बीमारी से परेशान मां बाप ने बच्चों के लिए मांगी इच्छा मृत्यु

राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बच्चों का इलाज करवाएं या इन्हें मौत देने की अनुमति दें। वहीं पिता नजीर ने बताया कि उसे डर है कि बच्चों की हालत मुंबई की केईएम हॉस्पिटल की नर्स अरुणा की तरह न हो जाए। धीरे-धीरे बच्चे किसी तरह का काम करने की स्थिति में नहीं रह चुके हैं।
-आगरा 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureआगरा। आगरा के गालिबपुरा में छह बच्चों की बीमारी से परेशान मां-बाप ने राष्ट्रपति से बच्चों के इलाज या उनकी इच्छा मृत्यु की मांग की है। इन बच्चों को कैनवैन नामक बीमारी है। एक ही परिवार के ये बच्चे न तो चल पाते हैं और न ही खड़े हो पाते हैं। दूसरी ओर उन्हें न तो सरकारी मदद मिल रही है और न ही सामाजिक रूप से सहयोग। ऐसे में परेशान बच्चों के साथ परिजन शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और एडिशनल सिटी मजिस्ट्रेट (एसीएम) अतुल कुमार के सामने सारे बच्चों की इच्छा मृत्यु की मांग की।
उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। इसमें बच्चों का जल्द इलाज कराने या उनकी इच्छा मृत्यु की मांग की है। आगरा के गालिबपुरा निवासी मोहम्मद नजीर की शादी साल 1995 में तबस्सुम के साथ हुई थी। इसके बाद हर आम इंसान की तरह उन्होंने भी अपना परिवार बढ़ाया। पहला बेटा होने के बाद घर में खुशियां आईं। दो साल बाद इनकी दूसरी औलाद सुलेम ने जन्म लिया। यहीं से परिवार के लिए संकट का समय शुरू हो गया। बच्चे जन्म के समय हृष्ट-पुष्ट थे लेकिन उम्र बढऩे के साथ साथ उनकी हड्डियां कमजोर होने लगीं। मेडिकल रिपोर्ट में भी कोई बीमारी नहीं निकलती थी। धीरे-धीरे कर नजीर और तबस्सुम के 8 बच्चे हो गए, जिसमें से छह ऐसी बीमारी से पीडि़त हैं।
पांच लाख रुपए खर्च कर चुका है परिवार
हलवाई की दुकान पर नौकरी करने वाले नजीर ने सुलेम को दिल्ली एम्स में भी दिखाया, लेकिन पैसों की तंगी की वजह से वह वापस आगरा लौट आए। यहां उन्होंने कई बार झोलाछाप डॉक्टरों, बंगाली बाबा और पंडित के झांसे में भी फंसे। जिला प्रशासन से मदद मांगी तो मेडिकल कॉलेज में भेज दिया गया लेकिन यहां भी इलाज में बच्चों के माता-पिता को संतुष्टि नहीं हुई। अब तक इलाज में यह परिवार लगभग पांच लाख रुपए से अधिक खर्च कर चुका है।
क्या कहते हैं मां-बाप
बच्चों की मां तबस्सुम ने कहा कि बच्चों की हालत देखकर लगता है कि खुद मर जाऊं या बच्चों को मार दूं लेकिन मैं मां हूं इसलिए ऐसा कर भी नहीं सकती। अब राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बच्चों का इलाज करवाएं या इन्हें मौत देने की अनुमति दें। वहीं पिता नजीर ने बताया कि उसे डर है कि बच्चों की हालत मुंबई की केईएम हॉस्पिटल की नर्स अरुणा की तरह न हो जाए। धीरे-धीरे बच्चे किसी तरह का काम करने की स्थिति में नहीं रह चुके हैं।

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