बीबीएयू में छात्रों से हो रही है वसूली

शिकायत करने पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड विवि से निकालने की देता है धमकी
छात्रों ने की कुलानुशासक के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ। बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में छात्रों और प्रॉक्टर टीम में मतभेद बढ़ता ही जा रहा है। कभी छात्रों से चालान के रूप में तो कभी फोटो कॉपी के नाम पर 200 से 300 रुपये वसूले जा रहे हैं। इस बात को लेकर छात्रों ने कई बार विवि प्रशासन से शिकायत भी की है पर विवि में प्रॉक्टर और छात्रों के बीच तनाव इतना बढ़ गया है कि छात्रों ने कुलानुशासक के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है।
उनका आरोप है कि प्रॉक्टर द्वारा खुलेआम वसूली की जा रही है। यही नहीं छात्रों से हर बात के लिए शुल्क के नाम पर पैसे लिए जाते हैं। विवि में कहीं भी पार्किंग जोन नहीं है फिर भी उनसे पार्किंग के नाम पर 200 से 300 रुपये तक वसूले जा रहे हैं और परिसर में कहीं भी गाड़ी खड़ी करने पर उसका चालान कर दिया जाता है। चालान के नाम पर पैसे तो वसूले जाते हैं लेकिन उसकी कोई रसीद नहीं दी जाती है। इसका भी कोई कायदा कानून नहीं है। अलग-अलग छात्रों से अलग-अलग शुल्क लिया जाता है।

परिसर में दोगुनी कीमत पर बेची जा रहीं खाद्य वस्तुएं
परिसर में चीजें दोगुनी कीमत पर बेची जा रही हैं। फिर चाहे वह खाने-पीने की कोई वस्तु हो या स्टेशनरी। सभी वस्तुएं दोगुनी दाम पर छात्रों को दी जाती हैं।

पैसे वसूलने के लिए नहीं लगा पार्किंग जोन का बोर्ड!
विवि के छात्रों का आरोप है कि परिसर में पर्याप्त जगह है, विवि प्रशासन यहां एक स्थान पार्किंग के लिए नियत कर सकता है, पर ऐसी कोर्ई सुविधा न होने की वजह से छात्र इधर-उधर गाडिय़ां खड़ी कर देते हैं। जिम्मेदार इसी बात का फायदा उठाकर छात्रों से पैसे की वसूली करते हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसी आमदनी के लिए न तो पार्किंग जोन बनाया गया है और न ही बोर्ड लगाया गया है। जब भी छात्र इसकी शिकायत करने के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड के पास जाते हैं तो समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें कॉलेज से निकालने की धमकी दी जाती है। छात्रों का कहना है कि इस बात की शिकायत उन लोगों ने विवि प्रशासन से की है लेकिन अब तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। सबसे अधिक समस्या हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को होती है, क्योंकि उन्हें चालान व अन्य नियमों के रूप में मांगे गए पैसे अपने घर से मंगा कर देने पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में रसीद न मिलने पर परिवार वालों को यकीन दिलाने में छात्रों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इस संबंध में पूछे जाने पर विवि प्रशासन ने अपनी ओर से कोई स्पष्टïीकरण नहीं दिया।

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