बुजुर्गों की हत्या में कहीं पुलिस तो मास्टरमाइंड नहीं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
crimeलखनऊ। बदायूं में बेटे की हत्या को लेकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे बुजुर्ग मां-बाप का संदिग्ध हालत में शव मिलते ही एक बार फिर पुलिस पर उंगली उठने लगी। शव की हालत को देखकर हर किसी के जुबान पर एक ही जुमला था कि यह हत्या है। पुलिस भी हत्या स्वीकार की। लेकिन अहम सवाल यह है कि आखिर इनकी हत्या क्यों की गई। घर में कोई लूट भी नहीं हुई थी। ऐसे में हत्यारों का मकसद सिर्फ हत्या करना ही था। यह वहीं बुजुर्ग दम्पति है। जिनके बेटे को पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर में मार गिराया था। जहां इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रहे दम्पति के कारण एक एसएसपी सहित 11 पुलिसकर्मियों पर सीबीआई मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अनुमति मांग रही थी।
यह है मामला
बता दें कि फर्जी एनकाउंटर में मारे गए बेटे मुकुल के लिए आठ साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे रिटायर इंजीनियर बृजेन्द्र गुप्ता और उनकी पत्नी सन्नी की बदायूं में उनके घर में हत्या कर दी गई। ब्रह्मापुर स्थित घर के किचन में उनके तीन दिन पुराने शव मिले। उनके शरीर पर धारदार हथियार के कई वार थे। 70 साल के दंपति की हत्या ने कई और सवालों के साथ ही उनके बेटे के फर्जी एनकाउंटर में आरोपित 11 पुलिसवालों को भी संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। आरोपितों में लखनऊ के एसएसपी रह चुके आईपीएस जे. रवींद्र गौड़ भी शामिल हैं। यह घटना 10 अपै्रल को हुई थी। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने हत्या स्वीकारते हुए जल्द पर्दाफाश करने का आश्वासन दिया था। आईजी जोन बरेली वीएस मीना व डीआईजी आरकेएस राठौर ने भी घटनास्थल का दौरा किया। बेटे शेखर की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर खुलासे के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं।
फर्जी एनकाउंटर में मुकुल को मार गिराया था पुलिसकर्मियों ने
बृजेंद्र और सन्नी का बेटा मुकुल गुप्ता बरेली की एक निजी कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर था। 30 जून 2007 को फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र के रेलवे क्रांसिंग पर तत्कालीन एएसपी, प्रशिक्षु आईपीएस जे रवींद्र गौड़ की अगुवाई में पुलिस टीम ने मुकुल को कथित मुठभेड़ में मार गिराया था। गौड़ का दावा था कि मुकुल बैंक लूटने जा रहा था। लेकिन वृद्ध दंपति का दावा था कि मुठभेड़ और पुलिस के दावे फर्जी हैं। इस उम्र में भी उनकी लड़ाई जारी थी। उनकी एक बेटी मधु बनारस में रहती है।
इन पुलिसकर्मियों को पैरवी का था डर
मुकुल के एनकाउंटर पर बृजेन्द्र ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस के दावों को चुनौती दी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने जे. रवींद्र गौड़ समेत 11 पुलिसकर्मियों पर फर्जी मुठभेड़ का केस दर्ज किया। लेकिन पहले पुलिस फिर सीबी.सीआईडी ने जांच में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। बृजेंद्र फिर कोर्ट गए। हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच संभाली। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए एक आरोपित सिपाही को जेल भेज दिया और आईपीएस गौड़ समेत अन्य पुलिसवालों के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए शासन से अनुमति मांगी। लेकिन सरकार ने अनुमति नहीं दी। सीबीआई ने अभियोजन स्वीकृति के लिए सरकार को तीन बार रिमाइंडर भेजे लेकिन अनुमति नहीं मिली। हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस शशिकांत की बेंच ने फर्जी मुठभेड़ की सीबीआई रिपोर्ट की अनदेखी कर अभियोजन की अनुमति न देने पर प्रदेश सरकार पर 50 हजार रुपए का हर्जाना भी जून 2014 में लगाया था। लेकिन सरकार ने अपना रुख नहीं बदला। श्री गौड राजधानी के एसएसपी भी रह चुके है। वर्तमान में वह अलीगढ़ एसएसपी के पद पर तैनात है।
क्या कहते है एडीजी लॉ एंड ऑर्डर
इस संदर्भ में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर मुकुल गोयल ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। जल्द ही पर्दाफाश होगा। जबकि एसपी के मुताबिक ब्लाइंड केस है, पुलिस टीमें बना दी गई हैं। जल्द ही पर्दाफाश होगा।

