बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है सीएम उम्मीदवार को लेकर खेमेबंदी

  • मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम पर भाजपा हाईकमान की चुप्पी हो सकती है खतरनाक
  • प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में समर्थक कर रहे जोरदार प्रदर्शन

9 JUNE PAGE1a1प्रभात तिवारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से सीएम उम्मीदवार के नाम पर भाजपा हाईकमान की चुप्पी खतरनाक साबित हो सकती है। सूबे में स्मृति ईरानी, योगी आदित्यनाथ, वरुण गांधी और कल्याण सिंह को उम्मीदवार बनाने की मांग अलग-अलग क्षेत्रों से लगातार की जा रही है। सोशल मीडिया पर भी चारों नामों को लेकर तरह-तरह की कैम्पेङ्क्षनग की जा रही है। बुधवार की सुबह इलाहाबाद में एबीवीपी के लोगों ने वरूण गांधी को भाजपा की तरफ से सीएम उम्मीदवार घोषित करने की मांग करते हुए रामबाग स्टेशन पर ट्रेन रोक दी। इससे काफी देर तक दर्जनों ट्रेनों का आवागमन वाधित रहा। जनता को तमाम तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ऐसे में खुद को जनता का हितैषी बताने की कोशिश में जुटी भाजपा को लेकर लोगों में नाराजगी का माहौल पैदा हो रहा है। जो पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 जून को इलाहाबाद में आयोजित विशाल जनसभा में मुख्य अतिथि के तौर पर आने वाले हैं। भाजपा की कोर कमेटी के जुड़े सभी नेताओं का ध्यान इलाहाबाद पर लगा हुआ है। चूंकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या खुद भी इलाहाबाद से हैं। इसलिए उनका प्रयास है कि इलाहाबाद में होने वाली भाजपा की रैली को यादगार बनाया जाए। इलाहाबाद, फूलपुर, सोरांव और करछना समेत आसपास के क्षेत्रों में कुर्मी वोट बैंक सबसे अधिक है। इन वोटरों को साधने के मकसद से ही पार्टी हाईकमान ने केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और यूपी में चुनाव प्रभारी के रूप में कल्याण सिंह को सामने लाने की चर्चाएं भी चल रही हैं। इसलिए भाजपा नेताओं में वर्तमान समय में जितने भी नेताओं का नाम चर्चा में है, उनमें कल्याण सिंह को सबसे अधिक पसंद किया जाता है। कल्याण सिंह के बहाने पार्टी कुर्मी वोट बैंक के अलावा अध्योध्या मंदिर के मुद्दे पर भी जनता का समर्थन हासिल करने की योजना बना रही है। वहीं पूर्वांचल में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले योगी आदित्यनाथ भी सीएम उम्मीदवार के लिए प्रबल दावेदारी कर रहे हैं। उनके समर्थकों ने स्मृति ईरानी के खिलाफ गोरखपुर में नारेबाजी करके माहौल को और अधिक पेंचीदा कर दिया। दरअसल स्मृति ईरानी को मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का करीबी माना जाता है। ऐसी चर्चा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में स्मृति को सीएम उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इसलिए गोरखपुर विश्वविद्यालय के दो दिवसीय कार्यक्रम में पहुंची स्मृति के खिलाफ स्मृति ईरानी वापस जाओ के नारे लगाए गए। मतलब साफ था कि योगी के समर्थन यूपी में किसी और को सीएम के रूप में देखना नहीं चाहते हैं।
यूपी में सीएम पद के उम्मीदवार को लेकर पार्टी में तेजी से बढ़ रही खेमेबंदी खतरनाक है। जिस तरह सीएम उम्मीदवार के रूप में चार नेताओं के इर्द-गिर्द समर्थकों का जमावड़ा और उनके माध्यम से पार्टी पर दबाव डालने की कोशिश की जा रही है, वह पार्टी की एकजुटता के लिए खतरनाक है। ऐसे में पार्टी हाईकमान को सीएम पद के उम्मीदवार का नाम जल्द से जल्द घोषित करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो पार्टी के समर्थकों में भ्रम की स्थिति पैदा होगी। इतना ही नहीं पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में अपने ही लोगों से सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका भी है।

वरूण को सीएम उम्मीदवार बनाने के लिए हुआ प्रदर्शन

वरूण गांधी को भाजपा का फायर ब्रांड नेता माना जाता है। वह युवाओं में अच्छे-खासे लोकप्रिय माने जाते हैं। इसी वजह से एबीवीपी से जुड़े छात्र नेताओं की तरफ से वरूण गांधी को सीएम उम्मीदवार बनाने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं बरेली, बदायूं और पीलीभीत क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ता भी वरूण गांधी का समर्थन कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस की तरफ से प्रियंका या राहुल को यूपी में सीएम उम्मीदवार के रूप में घोषित किया जाता है, तो वरूण गांधी के माध्यम से कांग्रेस के वोट बैंक को काफी हद तक कमजोर किया जा सकता है। ऐसे में नेहरू की जन्मस्थली से वरूण गांधी को सीएम पद का उम्मीदवार बनाने की मांग को लेकर छात्र संगठन का प्रदर्शन पार्टी के लिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। इतना ही नहीं इलाहाबाद के प्रतियोगी छात्र भी भाजपा सरकार से सिविल सेवा की निष्पक्ष जांच कराने में हीलाहवाली को लेकर काफी नाराज हैं। इसलिए वह नरेन्द्र मोदी के इलाहाबाद दौरे पर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।

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