बिजली विभाग के निशाने पर हर आमो-खास

जिले के 37 सरकारी विभागों के अलावा अन्य बड़े बकायेदारों के खिलाफ भी कड़ाई से हो रही कार्रवाई
बिजली का कनेक्शन कटने के बाद भी कई सरकारी विभागों के अधिकारियों ने साधी चुप्पी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अक्सर जिले में बिजली चोरी करने वाले, समय से बिजली का बिल जमा नहीं करने और मीटर में छेड़छाड़ करने वाले सामान्य व्यक्ति ही लेसा के निशाने पर रहते थे। अब तक लेसा सरकारी विभागों और न्यायालयों के खिलाफ बकाया के मामलों में कड़ी कार्रवाई करने से बचता था लेकिन जब से मुख्यमंत्री ने बिजली विभाग को अपने हाथ में लिया, इसके अधिकारियों में अलग ही जोश दिखने लगा है। बिजली विभाग ने हर खासोआम के लिए नियमों का पालन करने की बाध्यता को कड़ाई से लागू करना शुरू कर दिया। विभाग के अधिकारियों ने 5000 रुपये से ऊपर के बकायेदारों और करीब 75 करोड़ रुपये का बिजली बिल जमा नहीं करने वाले 37 सरकारी विभागों की सूची तैयार की और नोटिस भेजकर तय समय पर बिल जमा नहीं करने पर कनेक् शन काटना शुरू कर दिया। इसमें चोरी से बिजली जलाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाने की कार्रवाई भी की जा रही है। इससे विद्युत व्यवस्था में सुधार लाने के प्रयासों की सार्थकता और बिजली चोरी पर नियंत्रण भी नियंत्रण लगाने की कोशिशें हकीकत का रूप लेने लगी हैं।
लेसा ने 15 मार्च तक बिजली का बकाया बिल जमा करने का आश्वासन देने वाले सरकारी विभागों की सूची तैयार की थी। इसमें 37 सरकारी विभागों पर कुल 76 करोड़ रुपया का बकाया था। लेसा ने सभी विभागों को बिल जमा करने की अन्तिम समय सीमा निर्धारित कर दी थी। इसके बावजूद सरकारी विभागों ने बिजली का बिल जमा करने में लापरवाही बरती। आखिरकार लेसा ने सरकारी विभागों में बिजली का कनेक् शन काटने की कार्रवाई शुरू कर दी। इसमें 20 सरकारी विभागों का कनेक्शन काटने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। इसके अलावा अन्य 17 विभागों का बिजली का बिल तय समय पर जमा नहीं होने पर कनेक् शन काटने की प्लानिंग है। लेसा के तेवर बिल्कुल सख्त हैं। इसके बाद भी सरकारी विभागों की कान पर जूं रेंगती नहीं दिख रही है। अधिकारी बिजली कटने को लेकर परेशान हैं लेकिन बिजली का बकाया बिल जमा करने को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं दिख रहे हैं।

आम जनता में भी विभागीय कार्रवाई का खौफ
बिजली विभाग ने होली के त्यौहार पर अपने सभी उपभोक्ताओं को होली की बधाई के साध ही 5000 रुपये से अधिक का बिल बकाया होने पर कनेक् शन काटने की चेतावनी दी थी। इसका मकसद लोगों को बिजली का बिल जमा करने के प्रति जागरूक करना था लेकिन बहुत से लोगों ने बिजली का बिल जमा करने में सक्रियता नहीं दिखाई। इस कारण लेसा ने बिजली का बिल जमा नहीं करने वाले 5000 रुपये से अधिक के बकायेदारों का कनेक् शन काटने की कार्रवाई शुरू कर दी। लेसा ने चौक, ठाकुरगंज, अमीनाबाद, अलीगंज और अन्य कई क्षेत्रों में 5000 से ऊपर के बकायेदारों का कनेक् शन काटने के साथ ही बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई। इन लोगों पर जुर्माना भी लगाया गया। इससे आम लोगों में भी बिजली चोरी को लेकर दहशत का माहौल है।