हॉस्टल में हुआ बवाल
लखनऊ। एलयू के न्यू कैम्पस में एमबीए के छात्र और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के साथ बिजली बनाने को लेकर मारपीट हुर्ह है। जिसमें हास्टल के छात्रों ने बीच बचाव कर मामले को रफा दफा किया।
जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय के एमबीए के छात्र के कमरे में दो दिन से लाइट नहीं थी जिसकी शिकायत उसने छात्रावास के वार्डन से की थी। उसके बाद भी कमरे की लाइट नहीं बनी। जिसकी वजह से छात्र दो दिन से अंधेरे कमरे में रहने को मजबूर था। मंगलवार को दोबारा छात्र ने जब कमरे की लाइट बनाने के लिये कहा तो छुट्टïी के कारण कर्मचारी ने लाईट बनाने में असमर्थता जताई। जिसपर गुस्साये छात्र ने कर्मचारी के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। यह मामला देख वहां मौजूद छात्रों ने बीच बचाव किया जिस पर मामला शांत हो सका।

नोटिस के बाद भी दागी स्कूल ले रहे दाखिला
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान घोषित दागी स्कूलों को बीएसए ने नोटिस जारी कर बंद करने का निर्देश दिया गया था। बीएसए ने इन स्कूलों को बंद न करने पर एक दिन के हिसाब से एक हजार से एक लाख रुपय तक का जुर्माना लगाया है। इस वजह से अब तक बीस हजार छात्रों का भविष्य अधर में है।
बोर्ड परीक्षा के दौरान दागी पाये जाने वाले लगभग आधा दर्जन से भी ज्यादा स्कूलों को बीएसए ने नोटिस जारी कर बंद करने का निर्देश जारी किया था। इन स्कूलों में फर्जी प्रवेश से लेकर नकल जैसी सारी धांधलियां पैसे के बल पर होती रहती हैं। इन सभी स्कूलों को कई बार ब्लैक लिस्टेड किया जा चुका था। उसके बाद भी यह स्कूल प्रवेश जारी रखते थे। बाद में उन्हीं बच्चों के भविष्य की दुहाई देकर स्कूलों की मान्यता को बचा लेते थे। इन सब के पीछे शिक्षा विभाग की लापरवाही का नतीजा हैं जिसके कारण राजधानी में लगभग ढाई सौ बिना मान्यता प्राप्त स्कूल चला रहे हैं। ऐसे स्कूलों को बीएसए से भेजे गयी नोटिस का भी कोई असर नहीं हो रहा है। यह स्कूल बिना किसी डर के बड़ी संख्या में छात्रों का प्रवेश ले रहे हंै। अब तक के आकड़ों के हिसाब से सभी स्कूलों को मिला कर लगभग बीस हजार छात्रों का भविष्य अधर मे है। बीएसए अब तक केवल इन्हें चेतावनी या जुर्माने की धमकी दे रहा है। सारी सच्चाई जानने के बाद भी बीएसए इस पर कोई कठोर कदम नही उठा रहा है। यह सोचने का विषय है कि क्या बीएसए फिर से इन स्कूलों की कमियों को नजर अंदाज करने की तो योजना नही बना रहे हैं।

Pin It