बीफ के बहाने सियासत

हमारे देश में आंखों देखी चीज पर कम यकीन किया जाता है। अफवाहों पर लोग जल्दी विश्वास कर लेते हैं। इतिहास गवाह है कि अराजक तत्वों ने अफवाह फैलाकर देश में बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है। दूर जाने की जरूरत नहीं। मुजफ्फरनगर दंगों में भी अफवाहों का बड़ा योगदान रहा है।

sanjay sharma editor52 अक्टूबर को दादरी में बीफ खाने की अफवाह पर अखलाक नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। तब से शुरू हुआ बीफ पर बवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बीफ को लेकर बयानबाजी का दौर थमता है तो कहीं कुछ ऐसा मामला आ जाता है कि बीफ मुद्दा बन जाता है। अब नया विवाद दिल्ली के केरल हाउस की कैंटीन में गोमांस परोसे जाने की शिकायत का है। हिंदू सेना के किसी कार्यकर्ता ने पुलिस को फोन पर शिकायत की कि केरल हाउस के कैंटीन में बीफ परोसा जा रहा है। शिकायत पर 20 पुलिसवाले वहां पहुंचे और कैंटीन वालों से पूछताछ की। इस पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली पुलिस बीजेपी सेना की तरह बर्ताव कर रही है। इस बीच केरल सरकार ने दिल्ली के केरल भवन में गोमांस करी परोसे जाने के दावे को खारिज कर दिया और कहा कि कार्यकर्ताओं द्वारा बिना अनुमति प्रवेश किए जाने को लेकर पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई गई है।
मुख्य सचिव जिजि थॉमसन ने पत्रकारों से कहा, मैं इस बात से पूरी तरह इंकार करता हूं कि यहां (केरल भवन) गोमांस परोसा जाता है। यहां केवल भैंस का मांस ही परोसा जाता है। हालांकि कल की घटना के बाद केरल भवन से अस्थायी रूप से भैंस के मांस को खाद्य सूची से हटा लिया गया है। इन सब घटनाओं को देखकर तो यही लगता है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है। आए दिन कहीं न कहीं ऐसी खबरों को हवा देकर इस मुद्दे को जिंदा किया जा रहा है ताकि देश का माहौल खराब किया जा सके। निश्चित ही कुछ मुठ्ठïी भर अराजक तत्व ऐसी झूठी खबरों को हवा देकर देश का अमन-चैन बिगाडऩे में लगे हैं। और सबसे दुखद पहलू है कि अधिकांश लोग ऐसी भ्रामक खबरों पर विश्वास भी कर लेते हैं। बिना जांच-पड़ताल के अन्य लोगों द्वारा कही गई बातों पर विश्वास कर अपनी राय देने लगते हैं और भ्रामक खबरों पर यकीन कर कार्रवाई करने दौड़ पड़ते हैं। हमारे देश में आंखों देखी चीज पर कम यकीन किया जाता है। अफवाहों पर लोग जल्दी विश्वास कर लेते हैं। इतिहास गवाह है कि अराजक तत्वों ने अफवाह फैलाकर देश में बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है। दूर जाने की जरूरत नहीं। मुजफ्फरनगर दंगों में भी अफवाहों का बड़ा योगदान रहा है। अफवाहों पर विश्वास कर लोग अपनों के खून के प्यासे बन गए थे। अफवाहों पर पहले भी लोग विश्वास करते थे और आज भी करते हैं। इस समय कुछ अराजक तत्व बीफ की अफवाह फैलाकर अपने मंसूबे कामयाब करने की कोशिश में लगे हुए हैं। हमारी-आपकी जिम्मेदारी है कि ऐसी खबरों पर ध्यान न देकर अपनी सूझ-बूझ से अराजक तत्वों के मंसूबों को कामयाब न होने दें।

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