विभागीय कर्मचारियों पर बिजली चोरी करवाने का आरोप
जिले में बिजली चोरी पर नियंत्रण लगाने की कोशिशों पर विभागीय कर्मचारी ही पानी फेरने का काम करते हैं। हर आम और खास आदमी को मालूम है कि विभागीय कर्मचारियों से साठ-गांठ कर धड़ल्ले से बिजली की चोरी की जा सकती है। इसमें बिना वैध कनेक्शन के बिजली जलाने वालों की संख्या हजारों में है। इस बात का खुलासा लेसा की तरफ से क्षेत्र में अभियान चलाने के दौरान होता रहता है। इसलिए बिजली चोरी पर नियंत्रण लगाने के लिए सबसे पहले विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से चलने वाले रैकेट पर रोक लगानी होगी।

बिलिंग सुविधा में सुधार की जरूरत
बिजली का बिल तय समय पर जमा करने के लिए बिलिंग काउंटरों पर रोजाना लंबी भीड़ लगती है लेकिन सर्वर डाउन होने की वजह से अधिकांश लोगों को घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है। इसमें कई बार बिल जमा हो जाता है लेकिन रसीद नहीं निकल पाती है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता को सर्वर सही होने और रसीद मिलने का इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा ई-बिलिंग काउंटरों पर सर्वर डाउन होने की
वजह से बिल जमा करने में काफी समय लगता है। उदाहरण के तौर पर सर्वर डाउन होने पर एक बिजली का बिल जमा करने और रसीद मिलने में कम से कम 8-10 मिनट का समय लगता है। जबकि सर्वर सही होने पर बमुश्किल दो से तीन मिनट का समय लगता है। इसलिए बिजली विभाग को अपने संसाधनों और सुविधाओं में भी सुधार करने की जरूरत है।

बकायेदारों की लिस्ट में शामिल सरकारी विभाग
लेसा की तरफ से सरकारी विभागों को बड़े बकायेदारों की सूची में शामिल किया गया है। उसमें जवाहर भवन , किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, बहुमंजिला आवास डालीबाग-3, बहुमंजिला मंत्री आवास डालीबाग, बहुमंजिला मंत्री आवास ओल्ड डालीबाग, राजस्व परिषद, राज्य सम्पत्ति विभाग दारुलसफा, वीआईपी, वीवीआईपी गेस्ट हाउस (मीराबाई मार्ग) महात्मागांधी मार्ग एवं डालीबाग पर भी बकाया है। इसी प्रकार पीएसी बटालियन 35वीं वाहिनी, पीएसी बटालियन 32वीं वाहिनी, पशुपालन विभाग, सीआरपीएफ, कृषि विभाग, युवा कल्याण विभाग, ग्राम विकास विभाग, डूडा, पंचायती राज्य विभाग, जिला प्रशासन एवं तहसील, जिला न्यायालय, फायर स्टेशन, खनिज विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण, राज्य सम्पत्ति विभाग के अधीन अन्य संयोजन, विकास विभाग एवं बीडीओ कार्यालय, अवध बार एसोसिएशन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और विभिन्न पुलिस कार्यालय भी बकायेदारों में शामिल हैं। इसमें कृषि विभाग पर 274 लाख रुपये, सीआरपीएफ पर 243 लाख रुपये, पीएसी 35वीं वाहिनी पर 243 लाख रुपये, पीएसी 32वीं बटालियन पर 179 लाख रुपये, जिला प्रशासन पर 198 लाख और जिला न्यायालय पर 219 लाख, समाज कल्याण विभाग पर 69 लाख रुपये, खेलकूद विभाग पर 64 लाख रुपये, तकनीकी शिक्षा विभाग पर 40 लाख रुपये, सूचना विभाग पर 10.13 लाख, वन विभाग पर 21 लाख रुपये और युवा कल्याण पर एक लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। गौलतलब हो कि सरकारी विभाग बिजली का सारा बकाया बिल जमा कर दें और तय समय पर बिजली का बिल जमा करते रहें, तो बिजली आपूर्ति की समस्या काफी हद तक दूर की जा सकती है।
सरकारी विभागों के खिलाफ बकाया जमा नहीं करने की स्थिति में कनेक् शन काटने का अभियान जारी रहेगा। इसमें 7 अप्रैल तक की जाने वाली कार्रवाई की रुपरेखा तैयार कर ली गई है। इसमें कुल 37 बकायेदार शामिल हैं। अब तक छह दिनों में 20 सरकारी विभागों का कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा 5000 रुपये से ऊपर के बकायेदारों के खिलाफ भी अभियान चलाया जा रहा है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
एसके वर्मा मुख्य अभियंता, लेसा

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