बुरा न मानो होली है…

22 March PAGE 11होली के दिन दिल खिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं, गिले शिक़वे भूल के दोस्तों, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं
जी हां, होली त्योहार की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इस दिन दुश्मन भी गले लग जाते है। कल होली है। चारों ओर होली के रंगों की धूम है और हर
किसी पर फाल्गुन का रंग चढ़ गया है। सभी अपने-अपने तरीके से होली की तैयारी में है। राजनीतिक गलियारों की भी होली चर्चा में रहती है। बीजेपी, कांग्रेस, सपा, बसपा समेत सभी राजनीतिक दल अपने-अपने अंदाज में होली के रंगों में सराबोर है। इस होली पर 4पीएम ने कुछ चुनिंदा चर्चित हस्तियों के बारे में कार्टून के माध्यम से ठिठोली की है।

नरेन्द्र मोदी

अभी साल बस दो हुए, आठ और दरकार।
दस सालों में देखना, क्या करती सरकार।।
स्वर्ग स्वयं चल आयेगा, भारत में इक रोज़।
अच्छे दिन के वास्ते, करो प्रतीक्षा यार ।।

राजनाथ सिंह
ज्योतिषियों ने है कहा, राजयोग है श्योर।
यह तो अब बतलायेगी, आने वाली भोर।।
मुझे विश्वास अटल है, सुनहरा मेरा कल है।।

अरूण जेटली
अहा! झूमें कृषक सुनकर बजट झंकार होली में,
हैं बिजनेस मैन भी खुश, खुश बड़े परिवार होली में।
अगर ‘कुछ लोग’ कर-सीमा को लेकर हैं दु:खी, तो क्या
ये ‘मध्यम वर्ग’ तो रोता ही है, हर बार होली में।।

नीतीश कुमार

गज़ब दोस्ती ‘गुरू’ हुई है।
अभी तो पार्टी ‘शुरू’ हुई है।।

अखिलेश यादव

कार्टून वाले, रहे मेरी नाक को ताक।
जितना ज़्यादा ताकते, ऊँची होती नाक।।
यही तो लोकतन्त्र है। सफलता का ये मन्त्र है।।

भागवत (आर.एस.एस.प्रमुख)

नेकर पहना बहुत दिन, अब बदलो मज़मून।
अब शाखा में हर कोई, पहनेगा पतलून।।
पहनेगा पतलून, बड़े अब हो गये बच्चे।
इसी बहाने संघी के दिन होंगे अच्छे।।
कह भगवत मन्नाम, चाल भी होगी बेहतर।
जब पहनें पतलून छोड़ कर, खाकी नेकर।।

अमित शाह

मोदी जी का इस क़दर मिला भरोसा यार।
जिसको चाहूँ चाँप दूँ, जिस पर कर दूँ बार।।
फेल हैं दिग्गज सारे। मेरे आगे बेचारे।।

मुलायम सिंह

बरसों से यू.पी. में धारणा है यह कायम।
राजनीति में कडक़, किन्तु कहलाऊँ ‘‘मुलायम’’।।
मैं अपनों को हडक़ाता।
तभी ‘‘अपना’’ कहलाता।।

संजय शर्मा

जब लोकतंत्र को छोड़ के पीछे, सब भ्रष्टïाचारी बन जाते हैं।
तब हर गतिविधि पर नजर गड़ाने ‘संजय शर्मा’ आते हैं।।
कर सकूं भले न दूर अंधेरा इस सूर्य किरन की तारों से।
फिर भी घबराए बिन हम तो, सच का ही साथ निभाते हैं॥

केजरीवाल
‘‘विज्ञापन’’ में ही सही चमक गया ये लाल।
पीठ थपथपाई स्वयं, बेमिसाल ये साल।।
‘‘बेमिसाल ये साल, उड़ाऊँ सबकी खिल्ली।
चार साल में चमका के रख दूंगा दिल्ली।।
एल.जी., राष्ट्रपति, सबको दूँगा मैं ज्ञापन।
जितनी बचत करी, उतने का दूँ ‘‘विज्ञापन’’।।

राहुल गाँधी

मम्मी अब मैं बड़ा हो गया।
तू ही देख, आज मैं अपने, पैरों के बल खड़ा हो गया।।

विजय माल्या

मिल्खा सिंह से सीख ली, देश को दिया त्याग।
जब से मिल्खा ने कहा ‘‘भाग सके तो भाग’’।
कजऱ् को मारो गोली।
पोल ब्यूरो (सीबीआई) की खोली।।

स्मृति ईरानी
छोटी-छोटी बात पर, नहीं कीजिए ग़ौर।
फ र्जी डिग्री का चलो, गुजर गया अब दौर।।
गुजर गया अब दौर, दिखाते थे जो हेठी।
उनके ही हाथों से निकली जाये अमेठी।।
महिला होने का मुझको ये लाभ मिलेगा।
अगली बार अमेठी से भी ‘कमल’ खिलेगा।

मायावती

कब होगा यह वनवास अन्त।
सखि! कब आयेगा फिर बसन्त?

लालू यादव
‘मोदी-मोदी’ सब कहैं, ‘लालू’ कहे न कोई।
जो छोरा ‘लालू कहे, मुझको तो प्रिय सोई।
मुझको तो प्रिय सोई, दिया झटका मोदी को।
घर में दो-दो मंत्री, हो बधाई रबड़ी को।।
कह लालू लठियाय, ‘नितिश’ से करी दोस्ती।
समीकरण फिट बैठ गया, घबराये मोदी।।

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