बिसाहड़ा में फिर बढ़ा तनाव, पीएसी तैनात

  • दादरी कांड के आरोपी रवि उर्फ रॉबिन की मौत से ग्रामीणों में आक्रोश
  • परिजनों ने जेल में बंद रवि की पीट-पीट कर हत्या किए जाने का लगाया आरोप

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। ग्रेटर नोएडा के बिसहड़ा गांव एक बार फिर चर्चा में है। बिसाहड़ा में दादरी कांड के आरोपी रवि उर्फ रॉबिन की मौत के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस घटना में रवि के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाये हैं। ग्रामीणों में काफी आक्रोश और जेल प्रशासन के खिलाफ गुस्सा नजर आ रहा है। आज सुबह ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अखलाक के भाई की गिरफ्तारी की मांग की है। इसलिए प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और पीएसी के जवानों को गांव के अंदर और बाहर तैनात कर दिया है। आज दोपहर करीब दो बजे रवि का शव बिसाहड़ा लाया जायेगा। इसलिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मामले को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।
बिसाहड़ा गांव के लोगों ने आज सरकार के खिलाफ जुलूस निकाला और जान मोहम्मद को गिरफ्तार करने की मांग की। जुलूस निकालने वालों के साथ स्थानीय नेता भी मौजूद रहे। इन नेताओं का कहना है कि जेल में हमारे बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। पहले भी हमने अलर्ट किया था, इसके बावजूद उनकी सुरक्षा का जेल प्रशासन ने ठोस इंतजाम नहीं किया। इन लोगों ने जान मोहम्मद की गिरफ्तारी, पीडि़त परिवार के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा, जेलर के खिलाफ मामला दर्ज करने और रवि की पत्नी को नौकरी देने की मांग की है। इस मामले में गांव वालों और ग्राम प्रधान ने ऐलान किया है कि जब तक जान मोहम्मद को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक रवि का शव आने के बाद भी दाह संस्कार नहीं किया जाएगा। बता दें कि जान मोहम्मद अखलाक का छोटा भाई है और दादरी में ही रहता है। गांव वालों का आरोप है कि उसी की वजह से बच्चे (आरोपी) जेल गए। वहीं स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक दादरी कांड के आरोपी रवि उर्फ रॉबिन को अखलाक की हत्या के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। फेफड़े में संक्रमण के चलते उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पहले उसे नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन जब मंगलवार की सुबह 11 बजे तबियत और ज्यादा बिगड़ गई, तो उसे एलएनजेपी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के दौरान ही रवि की मौत हो गई।

जेल प्रशासन से खफा परिजन

भाई विक्रम का आरोप है कि जेल प्रशासन के अधिकारियों ने जान-बूझकर रवि को समय से अस्पताल नहीं पहुंचाया। यदि समय से उपचार मिल जाता, तो उसके भाई की जान बच सकती थी। यह भी आरोप लगाया कि जेल में उसके भाई को काफी परेशान किया जाता था। दो दिन पहले वह रवि से मिलने जेल गया था, तो उसने मुलाकात के दौरान बताया था कि जेल के कर्मचारी घर पर फोन करने के बदले एक मिस्ड कॉल के एक हजार रुपए लेते हैं। उसके साथ मारपीट भी करते हैं। विक्रम के मुताबिक उसके भाई से जेल में जबरन उठक-बैठक करवाई गई थी। इसलिए फेफड़े में संक्रमण की समस्या हुई। जेल में अधिकारियों ने जानबूझकर उसका सही तरीके से इलाज नहीं करवाया। इसलिए उसकी मौत हो गई।

क्या था मामला

दादरी के बिसाहड़ा गांव में 28 सितंबर 2015 की रात गोहत्या की खबर पर भीड़ ने पीट पीटकर अखलाक की हत्या कर दी थी। साथ ही उनके बेटे दानिश को पीट पीटकर अधमरा कर दिया गया था। बाद में अखलाक के परिवार पर की शिकायत पर 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि पुलिस जांच में एक आरोपी को निर्दोष पाया था। मामले में कुल 18 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। 17 आरोपी जेल में है, जबकि एक नाबालिग को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

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