बिहार चुनाव… दांव पर दिग्गजों की प्रतिष्ठïा

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को जीत मिलती है तो निश्चित ही 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा का मनोबल बढ़ेगा। यह तो हो गई एनडीए की बात। बिहार के दिग्गज लालू और नितीश को भी इस चुनाव से बड़ी उम्मीद है।

sanjay sharma editor5बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तिथियों का एलान कर दिया गया। तिथि निर्धारित होने के बाद चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। हालांकि सूबे में चुनावी तैयारी दो-तीन माह पहले से दिख रही थी। प्रधानमंत्री बिहार में चार बड़ी रैली कर आए। नितीश-लालू लगातार जनता से रूबरू हो रहे हैं। चुनाव को लेकर सभी दलों के तैयारी जोरों से चल रही थी बस सबको मतदान तिथि की घोषणा का इंतजार था। फिलहाल पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार का चुनाव कई मायने में खास है। बिहार विधानसभा चुनाव ही देश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करेंगे। इस चुनाव में कई बड़े-बड़े दिग्गजों की प्रतिष्ठïा दांव पर लगी है। कल के राजनीतिक दोस्त आज के राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं और प्रतिद्वंदी दोस्त हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर लड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बिहार विधानसभा चुनाव कई मायने में अहम है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली जबरदस्त जीत के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद विरोधी दलों ने दिल्ली चुनाव नतीजों के बाद उन पर जमकर हमला बोला था। कांग्रेस समेत अन्य विरोधी दलों ने भाजपा पर जनता को ठगने का आरोप लगाया था और कहा कि मोदी लहर खत्म हो गई है। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को जीत मिलती है तो निश्चित ही 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा का मनोबल बढ़ेगा। यह तो हो गई एनडीए की बात। बिहार के दिग्गज लालू और नितीश को भी इस चुनाव से बड़ी उम्मीद है। एनडीए को परास्त करने के लिए ही बिहार में जनता परिवार का गठन किया गया। राजनैतिक प्रतिद्वंदी रहे नितीश और लालू गले मिल गए। यह मिलन कल्पना से परे था। इस स्थिति में विधानसभा चुनाव इन दोनों के लिए भी बहुत अहम है। लंबे समय तक बिहार में शासन कर चुके राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के लिए भी बिहार विस चुनाव के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने नितीश को अपना नेता मान लिया।
लगातार दो चुनावों में मिली हार के बाद से ही राजद को अपनी शाख बचाने के लिए इस बार का विस चुनाव बेहद अहम है। परिवारवाद के आरोपों से घिरे लालू प्रसाद ने इस बार नीतीश कुमार के साथ हाथ मिलाकर भाजपा को सूबे से बाहर निकालने का एलान किया है। राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो इस चुनाव के दौरान लालू-राबड़ी खुद से ज्यादा अपने बेटे-बेटियों के लिए राजनीतिक मंच तैयार करने में जुटे हैं। इस लिहाज से राजद प्रमुख के लिए यह चुनाव अहम है। बिहार विधानसभा चुनाव मुलायम सिंह के लिए भी प्रतिष्ठïा का विषय बन गया है। मात्र पांच सीट मिलने के कारण मुलायम ने जनता परिवार से नाता तोड़ अकेले दम पर बिहार में सभी सीटों पर चुनाव लडऩे का एलान कर दिया। सपा के राष्टï्रीय प्रवक्ता प्रो. राम गोपाल यादव ने तो यह तक कहा कि जितनी सीटें हमें दी जा रही है, हम उससे ज्यादा सीटें जीत सकते हैं। कौन कितनी सीटें जीतेगा यह तो वक्त बताएगा लेकिन यह तो तय है कि बिहार विधान सभा चुनाव जंग का मैदान बन गया है।

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