बीबीएयू में शो पीस साबित हो रहे वाश बेसिन हाथ धुलने के लिए नहीं मिलता पानी

  • विश्वविद्यालय को खूबसूरत बनाने के लिए किए जा रहे जतन, बेसिक समस्याओं पर नहीं जा रहा ध्यान 
  • साफ-सफाई से नहीं है सरोकार, फ्री इंटरनेट सेवा बताया जरूरी
  • छात्रों द्वारा कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के जिम्मेदार विश्वविद्यालय में छात्रों को सारी सुविधा देने के दावे करते नहीं थकते, पर हकीकत तो इससे कोसों दूर है। इन दावों की वास्तविकता स्कूल ऑफ अम्बेडकर स्टडीज डिपार्टमेंट के केवल वाशरूम को ही देखकर लगाया जा सकता है। यहां वाश बेसिन तो लगी है पर उसमें टेप ही नहीं लगा है। इसके लिए छात्राओं से लेकर शिक्षक तक कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन इसे ठीक नहीं कराया गया।
बीबीएयू प्रशासन विवि की साज-सज्जा पर ध्यान देने में इतना डूब चुका है कि उन्हें छात्रों की बेसिक जरूरतें याद नहीं हैं। शायद इसीलिए वाशरूम में पानी का इंतजाम नहीं है। वाशरूम में पानी कितना जरूरी है यह बताने की जरूरत नहीं है। विवि में छह-छह घंटे छात्र-छात्राएं व शिक्षक रहते हैं। वाशरूम में पानी न होने की शिकायत कई बार छात्र से लेकर शिक्षक कर चुके हैं लेकिन इसे ठीक कराने की जरूरत महसूस नहीं की गई। विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों का कहना है कि हम अपने यहां छात्रों की सुविधा का पूरा ध्यान रखते हैं। वहीं कई छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारी सुविधाओं का ध्यान रखना तो दूर की बात है, जब हम लोग किसी समस्या की शिकायत लेकर जाते हैं तो सुनवाई नहीं की जाती है। स्वच्छता से जुड़ी देश में कई योजनाएं संचालित की गई हैं। सभी यह जानते हैं हाथ धुले बगैर कुछ खाना नहीं चाहिए। शायद यह बात विवि प्रशासन को नहीं पता है। विवि प्रशासन शायद इसीलिए इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा। स्कूल ऑफ अम्बेडकर स्टडीज डिपार्टमेंट में पहले से लेकर तीसरे फ्लोर तक अधिकतर वाशरूम में वाश बेसिन तो लगा रखा है मगर टैप नहीं है, जिससे छात्राओं को हैंड वाश करने के लिए परेशान होना पड़ता है। ऐसा ही असुविधा का सामना वहां के शिक्षकों को भी करना पड़ता है।
शो पीस बने वाश बेसिन
स्कूल ऑफ अम्बेडकर स्टडीज डिपार्टमेंट में ग्राउंड फ्लोर से लेकर थर्ड फ्लोर तक लेडीज हो या जेंट्ïस, दोनों ही वाशरूम में बिना टैप के बेसिन लगी तो है लेकिन केवल शो पीस ही है। पानी न होने के कारण यह वाश बेसिन शो पीस की तरह ही है, जिसका कोई इस्तेमाल नहीं है।
स्वीपर हैं परेशान, शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं
वाशरूम में पानी का इंतजाम न होने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को होती है। कर्मचारियों का कहना है कि हम लोगों को बहुत परेशानी होती है। वाश रूम साफ करने के लिए दूसरी जगह से पानी ढोकर लाना पड़ता है। यहां के वॉश रूम की सारी नालियां चोक हैं जिसके कारण पानी भर जाता है। इस कारण दिन भर में कई बार सफाई करनी पड़ती है। कई बार इसकी शिकायत की है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
अधिकांश वाशरूम में लगा रहता है ताला
विभाग के आधिकतर महिला वाशरूम में ताला लगा रहता है। एक छात्रा का कहना है कि मेरी क्लास सेकेण्ड फ्लोर पर चलती है। हम लोगों को वाशरूम यूज करने के लिए फस्ट या थर्ड फ्लोर पर जाना पड़ता है। कभी-कभी वहां भी ताला जड़ दिया जाता है तो हम लोगों को जेंट्ïस वाशरूम का इस्तेमाल करना पड़ता है। वहीं हैंड वाश करने के लिए पानी तक नहीं होता। हैंड वाश करने के लिए हम लोगों को पीने के पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है।
देते हैं फ्री इंटरनेट, वाशबेसिन में पानी न होना बड़ी बात नहीं
इस संबंध में विवि प्रशासन के जिम्मेदार व्यक्ति से बात की गई तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर ढेर सारे तर्क दे डाले। उनका कहना था कि टॉयलेट रूम में पानी आता है। वाश बेसिन में नहीं आता तो बड़ी बात नहीं है। इतना ही नहीं वो अपनी व्यवस्थाओं का गुणगान करते हुए बोले कि हमने तो अपने यहां के छात्रों को फ्री इंटरनेट सुविधा दे रखी है। ऐसी सुविधा कौन देता है। यहां पानी की जरूरत को इंटरनेट की सुविधा देकर पूरी की जा रही है। हालांकि उन्होंने जल्द ही इस समस्या को दूर करने का आश्वासन दिया।

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