बुखार में लापरवाही है खतरनाक

कुशीनगर में दिमागी बुखार से ग्रसित 12 बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती
राजधानी के सरकारी अस्पताल बीमारी से निपटने के लिए तैयार

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । बारिश का मौसम शुरु होते ही पूर्वांचल में इंसेफ्लाइटिस के मामले आने लगे है। कुशीनगर के जिला अस्पताल में बीमारी से ग्रसित 12 बच्चों को भर्ती कराया गया है, ऐसे में राजधानी के अस्पताल भी इंसेफ्लाइटिस को लेकर अलर्ट हो गये हैं। साथ ही अस्पतालों में बुखार के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। डाक्टर का मानना है कि सामान्य बुखार को भी हल्के में न ले, क्योंकि इंसेफ्लाइटिस की शुरूआत भी सामान्य बुखार से ही होती है।
पिछले महीने सिविल अस्पताल में बाल स्वास्थ्य पोषण माह के उद्घाटन के मौके पर स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने भी पूर्वांचल में इंसेफ्लाइटिस बीमारी से बचने के लिए पूर्वांचल में जबर्दस्त रूप से टीकाकरण अभियान की शुरूआत की थी।
बढ़ रहे हैं बुखार के मरीज
राजधानी के अस्पतालों में बुखार के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। सिविल, अस्पताल व लोहिया अस्पताल में रोजाना करीब 600 मरीज बुखार के आ रहे हैं, जिसमें तमाम मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। सिविल अस्पताल के ईएमओ डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि शुरूआत में जेई के लक्ष्ण सामान्य बुखार की तरह होते हैं। बाद में यह ज्यादा खतरनाक हो जाता है। इसलिए बुखार आने पर डॉक्टर को जरूर दिखायें।
झोलाछाप के चक्कर में न पड़े
सिविल अस्पताल के चिकित्साअधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे ने बताया कि बुखार आने पर झाोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में न पड़े। किसी योग्य डॉक्टर को दिखायें और बिल्कुल लापरवाही न करें।

वर्ष 2014 में हुई मौतें
वर्ष 2014 में इस बीमारी की वजह से देश भर में 550 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे। स्वास्थ्य स्वास्थय विशेषज्ञों का मानना है कि देश भर में 70 मिलियन से ज्यादा बच्चों को इसका खतरा है। उत्तर प्रदेश में इस बीमारी से 104 लोगों की मौत हुई थी, वहीं बिहार में 162, पश्चिम बंगाल में 117, असम में 165 लोग इस बीमारी की कहर की चपेट में आये थे। इसके साथ ही हजारों की संख्या में लोग शारीरिक और मानसिक विकलांगता का दंश झेल रहे हैं।

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