगा।
सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में जानकारी के अभाव में डॉक्टरों की ओर से लंबे समय तक बेड रेस्ट करने वाले मरीजों को खून पतला करने वाली दवाइयं व इंजेक्शन नहीं दिया जाता जिससे उनकी जान खतरे में पड़ जाती है। यह कहना है डिवाइन हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के प्रो. एके श्रीवास्तव का। डिवाइन हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक ऐसे ही केस की ओपेन हार्ट सर्जरी कर मरीज को नया जीवन दिया है। शहर के रहने वाले मुख्तार अहमद (45)को डिवाइन अस्पताल में संास फूलने व बेहोशी की समस्या होने पर भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि मरीज के दाहिने हार्ट में के चैम्बर में कुछ खून के थक्के आ गये हैं। उसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत खून पतला करने की दवा आरंभ कर दी। इसके बाद इनकी हालते में सुधार तो हुआ लेकिन करीब 22 घंटों के बाद इको करने पर पता लगा कि खून का थक्का हार्ट की कोठरी से चलकर उसके मुख के पास तथा पल्मोनरी आरर्टी में चला गया है, जिससे मरीज करीब-करीब मौत के मुंह में चला गया था।
अब मरीज का जीवन बचाने के लिए केवल ओपेन हार्ट सर्जरी ही एक चारा था। डॉक्टरों ने मरीज के परिवार की सहमति के बाद मरीज की ओपेन हार्ट सर्जरी करने में सफलता प्राप्त की और मरीज को नया जीवन प्रदान किया। डिवाइन हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. प्रो. ए.के रीवास्तव, डॉ. पंकज श्रीवास्तव एवं डॉ. राजीव लोखटिया ने ओपेन हार्ट सर्जरी द्वारा आपेरशन करके मरीज को नया जीवन दिया।

क्या होती है पल्मोनरी इन्बोलिज्म
पल्मोनरी इन्बोलिज्म एक जानलेवा बीमारी है। इस बीमारी में हृदय की कोठरी और तथा पल्मोनरी आरर्टी में बहुत ज्यादा मात्रा में खून का थक्का जम जाता है। जिजसे मरीज मौत के कगार पर पहुंच जाता है। भारते में हर साल अइस बीमारी से करीब 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है। जिसमें जानकारी के अभाव में 90 प्रतिशत की तुरंत मौत हो जाती है। जो लोग बच जाते हैं उन्हें धीरे-धीरे हार्ट के कोठरी में तथा फेफड़ों वाली नली में उच्च रक्तचाप होता है और उन्हें जीवनभर संास फूलने की बीमारी से जूझना पड़ता है।

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