बिना किसी गलती के लाखों रुपये जुर्माना भरेंगे कोटेदार, कार्डधारक भी हैं परेशान

दबंगई पर आमादा आवश्यक वस्तु निगम के अधिकारी

कोटेदारों की समस्याओं पर गंभीर नहीं प्रशासन, राशन के इंतजार में दिन गिन रहे कार्डधारक

Capture प्रभात तिवारी
लखनऊ। जिले में अतिरिक्त एपीएल के नाम पर जमा धनराशि कोटेदारों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। आवश्यक वस्तु निगम के अधिकारियों की दबंगई और लापरवाही के चलते समय से राशन का उठान नहीं हो रहा है। इसका खामियाजा कोटेदारों और कार्डधारकों को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह है कोटेदारों ने जिन बैंकों का ओवरड्राफ्ट जमा किया है, वहां समय पर धनराशि जमा कर पा रहे हैं। इस कारण बैंकों ने ब्याज और जुर्माना लगाने का काम भी शुरू कर दिया है। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
भारत सरकार ने गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले (एपीएल) कार्ड धारकों को सर्वे के आधार पर अतिरिक्त राशन देने का निर्णय लिया था। इसमें लखनऊ के एपीएल कार्डधारकों को भी योजना का लाभ दिया जाना था, लेकिन आवश्यक वस्तु निगम के अधिकारियों की दबंगई और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी कार्डधारकों और कोटेदारों दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। एपीएल कार्ड धारकों को समय से राशन नहीं मिल रहा है। इसकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को भी है लेकिन जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है।

अधिकारियों ने साधी चुप्पी

उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के मदन गोपाल यादव के मुताबिक लखनऊ में कोटेदारों से मई, जून और जुलाई महीने के अतिरिक्त एपीएल का अग्रिम पैसा जमा करवा लिया गया। इसमें प्रति एपीएल कार्ड धारक पांच किग्रा गेहूं या चावल बांटा जाना है। एक कोटेदार के पास औसतन 800 कार्डधारक होते हैं, जिनको राशन बांटने की जिम्मेदारी कोटेदारों की होती है। यदि समय से राशन नहीं मिलता तो कार्डधारकों को जवाब देना मुश्किल हो जाता है। जबकि लखनऊ में मई, जून और जुलाई समेत तीन महीने का आवंटित राशन नहीं आया है। आंकड़ों पर गौर करें तो सरकार की तरफ से गेहूं का मूल्य 6.60 रुपये और चावल का मूल्य 8.80 रुपये निर्धारित है। इन सबके बावजूद आवश्यक वस्तु निगम के अधिकारियों ने राशन का उठान नहीं करवाया। जिले में आवश्यक वस्तु निगम के किसी भी गोदाम पर अतिरिक्त एपीएल का राशन नहीं पहुंचा। इस कारण कार्डधारको को समय से राशन नहीं मिला और ओवर ड्राफ्ट के माध्यम से बैंकों में जमा की जाने वाली धनराशि भी समय से नहीं पहुंची। इस मामले में कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारी समायोजन के मुद्दे पर भी चुप्पी साधे हैं। इस मामले में जिला पूर्ति अधिकारी और अपर जिलाधिकारी आपूर्ति के सीयूजी नंबर पर फोन किया गया लेकिन अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी अपने काम के प्रति कितने गंभीर हैं।

सवा आठ लाख एपीएल कार्ड धारक

जिले में राशन कार्ड धारकों की संख्या 10 लाख 22 है। इसमें एपीएल कार्ड धारकों की संख्या आठ लाख 25 हजार 602, बीपीएल कार्डधारकों की संख्या 24 हजार 378 और अंत्योदय कार्ड धारकों की संख्या 50 हजार 112 है। इसमें सरकार ने एपीएल कार्ड धारकों को अतिरिक्त एपीएल देने की योजना लखनऊ में भी शुरू की थी, जिसमें प्रारंभ में प्रति कार्डधारक 10 किग्रा अतिरिक्त राशन देने की व्यवस्था थी लेकिन समय के साथ कार्ड धारकों को मिलने वाले राशन की मात्रा में भी कटौती कर दी गई। अब प्रति कार्ड धारक पांच किग्रा राशन देने की व्यवस्था लागू है। आवश्यव वस्तु निगम के गोदाम से राशन की दुकानों पर अनाज पहुंचाने का जिम्मा ठेकेदारों को दिया गया है, जिसकी वजह से समय से दुकानों पर राशन भी नहीं पहुंच पाता है। नतीजा कार्डधारक महीने की आखिरी तिथि तक राशन की आस लगाये रहता है, नया महीना शुरू होते ही अगले महीने में मिलने वाले राशन की उल्टी गिनती शुरू हो जाती है।

कोटेदारों की विश्वसनीयता पर संकट

जिले में अतिरिक्त एपीएल कोटा के अनाज की कीमत बैंकों में ओवर ड्राफ्ट के माध्यम से जमा की जाती है। कोटेदार अपने कोटा के मुताबिक आबंटित अनाज कार्डधारकों को बेचता है। इसके बाद ओवर ड्राफ्ट की रकम बैंकों में समय से जमा करता है। इसमें उसकी विश्वसीनयता बनी रहती है। बैंकों को समय से धनराशि जमा नहीं करने पर ब्याज और जुर्माना वसूलने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। जिले में अनाज का आवंटन करने वाले सभी कोटेदारों का बैंक में चालू खाता है। इस कारण हर महीने आवंटित अनाज की कीमत ओवर ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करते हैं। इसमें महीने भर के अंदर उक्त रकम बैंक में जमा करनी होती है। लेकिन तीन महीने से अतिरिक्त एपीएल का राशन नहीं आने से कोटेदारों को न्यूनतम 12-18 प्रतिशत तक का ब्याज और जुर्माना जमा करना पड़ेगा। इसकी चिन्ता कोटेदारों को सता रही है लेकिन प्रशासनिक अधिकारी समय से राशन का उठान करवाने और समस्या का समाधान करवाने की हीलाहवाली कर रहे हैं। कार्डधारकों को सरकारी योजना के मुताबिक राशन नहीं मिल पा रहा है। हर महीने राशन वितरण के मुद्ïदे पर कोटेदारों और कार्डधारकों के बीच वाद-विवाद और मारपीट की घटनायें भी होती रहती हैं।

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