बिना पंजीकरण हफ्ता देकर चल रहे हैं ऑटो

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

Captureलखनऊ। दीप्ती सरना अपहरण काण्ड के बाद भी सूबे की पुलिस ने कोई सीख नहीं ली है। दीप्ती सरना अपहरण काण्ड में जिस ऑटो का इस्तेमाल किया गया था शुरुआत में पुलिस उसे ट्रेस नहीं कर पाई थी सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था। इतने बड़े अपहरण काण्ड के बाद भी सूबे की पुलिस सबक लेतीे नहीं दिख रही है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि राजधानी में सैकड़ों की संख्या में अपंजीकृत ऑटोरिक्शा फर्राटे भर रहे हैं। जिन पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। यह जानते हुए भी कि इन अपंजीकृत आटो से कई तरह के अपराधों को अंजाम दिया जा सकता है इस बात से सूबे की पुलिस अभी भी चेती नहीं है। और ऐसा भी नहीं है कि इसकी खबर पुलिस को नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि कई ऑटो बिना दस्तावेजों के ही सवारियों को यहां से वहां ले जा रहे हैं और ये सब पुलिस की नाक के तले हो रहा है। इस बात से सहज ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी की पुलिस अपनी मर्जी से इन्हें खुलेआम सडक़ों तर चलने का लाइसेंस दे चुकी है। इस पर सोचने वाली बात यह है कि ये सब जानबूझ के अनदेखा किया जा रहा है या फिर सूबे की पुलिस किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है। अगर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होती है तो पुलिस के लिए ऑटो मालिक की पहचान कर पाना पुलिस के लिये टेढ़ी खीर साबित होगा।
पुलिस वाले करते हैं वसूली
इस तरह के गंभीर मामलों में ढिलाई की वजह यह है कि राजधानी की पुलिस इन अवैध ऑटोरिक्शा चालकों से वसूली करती है। जिनमें कई थानेदार प्रतिदिन का सौ रुपये इन अवैध ऑटोरिक्शा चालकों से वसूलते हैं तो कई अपने इलाके के इन अवैध ऑटोरिक्शा चालकों से महीने भर की वसूली कर लेते हैं और खुलेआम इन ऑटोरिक्शा चालकों को ऑटो दौड़ाने की अनुमति दे देते हैं। जिसका नतीजा यह होता है कि इन ऑटोरिक्शा चालकों को पुलिस का कोई खैाफ नहीं रहता और ऐसे ही ऑटोरिक्शा चालक दीप्ती अपहरण काण्ड जैसे अपराधों को अंजाम देते है।
ऑटो चालक करते हैं अभद्र व्यवहार
राजधानी में ऑटो चालकों की मनमानी आम बात है, जिससे आम जनता अक्सर परेशान रहती है। पूरी तरह से सडक़ पर उनका कब्जा रहता है और पुलिस इन्हें टोकने की जहमत नहीं उठाती। मनचाहा किराया व इनकी गुण्डागर्दी का सामना तो महिलाओं को आए दिन करना पड़ता है। अवैध ऑटो रिक्शा चालक अपने ऑटो रिक्शा में मीटर नहीं लगवाते हैं जिससे ऑटो के उचित किराये का पता नहीं चल पाता, उसके बाद ये मनचाहे किराये की मांग करते हंै और उसका विरोध करने पर सवारी से लडऩे लगते हंै, और गाली गलौच शुुरू कर देते हैं।

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