बिहार के बाद तमिलनाडु में मदिराबंदी

पुरुषों में बढ़ती हुई मद्यपान की प्रवृत्ति के कारण निम्न एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाएं पारिवारिक हिंसा मारपीट की शिकार होती रही थीं इसलिए बिहार में मदिराबंदी से महिला वर्ग में सबसे अधिक खुशी है। किन्तु दूसरी ओर दुखी होने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है।

डॉ. हनुमंत यादव
बिहार में मदिराबंदी लागू किए जाने पर मिले व्यापक जनसमर्थन से उत्साहित होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में मदिराबन्दी से नयी सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद रखी दी गई है और सामाजिक परिवर्तन के लिए पूरा वातावरण तैयार हो रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस बात का श्रेय दिया जाना चाहिए कि अक्टूबर 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के समय महिलाओं से किए गए वादे को उन्होंने चुनाव जीतने के 5 महीने के अन्दर पूरा कर दिया। बिहार में 1 अप्रैल से देशी मदिरा तथा 5 अप्रैल से भारत में बनाई गई विदेशी मदिरा की बिक्री एवं खरीदी पर पाबन्दी लागू कर दी गई है। मदिराबन्दी लागू करने के पहले मुख्यमंत्री को इससे जुड़ी समस्याओं जैसे कि राज्य उत्पाद शुल्क से प्राप्त होने वाली लगभग 4000 करोड़ रुपए सालाना राजस्व की क्षति, पूर्व में बिहार सहित अन्य राज्यों में की गई मदिराबन्दी की असफलताएं, मदिराबन्दी के बाद दूसरे राज्यों से तस्करी व अवैध मदिरा कारोबार, आदतन मदिरापान करने वालों की समस्याओं के बारे में भलीभंाति जानकारी थी। इसीलिए उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद ही मदिराबंदी से संबंधित सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करवाया। उसके बाद सभी पहलुओं को बिहार एक्साइज एमेंडमेंट एक्ट-2016 में शामिल करते हुए मदिराबंदी को कानूनी जामा पहनाया, जिसमें उन्हें सभी राजनैतिक दलों का समर्थन भी प्राप्त हुआ।
बिहार सरकार मदिराबन्दी सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के कदम उठा रही है। मदिरापान के आदी लोगों की लत छुड़ाने लिए भी योजना बनाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी जिलों में 50 बिस्तरों वाला नशा मुक्तिकेन्द्र खोलने की योजना है। इन केंद्रों में प्रशिक्षित डॉक्टर तैनात किए जाएंगे। इन केन्द्रों पर जरूरी दवाओं के साथ-साथ परामर्श की व्यवस्था भी रहेगी। अवैध रूप बनाई गई मदिरापान करने वाले की मौत होने पर मदिरा बनाने वाले और बेचने वाले दोनों के लिए मौत की सजा का प्रावधान कानून में किया गया है। सरकार स्कूली छात्रों के अभिभावकों से मदिरा सेवन कभी नहीं करने का संकल्पपत्र भरवा रही है। बिहार पुलिस का एक कंट्रोल रूम मदिराबंदी सुनिश्चित करने के लिए स्टेट एक्साइज विभाग के कॉल सेंटर के साथ काम करेगा।
चूंकि पुरुषों में बढ़ती हुई मद्यपान की प्रवृत्ति के कारण निम्न एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाएं पारिवारिक हिंसा मारपीट की शिकार होती रही थीं इसलिए बिहार में मदिराबंदी से महिला वर्ग में सबसे अधिक खुशी है। किन्तु दूसरी ओर दुखी होने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है। मदिरा कारोबारियों का ध्ंाधा बन्द हो जाने से उनमें नाराजगी होना स्वाभाविक है। हर एक खुशी में जश्न मनाने के लिए तथा हर एक गम को भुलाने के लिए दारूपान का बहाना तलाशने वाले लोग भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्णय से बहुत दुखी हैं। सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी दुखी हैं कि दारूबंदी के कारण चुनाव प्रचार सूखा-सूखा हो जाएगा तथा वे मतदाताओं को किस प्रकार रिझा पाएंगे इसकी समस्या आएगी? बिहार के राजकोष एवं अर्थव्यवस्था की चिन्ता करने वाले बुद्धिजीवी मदिराबंदी के निर्णय को अव्यवहारिक मानते हैं। इनका कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल्दबाजी में मदिराबंदी करके राज्य के स्वयं के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत अपने हाथों से गंवा दिया। अभी तक राजस्व जुटाने में उत्पाद कर की दरों में वृद्धि को प्राथमिकता दी जाती थी। अब वित्तमंत्रियों के सामने राजस्व जुटाने की समस्या आएगी। मदिराबंदी के आलोचकों का कहना है कि मदिराबंदी से अवैध मदिरा के कारोबार और तस्करी को बढ़ावा मिलेगा। मिलावटी मदिरा का सेवन करने वाले व्यक्तियों की मौतों की संख्या में वृद्धि होगी। आलोचकों का कहना है कि 1977 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर द्वारा लागू की गई मदिराबंदी असफल रहने के कारण बिहार में मदिराबंदी को वापस लेकर कारोबार को खुला करना पड़ा था। यही नहीं, आंध्रपदेश, कर्नाटक, हरियाणा, मिजोरम, नागालैंड आदि राज्यों में वहां की सरकारों ने उत्साह में आकर की गई मदिराबंदी को जमीनी समस्याओं से रूबरू होने के बाद मदिराबंदी को हटाने हेतु मजबूर होना पड़ा। आलोचकों का कहना है कि बिहार में मदिराबंदी दीर्घकाल नहीं चल पाएगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि राज्य में मदिराबंदी से राज्य को करोड़ों रुपए के स्वयं के राजस्व से वंचित होने की तुलना में राज्य के आम परिवारों का कल्याण अधिक महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि सीमित आमदनी वाले आम परिवारों में पुरुषों द्वारा मदिरा पर खर्च होने वाले पैसे की बचत को परिवार के स्वास्थ्य, शिक्षा, और पोषण सहित अच्छे कामों पर खर्च करेंगे इससे परिवार का जीवन स्तर बढ़ेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयानों से झलकता है कि वे हर स्थिति में मदिराबंदी को जारी रखने में कृतसंकल्प हैं। इसमें दो मत नहीं कि फिलहाल कुछ साल बिहार को मदिराबंदी के कारण राजस्व की क्षति उठानी पड़ सकती है। किन्तु यह एक अल्पकालिक स्थिति रहेगी।

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